March 23, 2012

लघु व्यंग्य

- अखतर अली


भिखारी

भिखारी सड़क पर गाते हुए मांग रहा था ।
एक राहगीर उसके गीत से प्रभावित हुआ और पूछा-ये गीत किसने लिखा है ?
भिखारी ने कहा- मैंने लिखा है।
राहगीर को आश्चर्य हुआ, वह बोला- अरे वाह भीख मांगते- मांगते कविता लिखने लगे!
भिखारी ने कहा- नहीं, कविता लिखते- लिखते भीख मांगने की नौबत आ गई है।

नेता की वसीयत

एक नेता की यह वसीयत थी कि मेरे को मरने के बाद कब्र में लिटाना नहीं बल्कि कब्र में कुर्सी रख कर उसमें बैठा देना और एक माईक रख देना, कब्र को तुम लोग फूलों से तो लाद ही दोगे। मुर्दों में अब मेरी सरकार बनना तय है।

ठेकेदारी

-पापा मैं ठेकदारी करूंगा।
-तू क्या खाकर ठेकेदारी करेगा?
-पापा ठेकेदारी खाकर नहीं, खिलाकर की जाती है।

संपर्क- फजली अर्पाटमेंट, आमानाका, रायपुर, मोबाईल - 9827126781
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