August 25, 2011


अगस्त 2011

ये धरती आन बान शान की है,
वफा की त्याग की बलिदान की है
यहां रमने को तरसते हैं देवता भी,
ये धरती मेरे हिंदुस्तान की है

- शायर हलीम आईना
**************
स्वाधीनता विशेष
अनकही: वास्तविक स्वतंत्रता
शहर मालामाल और गाँव बदहाल दर बदहाल? - गिरीश पंकज
एक खत गाँधी जी के नाम - निलेश माथुर
लोक चेतना में स्वाधीनता की लय - आकांक्षा यादव
दूर हटो ए दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है - लोकेन्द्र सिंह कोट
गीत: नाम है इसका ही जिंदगी - देवमणि पाण्डेय
जन्मदिवस 31 अगस्तः वह ताउम्र प्यार की पेशानी का पसीना पोंछती रहीं - परितोष चक्रवर्ती
गजल: वो आसमाँ चाहिये - देवी नागरानी
स्वाधीनता विशेषः अमीरों की सरकार, अमीरों द्वारा अमीरों के लिए - राम औतार साचान
हिन्दी नाटकों के मंचक पंडित राधेश्याम बरेलवी - डॉ. दीपेन्द्र कमथान
गजल: आजादी है - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
कहानी: नागफांस - विष्णु प्रभाकर
गीत : बीती कहानी बंद करो - रश्मि प्रभा
लघुकथा: कर्मयोगी - महेश कुमार बसेडिया
'मेरी कमीज पर तुम्हारी कमीज से कम दाग क्यों?'- मंजु मिश्रा
मेलबॉक्स से: सरकारी नाई
कविता: मैं सुन रहा हूँ - यशवन्त कोठारी
व्यंग्य: कब तक रहेंगे 'दो शब्द' - विनोद साव

2 Comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बढिया अंक. बधाई.

सुनील गज्जाणी said...

नमस्कार !
खूब सूरत अंक के लिए रचनाकारों सहित सम्पादक महोदय जी को भी हार्दिक बधाई .
सादर

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष