August 21, 2009

उदंती.com, अगस्त 2009

उदंती.com 
वर्ष 2, अंक 1, अगस्त 2009

जो हानि हो चुकी है उसके लिए शोक करना, अधिक हानि को निमंत्रित करना है।                        -शेक्सपीयर

अनकही:  शिक्षा प्रणाली के कायाकल्प पर बहस
यात्रा-संस्मरण/बार नवापारा: जहां जानवर भी सौर ... - सूरज प्रकाश
छत्तीसगढ़-कुष्ठ/हम जीती हुई बाजी क्यों हार गए - डा. परदेशीराम वर्मा
प्रकृति-पक्षी/खूबसूरत आंखों वाला मोर - बालसुब्रमण्यम
लोकतंत्र-अधिकार/ जानने की जंग का पहला पड़ाव ...- डॉ. वीरेन्द्र सिंह यादव
यादें/चलें बचपन के गांव में - भारती परिमल
कविता/  पीपल का पेड़ और मैं हरि जोशी
संगीत/श्रद्धांजलि:  गंगू बाई हंगल...- उदंती फीचर्स
विज्ञान-सफलता/चंद्रमा में इंसानी फतह ...- रमेश शर्मा
लोकपर्व-भोजली/अहो देवी गंगा ...- प्रो. अश्विनी केशरवानी 
लघु कथाएं/ रचना गौड़ 'भारती'
कहानी/ आधार - मुंशी प्रेमचन्द
21वीं सदी के व्यंग्यकार/सावन तो फिर भी परेशान करता है जी - आलोक पुराणिक
किताबें : कथा यूके सम्मान

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