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Jun 1, 2026

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसः शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का उत्सव

  -  डॉ. योगिता जोशी 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य योग के महत्व और इसके लाभों के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है। योग दिवस एक ऐसा अवसर है जब पूरी दुनिया मिलकर इस प्राचीन भारतीय परंपरा का सम्मान करती है और इसके माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करती है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारतीय योग परंपरा को विश्व ने स्वीकार किया है और पूरी दुनिया 21 जून को योग दिवस मनाती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत 2015 में हुई थी। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। उनके इस प्रस्ताव को 177 देशों का समर्थन मिला और 11 दिसंबर 2014 को UNGA ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया। 21 जून का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है और भारतीय संस्कृति में इसका विशेष महत्व है।

यह कहने की बात नहीं कि योग एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाकर संतुलन और शांति प्रदान करती है। योग के विभिन्न आसन और प्राणायाम शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। यह शरीर का लचीलापन, मांसपेशियों की शक्ति, और सहनशक्ति को बढ़ाता है। योग मानसिक तनाव को कम करने, ध्यान केंद्रित करने और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाने में भी मदद करता है। खेद की बात है कि लोग जानते हैं, समझते भी हैं इसके बावजूद योग के मामले में बहुत जागरूक नहीं हैं। इसे गंभीरता से नहीं लेते। हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जो योग के विभिन्न पहलुओं पर जोर देती है। 2023 की थीम थी, "Yoga for Vasudhaiva Kutumbakam" थीम के माध्यम से स्वास्थ्य, शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। इसी तरह इस बार 2024 की थीम है, 'Yoga for Self and Society' है। योग स्वयं के लिए और समाज के लिए।

योग के लाभ-

1. शारीरिक स्वास्थ्य- 

योग विभिन्न शारीरिक आसनों और श्वसन तकनीकों (प्राणायाम) का संयोजन है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। नियमित योग अभ्यास से शरीर के लचीलेपन, शक्ति और सहनशक्ति में सुधार होता है। योग की विभिन्न मुद्राएँ शरीर के विभिन्न अंगों पर कार्य करती हैं, जिससे संपूर्ण शरीर का विकास होता है।

2. मानसिक स्वास्थ्य-

 योग मानसिक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देता है। ध्यान और प्राणायाम जैसी तकनीक तनाव को कम करने में सहायक होती हैं। नियमित योग अभ्यास से मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन में सुधार होता है। यह चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

3. आध्यात्मिक विकास- 

योग का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका आध्यात्मिक विकास है। योग व्यक्ति को आत्म-ज्ञान की ओर अग्रसर करता है और उसे अपनी आत्मा के साथ जुड़ने में मदद करता है। ध्यान और ध्यान की विधियाँ व्यक्ति को आत्मा की गहराई में जाकर आत्म-अन्वेषण करने का अवसर देती हैं।

4. सामाजिक और नैतिक मूल्य - 

योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है बल्कि समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों का भी संवर्धन करता है। यम और नियम (व्यक्तिगत अनुशासन) जैसे योग के सिद्धांत व्यक्ति को एक बेहतर नागरिक बनने में मदद करते हैं। ये सिद्धांत अहिंसा, सत्य, संयम, और लालच न करना जैसे गुणों को बढ़ावा देते हैं।

5. जीवन शैली में सुधार- 

योग एक संतुलित जीवन शैली को प्रोत्साहित करता है। योग अभ्यास के साथ-साथ उचित आहार, नियमित दिनचर्या, और संतुलित जीवन जीने की आदतों को अपनाने से व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है। यह अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि जैसी जीवन शैली संबंधी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

योग एक संपूर्ण जीवन पद्धति है जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से सुधारता है। इसका नियमित अभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ, संतुलित, और खुशहाल जीवन जीने में सक्षम बनाता है। आज के आधुनिक जीवन में, जहाँ तनाव और जीवन शैली संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, योग का महत्व और भी बढ़ जाता है। योग को अपने जीवन में अपनाकर हम सभी एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं तो आइए आज हम सब भी नियमित योग करने का संकल्प लें।

किसी कवि ने क्या खूब कहा है कि-

प्रतिदिन हम करते रहें ,शुद्ध हृदय से योग ।

पास कभी फटके नहीं, तरह-तरह के रोग ।।


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