February 28, 2011

आपके पत्र/ मेल बॉक्स

हर विधा का संतुलित रूप
कुछ समय से हिन्दी पत्रिका उदंती को ऑनलाइन पढ़ता आ रहा हूं। इसमें प्रकाशित उत्कृष्ट आलेख, कहानी, कविता, लघुकथा आदि को पढ़ा और पाया कि यह पत्रिका हर विधा को संतुलित रूप में सामने रखने वाली कुछेक पत्रिकाओं में से एक है। पढऩे के साथ- साथ मन में कहीं अपनी रचना भी इसमें प्रकाशित होते देखने की इच्छा बलवती हुई। चूंकि मैं भारत से बाहर यहां यू.के. में अनुसन्धानरत हूं तो क्या डाक के बजाए ई-मेल द्वारा रचनाएं भेजने का प्रावधान है? यदि उनमें से कोई रचना आपको पत्रिका के स्तर के अनुरूप लगे तो स्थान देने की कृपा करें।

- दीपक चौरसिया 'मशाल', उत्तरी आयरलैंड (यू.के.)
mashal.com@gmail.com
नहीं, ये तुम्हारा काम है
पिकासो के संस्मरण पढ़ कर यह कहना पड़ता है कि कितने जिंदादिल लोग थे जो विषम परिस्थियों में भी अपना सेंस आफ ह्यूमर नहीं खोते थे।
उदंती में सभी कुछ तो समेट लिया है आपने.. एक संपूर्ण अंक निकालने के लिए बधाई।
- cmpershad
cmpershad@gmail.com
जिजीविषा तिरती नजर आती है
उदंती का जवनरी अंक मुझे दो दिन पहले ही प्राप्त हुआ है। यह अंक बेहद आकर्षक संग्रहनीय एवं सार्थक है। उदंती में एक जिजीविषा तिरती नजर आती है। इसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह है। उदंती के भविष्य के प्रति मंै आशावान हूं। पत्रिका सम्पादकीय गरिमा के अनुरूप है।
-राम किशन भंवर
R.K.Singh, ram_kishans@rediffmail.com
Mobile:9450003746

अनुभवों का शंखनाद
नए अंक की सभी रचनाएं एक से बढ़कर एक हैं पर इन पंक्तियों में जो बात है वो अभिभूत करती है ...
एक नया साल
नई उम्मीदों के संग
लिपटा है तेरी टहनियों से
नए सपनों की सरसराहट है पत्तों में
तुम्हारे जड़ों की मजबूती
सपनों का हौसला ... रश्मि प्रभा जी की इस रचना प्रस्तुति के लिये आपका आभार।
- sadalikhna.blogpost.com
नए जमाने की बात
पहली दोनों कविता बहुत सुन्दर है... और फिर हाइकु की लड़ी भी अनुपम है...
रश्मिदी की कविता अनुभवों का शंखनाद मुझे बहुत अच्छी लगी... परंपरा के साथ नए जमाने की बात करती हुई...
- Indranil Bhattacharjee
सजीव चित्रण
नए वर्ष पर रश्मि प्रभा, आशा भाटी और भावना कुँअर की रचनाएं बहुत प्रभावशाली हैं। तीनों कविताओं में सजीव चित्रण किया गया है.
- सहज साहित्य, rdkamboj@gmail.com
ईमानदार कौन
वो सुबह कभी तो आएगी... इस मुद्दे को उठाकर आपने बहुत अच्छा किया। पर क्या जनता ये तय कर पाएगी की ईमानदार कौन है? अक्सर ऐसा भी होता है कि गुरबत को खरीदने के लिए अमीरी तत्पर रहती है। हां जनता ईमानदार और निष्ठावान हो तो बात बन सकती है। अशोक भाटिया जी की लघुकथाओं में लघुत्तम तत्व के साथ और भी बारीकियां शामिल हैं जो काहानी को लघुकथा बनाने में सफल होती हैं।
- देवी नागरानी, न्यूजर्सी, यूके

1 Comment:

सुरेश यादव said...

उदंती का यह अंक भी गरिमा पूर्ण है .बहु आयामी रचनाओं ने जहाँ सार्थक साहित्य को विस्तार दिया है वहीँ सजगता पूर्ण और निष्पक्ष चयन इसे महत्वपूर्ण बनाया है .समूचे उदंती परिवार तथा रचनाकारों को इस अंक के लिए बधाई .

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष