मासिक वेब पत्रिका उदंती.com में आप नियमित पढ़ते हैं - शिक्षा • समाज • कला- संस्कृति • पर्यावरण आदि से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर आलेख, और साथ में अनकही • यात्रा वृतांत • संस्मरण • कहानी • कविता • व्यंग्य • लघुकथा • किताबें ... आपकी मौलिक रचनाओं का हमेशा स्वागत है।
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Sep 5, 2026

उदंती.com, सितम्बर - 2026

चित्रः डॉ. सुनीता वर्मा
 भिलाई, छत्तीसगढ़
 वर्ष -19, अंक - 2

"प्रकृति का अध्ययन करो,

 प्रकृति से प्रेम करो, 

प्रकृति के करीब रहो। 

प्रकृति तुम्हें कभी निराश नहीं करेगी।"  

- फ्रैंक लॉयड राइट

अनकहीः नेपाल आपदाः प्रकृति का कहर या... – डॉ. रत्ना वर्मा

पर्यावरणः जलवायु परिवर्तन  और लुप्त होता अमरनाथ शिवलिंग  - पंकज चतुर्वेदी

आलेखः अ द् भु त योगदान देने वाली, भारतीय महिला वैज्ञानिक - निर्देश निधि

हाइकुः  किसान की कथाएँ - भीकम सिंह

प्रदूषणः ई-कचरे के समाधान की दिशा में बड़ी उपलब्धि - प्रमोद भार्गव

लघुकथाः सबक – छवि निगम

विज्ञानः झगड़े से बचना हो तो गले मिलें 

बाल कहानीः सिया का सपना - डॉ. वंदना शर्मा

लघुकथाः प्रार्थनाएँ - अनिता मण्डा

कविताः मृत्यु, तू जब भी आना... - डॉ. पूनम चौधरी

संस्मरणः भाऊ जी - सुदर्शन रत्नाकर      

जागरूकताः प्राथमिक आवश्यकता- न फैशन न दिखावा  - लिली मित्रा

कहानीः बड़ी जिज्जी - डॉ. रंजना जायसवाल

व्यंग्यः भेंट एक लेखक से - गिरिराजशरण अग्रवाल

तीन कविताएँः शांति की प्रतीक्षा, लांछन, रूका वक्त - रेखा शाह आरबी

किताबेंः पर्यावरण संकट का जीवंत दस्तावेज - रोहित कौशिक

Aug 1, 2026

उदंती.com, अगस्त- 2026

 वर्ष - 19, अंक - 1

"शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है
 जिसका उपयोग आप 
दुनिया को बदलने के लिए
 कर सकते हैं।" - नेल्सन मंडेला

अनकहीः  देश का भविष्य और युवाओं का संघर्ष  - डॉ. रत्ना वर्मा

यादेंः तीजन बाई के साथ वे दो घंटे  - डॉ. रत्ना वर्मा

पर्व - संस्कृतिः हरेली तिहार आ गे  - रविन्द्र गिन्नौरे

आलेखः पत्रों में लोक-संग्राम - प्रमोद भार्गव

शौर्यः सिपाही बबली सिंह - हरी राम यादव

लघुकथाः दूसरा सरोवर - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

प्रसंगः लड़का और आयरिश टोपी  - आदित्य पाधा, अनुवाद : शशि पाधा

कविताः टूट रही है डोर - कृष्णा वर्मा

दो नवगीतः 1. गाँव की पगडंडियाँ, 2. उजालों का झरना - रमेश गौतम

दो संस्मरणः 1. कपड़े सुखाना भी एक कला है, 2. बाबू मोशाय  - अंजू खरबंदा

व्यंग्यः हम आजाद हैं -  विनोद साव

हाइबनः अगले जनम...  -  प्रियंका गुप्ता

कविताः ठहरा हुआ पल - भावना सक्सैना

लघुकथाएँः 1. आखिरी तारीख, 2. खरबूजा - सुकेश साहनी

लघुकथाएँः 1. काम,2. कोशिश 3. कोटा 4. कथा चलती रहे - स्नेह गोस्वामी

चिंतनः ख्वाबों का खयाल - डॉ. महेश परिमल

विज्ञानः क्या एआई भी  पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकता है?

 किताबेंः डिटेक्टिव मिरांडा- यात्रा पुरातन से नूतन  - विजय जोशी

Jul 1, 2026

उदंती.com, जुलाई - 2026

 वर्ष - 18, अंक - 12

प्रकृति अपरिमित ज्ञान का भंडार है, पत्ते-पत्ते में शिक्षापूर्ण पाठ हैं, परंतु उससे लाभ उठाने के लिए अनुभव आवश्यक है। - हरिऔध

अनकहीः अनुभवों की छतरी और रिश्तों की बारिश - डॉ. रत्ना वर्मा

शिक्षाः आखिर क्या सीख रहे हैं ये ‘बाल विज्ञानी’? - बृजेंद्र दुबे

लघु लेखः जीवन पहले या सम्मान? - हिना श्रीवास्तव

पर्यावरणः अपशिष्ट मत सोचो। अवसर सोचो! - अपर्णा विश्वनाथ

कविताः शब्दमुक्त - आशा पाण्डेय

यात्रा वृतान्तः बारिश में भीगी अमरकंटक - डॉ. रत्ना वर्मा

शोधः क्या कृत्रिम बुद्धि बता सकती है आपकी सेहत का भविष्य?

प्रकृतिः कैलाश-मानसरोवर में भी है फूलों की  घाटी - सीताराम गुप्ता

ललित निबंधः  घिर घिर आये काले कजरारे मेघ - रविन्द्र गिन्नौरे

कविताः आषाढ़ के बादल - अर्चना अनुपम

व्यंग्यः प्रपंच - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

कविताः पानी में बहुत नीचे तक -  मोती प्रसाद साहू

कहानीः लव यू मोर - डॉ. यशोधरा भटनागर

दो कविताएँः 1. उर्मिला हूँ मैं तुम्हारी, 2. अमलतास बन जाऊँगी - गुंजन अग्रवाल ‘अनहद’

दो लघुकथाएँः 1- ईश्वर की खाँसी, 2- बच्चों की आँखें  - आनन्द हर्षुल

लघुकथाः उजली दुनिया - अन्तरा करवडे

किताबेंः अनादि समर : छावा के बलिदान से जाग उठा हिन्दू - डॉ. लोकेन्द्र सिंह

कविताः कुछ और... - रमेश कुमार सोनी


Jun 1, 2026

उदंती.com, जून -2026

वर्ष - 18, अंक - 11

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

                                      - बशीर बद्र

 अनकहीः वर्तमान की धूप और भविष्य के बादल  - डॉ. रत्ना वर्मा

  प्रकृतिः मौसम की मार से कराहती मानवता - पंकज चतुर्वेदी 

 मौसमः सूरज के तीखे होते तेवर  - प्रमोद भार्गव

 विज्ञानः जलवायु संकट से निपटने, पेड़ व तकनीक दोनों जरूरी 

 तापमानः जम्मू-कश्‍मीर की वादियों पर  हीटवेव का प्रकोप - अजय मोहन

 कविताः गर्मी सबको सता रही है  - डॉ. शिवजी श्रीवास्तव

 संस्मरणः उसकी ख़ुशी ! - निर्देश निधि

 लघुकथाः हाथी के दाँत - विष्णु नागर

 स्मृति शेषः नर्मदा लड़ाई के साथी रमेश बिल्लौरे नहीं रहे 

 कविताः पीछे मुड़कर देखा जो मैंने - रमेश बिल्लौरे

 किताबेंः साहित्य का सुहाना सफ़र  - रमेश कुमार सोनी

 लघुकथा- पहली बार - रामकुमार आत्रेय

 कहानीः साँप का शाप - हरी राम यादव

 कविताः बालिका वधू - अनीता सैनी

 व्यंग्यः शासक हाथी और शोषित कुत्ता - डॉ. जेन्नी शबनम

स्वास्थ्यः देखभाल के नाम पर त्वचा खराब तो नहीं कर रहे? - प्रतिका गुप्ता

योग दिवसः योग से ही होगा कल्याण - जैस्मिन जोविअल

लघुकथाः  तिल - हरि मृदुल

योग दिवसः शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का उत्सव - डॉ. योगिता जोशी

दो कविताएँः 1.दक्षिण यात्रा के पूर्व , 2. अंतर्यात्रा - सत्या शर्मा ‘कीर्ति’


May 1, 2026

उदंती.com, मई - 2026

वर्ष- 18, अंक- 10

जंगल में घर बहुत ही कम हैं

बोले कैसे वास करेंगे?

घर में जंगल जब उग जाएँ 

जीने की क्या आस करेंगे।

              - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

इस अंक में

अनकहीः गर्मी से भागते हुए… क्या ‘सच’ से भी भाग रहे हैं? - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः मनोरंजन के बहाने आतंक का पाठ पढ़ते बाल-गोपाल - प्रमोद भार्गव

मनोविज्ञानः बच्चों को सोशल मीडिया की ‘लत’ - स्रोत फीचर्स

कविताः वे दो प्रौढ़ स्त्रियाँ! - अंजू खरबंदा

भाषाः पाँच सौ प्रतियाँ और करोड़ों के प्रतिनिधि - जयप्रकाश मानस

चिंतनः टूटना, बिखरना, समेटना और सँवरना  - डॉ. महेश परिमल

यात्रा वृतांतः कारों धाम की यात्रा कथा - मांडवी सिंह

लघुकथाः साँझा दर्द - सुदर्शन रत्नाकर

लघुकथाः 1. कूप मण्ड़ूक,  2. बैल - सुकेश साहनी

कथाः अंतिम याचना - बसंत राघव

लघुकथाः अगोचर - भीकम सिंह

कविताः बचा रहे जो आवश्यक है - पूनम चौधरी

कहानीः राही  - भावना सक्सैना

व्यंग्यः प्लास्टर वाली टाँग  - डॉ. मुकेश 'असीमित'

कविताः खामोशी - अनिता मण्डा

किताबेंः युवा क्रांतिकारी के  बहुआयामी  व्यक्तित्व से परिचित कराती कृति - प्रो. सुरंगमा यादव

आलेखः प्रेम शब्द का घटता अर्थ और भाषा की जिम्मेदारी - हिना श्रीवास्तव

सॉनेटः इस समय - अनिमा दास

खानपानः कॉफी के स्वाद निराले - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन

Apr 1, 2026

उदंती.com, अप्रैल - 2026

 वर्ष - 18, अंक -9

शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, 

मन की शक्ति बढ़ाना 

और आत्मनिर्भर बनाना है।

                          - स्वामी विवेकानंद

अनकहीः आस्था, परंपरा और हमारा विश्वास  - डॉ. रत्ना वर्मा

 आलेखः नए युवा और बदलती कैरियर संभावनाएँ - संध्‍या राजपुरोहित

 मौसमः भारत में जल्दी आ गई गर्मी, सिमट रही सर्दियाँ -  अजय मोहन

 यात्रा वृतांतः उदयेश्वर नीलकण्ठ महादेव मंदिर  - डॉ. आरती स्मित

 आलेखः जीवन के उत्तरकाल को सहजता से जीना सीखें - सीताराम गुप्ता

 प्रकृतिः घोंसलों पर लहराती लटकन सजावट नहीं, चकमा है 

 कथाः पहली बार - अर्चना राय

 तुतलाहटः भाषा का प्रथम संगीत - जयप्रकाश मानस

 कविताः निःशब्द -  डॉ. कनक लता मिश्रा

 लघुकथाः अदृश्य आघात - योगराज प्रभाकर

 कहानीः उदास आँखें - आशा पाण्डेय

 लघुकथाः मकड़ी - सुषमा गुप्ता

 संस्मरणः कमली तू आ गई... - देवी नागरानी

 व्यंग्यः हम मूर्खों के सिरमौर - गिरीश पंकज

 कविताः भूमि का शृंगार तरु है - पूर्णिमा राय

 दो नवगीतः 1. अवसादों का बंद पिटारा, 2. आकस्मिक  - डॉ. भावना तिवारी

 किताबेंः ‘बिजुरी’ के बहाने हमारे समय का सामाजिक रूपक - कुँवर सिंह

कविताः पर मेरे हुए तो नहीं - सुरभि डागर

आलेखः महानदी जल-बँटवारा - छत्तीसगढ़ और ओडिशा में विवाद - प्रमोद भार्गव

शोधः प्यास लगना और बुझना 


Mar 1, 2026

उदंती.com, मार्च - 2026

चित्रः डॉ. सुनीता वर्मा
वर्ष- 18, अंक - 8

सुधार बूढ़े आदमी नहीं कर सकते। वे तो बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होते हैं। सुधार तो युवाओ के परिश्रम, साहस, बलिदान और निष्ठा से होता हैं, जिन्हें भयभीत होना नहीं आता। -भगतसिंह

अनकहीः  विरोध प्रदर्शन की यह कैसी परंपरा? - डॉ. रत्ना वर्मा

पर्व- संस्कृतिः स्वच्छता का पर्व है होली - पंकज चतुर्वेदी

आलेखः कृषि और आहार की सनातन संस्कृति  - प्रमोद भार्गव

शोधः प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर कर रहे टैटू - स्रोत फीचर्स

धरोहरः भो-रम-देव - तुझमें मेरा मन रमा रहे - राहुल कुमार सिंह

दस क्षणिकाएँ  - डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

आलेखः ऑनलाइन गेमिंग एक मकड़जाल - डॉ. सुरंगमा यादव

स्वास्थ्यः क्या च्यूइंग गम चबाने से तनाव कम होता है? - ज़ुबैर सिद्दिकी

कविताः तुझसे ही तो मेरी होली - शशि पाधा

कविताः मेरी बहनो! - अनिता मंडा

शब्द चित्रः मक्खी नाना - रविन्द्र गिन्नौरे

कविताः हे ऋतु राज - अपर्णा विश्वनाथ

किताबेंः ज़िन्दगी के लिए विटामिन- विटामिन ज़िन्दगी -  रश्मि विभा त्रिपाठी

रेखाचित्रः दादी को चरखो चलाता मालवी दादा... नरहरि पटेल  - ज्योति जैन

कविताः किलकारी खामोश हो रही - सतीश उपाध्याय

व्यंग्यः रचना - पाठ का कुरता  - यशवंत कोठारी

लघुकथाः कुत्ते का खाना - दर्शन मितवा

कहानीः अकालग्रस्त इलाका - प्रेम गुप्ता ‘मानी’/ प्रियंका गुप्ता

लघुकथाः ताज - आरती स्मित

लघुकथाः हैप्पी फ़ैमिली - आशा शर्मा

व्यंग्यः पाला बदलने की कला - डॉ. हरि जोशी

Feb 1, 2026

उदंती.com, फरवरी - 2026

वर्ष- 18, अंक - 7

अपराध करने के लिए

चाहिए कठिन दुस्साहस

साहस उससे भी अधिक चाहिए

करने के लिए प्यार

             -विजय बहादुर सिंह

अनकहीः आज के दौर में एक शादी ऐसी भी... - डॉ. रत्ना वर्मा

ललित निबंधः वसंत...वसंत...कहाँ हो तुम... - डॉ. महेश परिमल

आलेखः छाप तिलक सब छीनी... - डॉ. सुशीला ओझा 

लघु लेखः प्यार एक दिन के उत्सव का नाम नहीं - डॉ. योगिता जोशी

दोहेः ऋतु वासंती - कमल कपूर

संस्मरणः प्रेमिल पिंकी - निर्देश निधि

प्रेरकः पिंजरे का संगीत और पहाड़ की गूँज - डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल

कुंडलिया छंदः प्रहरी रक्षक देश के - परमजीत कौर ‘रीत’

प्रकृतिः क्या पौधे भी संगीत सुनते हैं? - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन

कविताः आँखों में खिलते बसंत के फूल - अंजू निगम

शख्सियतः पर्यावरणविद वैज्ञानिक माधव गाडगिल - संकेत राउत

कविताः बीते हुए बसंत की याद में - सांत्वना श्रीकान्त

कविता: ढाई आखर - विजय जोशी

आलेखः प्रभावशाली बनना है तो दूसरों को महत्त्व दीजिए - सीताराम गुप्ता

यादेंः मुझसे ईश्वर ने  बुलवाया - राजनन्दिनी राजपूत

लघुकथाः ख़ुदा ख़ैर करे - छवि निगम   

बाल डायरी के अंशः सुबह हंस रही थी - डॉ. पद्मजा शर्मा

लघुकथाः उन सुनहरे दिनों की तरह - सन्तोष सुपेकर

कहानीः कद्रदान - गंभीर सिंह पालनी

व्यंग्यः नेताओं का शृंगार हैं चमचे - रेखा शाह आरबी

किताबेंः इतिहास के हाशिये से उठती एक चेतना - डॉ. पूनम चौधरी 

कविताः कविता करने के लिए... -  डॉ. रमाकांत गुप्‍ता


Jan 1, 2026

उदंती.com, जनवरी - 2026

वर्ष -18, अंक -6

मुदित नया साल

ओस भीगी धरा, किरनों के पाँव

उतरा है सूरज, अपने इस गाँव।

पत्तों से छनकर, आई है धूप

निखरा है प्यारा, धरती का रूप।

शरमाती कलियाँ, मुस्काते फूल

बाट में बिछाए, घास के दुकूल।

तरुवर पर पाखी, देते हैं ताल

द्वार पर खड़ा है, मुदित नया साल। 

                  - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

इस अंक में 

अनकहीः बौद्धिक स्वतंत्रता अभी बाकी है... - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः वंदे मातरम् की गौरव गाथा  - प्रमोद भार्गव

प्रकृतिः आते हैं नभ से जल के मेहमान - रविन्द्र गिन्नौरे

दोहेः सूरज आने को हुआ - हरेराम समीप

संस्मरणः अयोध्या से वाराणसी - उमंग और ऊर्जा भरते घाट - सुदर्शन रत्नाकर

यादेंः नव वर्ष - एक उत्सव वाला दिन - डॉ. जेन्नी शबनम

आलेखः शोर में डूबता जीवन : हेडफोन की आदत... - संध्या राजपुरोहित

लघुकथाः चिप - मीनू खरे

व्यंग्यः नये साल में लालबुझक्कड़ फिर मिल गए - गिरीश पंकज

व्यंग्यः शुभकामनाओं की दहशत - विनोद साव

लघुकथाएँः 1. सफाई, 2. लीडर - अनुवाद: सुकेश साहनी

लघुकथाः दुर्गंध - सुकेश साहनी

कविताः परिवार : सात कविताएँ - जयप्रकाश मानस

कहानीः बोझ - डॉ. योगिता जोशी

लघुकथाः खुशफहमी -  हसन जमाल

किताबेंः छंद विधान एवं सृजन - डॉ . कविता भट्ट

कविताः बचपन -  प्रगति गुप्ता

प्रेरकः पेंसिल का संदेश

Dec 3, 2025

उदंती.com, दिसम्बर - 2025

वर्ष - 18, अंक - 5

कुछ भी नया करने में संकोच मत करो, 

ये मत सोचो हार होगी। 

हार तो कभी नहीं होती, 

या तो जीत मिलेगी या फिर सीख। 

                            - एपीजे अब्दुल कलाम

इस अंक में

 अनकहीः  AI के नए दौर में आज के युवा - डॉ. रत्ना वर्मा

 आलेखः बस्तर में अंतिम साँसे गिनता नक्सलवाद - प्रमोद भार्गव 

 प्रेरकः डगलस बेडर से मिलिए लोग फेल क्यों होते हैं ?

पर्यावरणः क्या हम समय रहते हिमालय को बचा पाएँगे? - कविता भारद्वाज

 विज्ञानः डीएनए संरचना के सूत्रधार वॉटसन नहीं रहे 

शौर्य गाथाः श्यामल देव गोस्वामी जिसने मौत को दी दो बार मात  - हरी राम यादव

 श्रद्धा सुमनः ऐड गुरु पीयूष पांडे - छोड़ गए सबकी जुबान पर...- सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

 जीवन- दर्शनः न दु:ख शाश्वत है, न सुख, दुःख जाएगा, तभी आएगा सुख - डॉ. महेश परिमल

आलेखः देश का आभूषण है संस्कृति - शीला मिश्रा

 यादेंः  रेलवे स्टेशन - प्रशान्त

 कविताः एक प्रतिशत - डॉ. शैलजा सक्सेना

 पंजाबी कहानीः सुर्ख शालू - बलदेव सिंह ग्रेवाल, अनुवाद : सुभाष नीरव

लघुकथाः पेट दर्द  - प्रभुदयाल श्रीवास्तव 

 लघुकथाः खूशबू  - सुदर्शन रत्नाकर

 आँखों देखा हालः भारत और अमेरिका के कुत्ते  - डॉ. हरि जोशी 

 कविताः सरकार - सपन अग्रवाल

 अतीत के पन्ने सेः विस्थापन के दौर की बिखरती यादें - देवी नागरानी

 मनोविज्ञानः बच्चों का हास-परिहास और विकास

 पिछले दिनोंः रायबरेली में- कला, शब्द और चेतना का संगम  - कुसुम लता सिंह

 बाल-चौपाइयाँः 1. मिट्ठू प्यारे, 2. चिंटू का सपना  - सुशीला 'शील' स्वयंसिद्धा

Nov 2, 2025

उदंती.com, नवम्बर - 2025

वर्ष- 18, अंक- 4

बुद्ध से पूछा आपको क्या मिला ध्यान साधना से? बुद्ध ने कहा - मिला कुछ भी नहीं, खोया बहुत है- क्रोध, मोह, द्वेष, घृणा, बुढ़ापे और मौत का डर...

इस अंक में

अनकहीः बच्चों को खुला आसमान देना होगा  - डॉ. रत्ना वर्मा

प्रदूषणः दिवाली बाद गहराया देशव्यापी प्रदूषण - प्रमोद भार्गव

नवगीतः 1. लहर यहाँ भी आएगी 2. समय करता है जाप  - सतीश उपाध्याय 

धरोहरः चंदखुरी- माता कौशल्या और राम की भूमि होने का प्रमाण - राहुल कुमार सिंह

यादेंः यादगार एक्सप्रेस - विजय विक्रान्त

चिंतन- मननः जीवन की सुंदरता - अंजू खरबंदा  

कविताः झील के ऊपर अगहन माह के मेघ - गिरेन्द्रसिंह भदौरिया 'प्राण'

परम्पराः बेटी विदा करने की प्रथा- खोईंछा - मांडवी सिंह

कविताः छोटी लड़की - आरती स्मित

कहानीः साफ -सुथरी आँखों वाले - सुकेश साहनी

कविताः सच सच बताना युयुत्सु - निर्देश निधि

कुण्डलिया छंदः कहाँ अब आँगन तुलसी - परमजीत कौर 'रीत'

किताबेंः गद्य की विभिन्न विधाएँ: एक अनिवार्य पुस्तक - प्रो. स्मृति शुक्ला

व्यंग्यः अफ़सरनामा - डॉ मुकेश असीमित

कथाः फैसला - पूजा अग्निहोत्री

लघुकथाः सहानुभूति - सतीशराज पुष्करणा

कविताः अपने आप से - विजय जोशी 

प्रेरकः क्रोध का उपचार कैसे करें? - निशांत

लघुकथाः गुब्बारा - श्यामसुन्दर 'दीप्ति'

पिछले दिनोंः सुनीता आर्ट गैलरी में लोक कलाकारों का भावनात्मक संगम

Oct 1, 2025

उदंती.com, अक्टूबर 2025


 वर्ष 18, अंक- 3


मन की कंदीलें जलीं, भरने लगा उजास। 
अवसादी परिवेश में, लौट रही फिर आस।।
                                            - हरेराम समीप


इस अंक में 

अनकहीः अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा - डॉ.  रत्ना वर्मा

पर्व-संस्कृतिः समुद्र-मंथन से अवतरित  लक्ष्मी के रूप में समाई प्रकृति - प्रमोद भार्गव

कविताः 1. दीप क्या है? 2. दीपक जलते रहना - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

पर्व- संस्कृतिः छत्तीसगढ़ की दीपावली में मिट्टी कला - डॉ. सुनीता वर्मा

दो कविताएँः 1. दिवाली आई है, 2. एक दिवाली दिल में... - डॉ. कुँवर दिनेश सिंह 

कविताः ज्योति का उत्सव मनाएँ  - डॉ. शिवजी श्रीवास्तव

पर्यावरणः तेज़ आवाज़ और आपके कान - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन, सुशील चंदानी

पर्व संस्कृतिः जाने कहाँ गए वो दिन... - प्रियंका गुप्ता

कविताः क्या रखा है अब इन बातों में - डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री

संस्मरणः पार्क की सुनहरी शाम - जैस्मिन जोविअल

वृद्ध दिवसः  अनुभव का पिटारा है इनके पास - जेन्नी शबनम

दो लघुकथाएँः 1. आम आदमी, 2. और यह वही था - डॉ. शंकर पुणतांबेकर

दो लघुकथाएँः 1. मकान, 2. संतू  - श्याम सुन्दर अग्रवाल

पंजाबी कहानीः विषधर - बचिंत कौर - अनुवाद : सुभाष नीरव

कविताः आत्मदीप - हरिवंशराय बच्चन 

व्यंग्यः अमीर बचाइए, सिस्टम बचेगा - जवाहर चौधरी  

नज़्में: दीवाली के दीप जले - फ़िराक़ गोरखपुरी

 किताबेंः ‘कुछ रंग’ ग्राम्य जीवन की संवेदनाओं का रंगमंच -  पूनम चौधरी

 कविताः जगमग जगमग - सोहन लाल द्विवेदी

Sep 1, 2025

उदंती.com, सितम्बर - 2025

वर्ष - 18, अंक - 2

“आइये याद रखें: एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक शिक्षक दुनिया बदल सकते हैं।”            - मलाला यूसुफजई


अनकहीः आकांक्षाओं के बोझ तले दबा बचपन - डॉ. रत्ना वर्मा

पर्व- संस्कृतिः देवों के देव गणपति - रविन्द्र गिन्नौरे

प्रकृतिः उत्तराखंड में जल-प्रलय - प्रमोद भार्गव

खान-पानः एक सेहतमंद सब्जी टमाटर - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन

यात्रा वृत्तांतः ओह पहलगाम ! - विनोद साव

प्रसंगः गुरु साध्य नहीं  उत्प्रेरक तत्त्व मात्र है - सीताराम गुप्ता

लोक कलाः हमारी सांस्कृतिक धरोहर है ऐपण- ज्योतिर्मयी पन्त  

स्वास्थ्यः अचानक चौथे स्टेज का कैंसर कैसे हो जाता है? - निशांत

कविताः दस छोटी कविताएँ - छवि निगम 

हाइकुः स्वर्णिम यादें - कृष्णा वर्मा

चार लघुकथाएँः 1. शिक्षाकाल, 2. पिंजरे, 3. बोंजाई, 4. प्रक्षेपण - सुकेश साहनी

व्यंग्यः हर व्यक्ति अब महाज्ञानी !.. - गिरीश पंकज

कहानीः कैक्टस के फूल - डॉ. दीक्षा चौबे

प्रेरकः अच्छे पॉइंट्स 

लघुकथाः धमाका - प्रगति गुप्ता

किताबेंः अधूरी मूर्तियों का क्रंदन : एक संवेदनात्मक पड़ताल - डॉ. पूनम चौधरी

 चुनिंदा शेरः सुख जल्दी उड़ जाते - हस्तीमल हस्ती

Aug 1, 2025

उदंती.com, अगस्त - 2025

वर्ष -18, अंक - 1


कोई रंग नहीं होता बारिश के पानी का, 

लेकिन जब बरसता है,

 सारे ब्रम्हांड को रंगीन बना देता है।  


इस अंक में

अनकहीः सिर्फ एक स्कूल भवन नहीं गिरा, पूरी व्यवस्था ढह गई - डॉ. रत्ना वर्मा

शौर्य गाथाः कैप्टन केशव पाधा के जज्बे को सलाम  - शशि पाधा

आलेखः देश विभाजन की त्रासदी - प्रमोद भार्गव

लघु संस्मरणः वास्तविक शिक्षण - जैस्मिन जोविअल

रेखाचित्रः भेरूदादा - ज्योति जैन

कविताः सच्चा दुभाषिया - निर्देश निधि

हाइबनः नदी का दर्द - डॉ. सुरंगमा यादव

साक्षात्कारः प्रेरणा देती हैं विज्ञान कथाएँ - डॉ. जयंत नार्लीकर - चक्रेश जैन

लघुकथाः कुछ नहीं खरीदा  - सुदर्शन रत्नाकर

हाइकुः मेघ चंचल  - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

जीव-जगतः कुदरत को सँवारती तितलियाँ - डॉ. पीयूष गोयल

क्षणिकाएँ-  1. बताना ज़रा...  - हरकीरत हीर

चार लघुकथाएँ-  1. पगड़ी की आख़िरी गाँठ....  - जयप्रकाश मानस

प्रेरकः आपन तेज सम्हारो आपे  - प्रियंका गुप्ता

तीन बाल कविताएँ-  1.बोझ करो कम... - प्रभुदयाल श्रीवास्तव

व्यंग्यः श्रद्धांजलि की बढ़ती सभाएँ  - अख़्तर अली

कविताः रूठ गईं हैं फुर्सतें - निर्देश निधि

कहानीः सौगात  - सुमन कुमावत

कविताः आँखों की बातें - अंजू निगम

किताबेंः अक्षरलीला- लघु छंद में विराट अनुभूति - रश्मि विभा त्रिपाठी

जीवन दर्शनः डॉ. अब्दुल कलाम: मानवता की मिसाल - विजय जोशी

Jul 1, 2025

उदंती.com, जुलाई - 2025

 वर्ष - 17, अंक - 12

खुद को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका है किसी और को खुश करने का प्रयास करना।  – मार्क ट्वेन

अनकहीः विमान यात्रा ... हम कितने सुरक्षित हैं – डॉ. रत्ना वर्मा

पर्व- संस्कृतिः श्रावण मास और शिव की महिमा - प्रमोद भार्गव

प्रकृतिः दक्षिण भारत में भी है फूलों की घाटी - डॉ. ओ. पी. जोशी

चिंतनः बंद आँख से देख तमाशा दुनिया का... - डॉ. महेश परिमल

मिसालः आधुनिक रायगढ़ के शिल्पी दानवीर सेठ किरोड़ीमल -  बसन्त राघव

जीवन दर्शनः ज़ोहनेरिज़्म : एक कुख्यात अवधारणा - विजय जोशी

प्रेरकः जीवन का सौंदर्य - डॉ. पीयूष गोयल

कविताः अधूरे सत्य की पूर्णता -  अनीता सैनी

निबंधः हिम्मत और ज़िन्दगी  - रामधारी सिंह ‘दिनकर’

कहानीः औरत खेत नहीं - डॉ. परदेशीराम वर्मा

कविताः तोते - हरभगवान चावला

 दो लघुकथाएँः 1. उसके मरने के बाद, 2.  फुलस्टॉप  - सन्तोष सुपेकर

किताबेंः ‘तुम हो मुझमें’ नवगीतों की आत्मीय यात्रा - पूनम चौधरी

व्यंग्यः युद्ध और बुद्ध के बीच ट्रेड युद्ध की तीसरी टाँग - बी. एल. आच्छा

लघुकथाः परिवर्तन  - उपमा शर्मा

संस्मरणः एक भिखारी की कथा - श्यामल बिहारी महतो

लघुकथाः तीसरा झूठ - राममूरत 'राही'

कविताः झुक आई बदरिया - श्रीमती रीता प्रसाद

Jun 1, 2025

उदंती.com, जून - 2025

 वर्ष - 17, अंक - 11

संबंधों की गहराई का हुनर

पेड़ों से सीखिए,

जड़ों में चोट लगने से

साखें सूख जाती हैं...


इस अंक में 

अनकहीः देश हित में एकजुट होने का समय - डॉ.  रत्ना वर्मा

पर्यावरणः गर्मी में भी घुट रही है दिल्ली की सांसें - पंकज चतुर्वेदी

संस्मरणः मिट्टी का मोह - शशि पाधा

कविताः रणभेरी - डॉ. सुरंगमा यादव

आलेखः परमाणु हथियार- सुरक्षा के लिए पाकिस्तान हुआ शरणागत - प्रमोद भार्गव

पर्यावरणः विरासत को संजोकर रखने वाला अनूठा गाँव पिपलांत्री - सुनील कुमार महला

दो कविताएँः 1. प्यारी लड़की, 2. तेइस के तजुर्बे - स्वाति बरनवाल

प्रदूषणः हमारे पास ई-कचरा प्रबंधन की क्षमता नहीं - कुमार सिद्धार्थ

स्मृति शेषः पर्यावरण कार्यकर्ता समाज सुधारक विमला बहुगुणा - भारत डोगरा

कहानीः आशा की दूसरी किरण - ज्योतिर्मयी  पन्त

व्यंग्यः बुरे फसे डींग हाँककर - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

कविताः गायब -  राजेश पाठक

दो लघुकथाः 1. शुद्ध जात,  2.फाँस - सुदर्शन रत्नाकर

कविताः नशे का अँधेरा भविष्य - डॉ. कविता भट्ट

लघुकथाः परिचय - प्रगति गुप्ता

साहित्य मंथनः साहित्य के सरोकार को बड़ा फलक देती ‘सोंढूर- डायरी’ - विनोद साव

कविताः ग्लोबल वार्मिंग - डॉ. शिप्रा मिश्रा

जीवन दर्शनः टॉम स्मिथ- संस्कार से सफलता - विजय जोशी  

May 2, 2025

उदंती.com, मई - 2025

वर्ष - 17, अंक - 10

 हमें हार नहीं माननी चाहिए

और समस्या को हमें हराने की

अनुमति नहीं देनी चाहिए।

         – ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

इस अंक में

अनकहीः भारत की आत्मा पर हमला  - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः कठघरे में इंसाफ - डॉ. महेश परिमल

चिंतनः नैतिक मूल्यों का ह्रास और वर्तमान समाज - शिवजी श्रीवास्तव

यात्रा संस्मरणः फ़िनलैंड: जादुई पल और अनकही बातें - जैस्मिन जोविअल

आलेखः दुनिया की आधी आबादी को स्वच्छ पेयजल मयस्सर नहीं

प्रेरकः रेगिस्तान में दो मित्र - निशांत

प्रकृतिः म्यांमार भूकंप- शहरी विकास के लिए चेतावनी - प्रमोद भार्गव

स्वास्थ्यः कटहल के  लाभ  - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन

कविताः पिता, तुम सच में चले गए? - डॉ. पूनम चौधरी

निबंधः मेरी पहली रचना - प्रेमचंद

प्रसंगः एक भावुक दृश्य - लिली मित्रा

लघुकथाः 1. संवेदनाओं का डिजिटल संस्करण, 2. ज़िंदा  का  बोझ  - डॉ. सुषमा गुप्ता 

हाइबनः प्रवासी पक्षियों का आश्रय चिल्का झील - अंजू निगम

कहानीः ग़ैर-ज़रूरी सामान - नमिता सिंह 'आराधना'

व्यंग्यः दास्तान-ए-सांड - डॉ. मुकेश असीमित

कविताः गुमशुदा - सुरजीत 

लघुकथाः बड़कऊ - रचना श्रीवास्तव   

कविताः अम्मा का गुटका - भावना सक्सैना

ग़ज़लः तुम्हें राधा बुलाती है - अशोक शर्मा

किताबेंः विचित्रता से घिरे मन और बुद्धि - रश्मि विभा त्रिपाठी

कविताः नमस्कार - रवींद्रनाथ टैगोर, अनुवाद: मुरली चौधरी

जीवन दर्शनः उसैन बोल्ट: परहित सरिस धरम नहीं भाई - विजय जोशी 

Apr 1, 2025

उदंती.com, अप्रैल 2025

 वर्ष - 17, अंक - 9

हताशा   - विनोद कुमार शुक्ल

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था

व्यक्ति को मैं नहीं जानता था

हताशा को जानता था

इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया

मैंने हाथ बढ़ाया

मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ

मुझे वह नहीं जानता था

मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था

हम दोनों साथ चले

दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे

साथ चलने को जानते थे।                      

इस अंक में 

अनकहीः आम जनता और वीआईपी संस्कृति - डॉ. रत्ना वर्मा

अंतरंग: विनोद कुमार शुक्ल  को ज्ञानपीठ- सायास अनगढ़पन का सौंदर्य - विनोद साव

यात्रा-संस्मरणः भृगु लेक के द्वार तक - भीकम सिंह

सॉनेटः निर्दिष्ट दिशा में - अनिमा दास

प्रेरकः खाना खा लिया? तो अपने बर्तन भी धो लो! - निशांत

आलेखः वीर योद्धा- मन के जीते जीत - मेजर मनीष सिंह - शशि पाधा

संस्मरणः स्मार्ट फ्लायर - निर्देश निधि

कविताः बुद्ध बन जाना तुम - सांत्वना श्रीकान्त 

विज्ञानः बंद पड़ी रेल लाइन का ‘भूत’

लघुकथाः बीमार - कमल चोपड़ा

हाइबनः तुम बहुत याद आओगे - प्रियंका गुप्ता

कविताः बोलने से सब होता है - रमेश कुमार सोनी

व्यंग्य कथाः आराम में भी राम... - डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

लघुकथाः आदतें - सारिका भूषण

कहानीः बालमन - डॉ. कनक लता मिश्रा

लघुकथाः मुर्दे - युगल

कविताः शब्द - रश्मि विभा त्रिपाठी

किताबेंः समय, समाज और प्रशासन की प्रतिकृति - अनुज मिश्रा

कविताः इति आई ! - डॉ. सुरंगमा यादव

जीवन दर्शनः व्यर्थ को करें विदा - विजय जोशी