March 24, 2012

उदंती.com-मार्च 2012,


मासिक पत्रिका वर्ष2, अंक 7, मार्च 2012उदंती के सुधी पाठकों को होली पर्व की रंग- बिरंगी शुभकामनाएं।
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अनकही: कोख में श्मशान - डॉ. रत्ना वर्मा
मिसाल: बकरी की हांक से पद्मश्री की धाक तक - अतुल श्रीवास्तव
उत्सव: भारतीय संस्कृति में होली के रंग अनेक - कृष्ण कुमार यादव
हाइकु: फागुनी हवा - ज्योतिर्मयी पन्त
व्यंग्य: होली, चुनाव और हाईटेकीय धमाल - अविनाश वाचस्पति
नफरत से इंकार - इस्मत जैदी
हास्य व्यंग्य: जिला बदर के नये मौके -विनोद साव
लघु व्यंग्य - अखतर अली
विदेशों में होली: अपना भारत वे वहां भी बना ... - डॉ अनीता कपूर
पर्व संस्कृति: खेलत अवधपुरी में फाग, रघुवर ... - प्रो. अश्विनी केशरवानी
हास्य: होरी है... - यशवंत कोठारी
यादें: बाथ टब की होली -रचना श्रीवास्तव
जी भर खेलो होली - सुधा भार्गव
ब्लॉग बुलेटिन से: ...चला बिहारी ब्लॉगर बनने - रश्मि प्रभा
महिला स्वास्थ्य: भारत में भाड़े की कोख का व्यापार - प्रीति और वृंदा
हास परिहास: हँसो मत, गंभीर रहो.. - गिरीश पंकज
बहुत याद आये - रंजना सिंह
मेरी कर्मपत्री... खुली पुस्तक के समान है - महादेवी वर्मा
हाइकु: तुम्हारे बिना - डॉ जेन्नी शबनम
आपके पत्र/ मेल बॉक्स
महिला दिवस: संघर्षों में तप कर मजबूत होती... - डॉ. मिथिलेश दीक्षित

3 Comments:

डॉ. जेन्नी शबनम said...

रत्ना जी,
मेरे हाइकु को अपनी पत्रिका में स्थान देने के लिए ह्रदय से आभार. उदंती की सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएँ.

shashi purwar said...

patrika bahut pasand aayi , sabhi rachnakaro ko badhai , hayuk sabhi acche lage ......... yaaden bath tab ki holi ...sabhi acche hai . yada na likhte huye ...shubhkamnaye

Anonymous said...

behtrin patrika. pura padh kar fir likhunga aapko.
chandrapal, mumbai

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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