February 28, 2011

उदन्ती.com, फरवरी 2011

वर्ष 1, अंक 6, फरवरी 2011
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राजनीति की भाषा ... ऐसे रची जाती है कि झूठ एकदम सत्य लगे और कत्ल एक कल्याणकारी काम लगे।
- जार्ज आरवेल
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अनकही:
असुरक्षित होती औरत
कुंभ मेलाः छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम- पी.एन.सुब्रमणियन
इंडीपेक्स 2011: डाक हवाई उड़ान के 100 बरस - कृष्ण कुमार यादव
पर्यावरणः दिमाग साफ तो नदी भी साफ - अनुपम मिश्र
खोजः बैक्टीरिया: जीवन के रहस्य को...
प्यार का दर्द / वाह भई वाह
संरक्षणः जंगली भैंसा: एक लुप्त होता प्राणी - अरूणेश दवे
श्रद्धांजलिः पं. भीमसेन जोशी: जिनके कंठ में... - प्रताप सिंह राठौर
कविताएं: आने दो वसंत - राजीव कुमार
कोयल की मधुर कूक - कैलाशचंद्र शर्मा

संस्मरणः नौटंकी- यानी पारंपरिक कला का मुरब्बा - राधाकान्त चतुर्वेदी
पातीः फूल तुम्हें भेजा है खत में... - अपर्णा त्रिपाठी 'पलाश'
कहानी: जार्ज पंचम की नाक - कमलेश्वर
लघु कथाएं: 1. सच झूठ 2. हद - डॉ. श्याम सुन्दर 'दीप्ति'
लहसुन: हजारों साल से आजमाए ...
शोधः चाय: क्या कहते हैं वैज्ञानिक? - डा. विजय कुमार उपाध्याय
पिकासो के रोचक संस्मरण
चेजर ने बनाया...
आपके पत्र/ मेल बाक्स
रंग बिरंगी दुनिया


आवरण तथा भीतर के विभिन्न पृष्ठों पर प्रकाशित सभी जल- रंग चित्र -डॉ. सुनीता वर्मा, भिलाई द्वारा

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1 Comments:

At 02 March , Blogger D.P. Mishra said...

BAHUE HE SUNDAR.
JITANE BHE TAREF
KE JAYE CAM HAI..

 

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