August 25, 2011

बीती कहानी बंद करो

- रश्मि प्रभा
इति यानि बीती... हास यानी कहानी...
बीती कहानी बंद करो।
नहीं जानना-
वंदे मातरम् की लहर के बारे में,
नहीं सुनना-
'साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल....'
नहीं सुनना-
'फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल...'
नहीं जानना-
ईस्ट इंडिया कंपनी कब आई।
कब अंग्रेजों ने हमें गुलाम बनाया।
कहना है तो कहो-
आज कौन आतंक बनकर आया है।
और अब कौन गाँधी है?
कौन नेहरू? कौन भगत सिंह ?
वंदे मातरम् की गूंज
किनकी रगों में आज है?
अरे यहाँ तो अपने घर से
कोई किसी को देश की खातिर नहीं भेजता
(गिने-चुनों को छोड़कर )
जो भेजते हैं उनसे कहते हैं,
'एक बेटा-क्यूँ भेज दिया?'
क्या सोच है।
ऐसे में किसकी राह देख रहे हैं देश के लिए?
देश?
जहाँ से विदेश जाने की होड़ है...
एक सर शर्म से झुका है,
'हम अब तक विदेश नहीं जा पाए,'
दूसरी तरफ गर्वीला स्वर,
'विदेश में नौकरी लग गई है'
भारत - यानि अपनी माँ को
प्राय: सब भूल गए हैं
तो- बीती कहानी बंद करो!!!
कहाँ आतंक है, कौन है आतंकवादी?
कौन जाने!!!
शान है 'डॉन' होना,
छापामारी की जीती- जागती तस्वीर होना,
फिर बजाना साल में दो बार उन्ही के हाथों-
'वो भारत देश है मेरा'
पताः
नेको एन एक्स फ्लैट नम्बर - 42,
दत्त मंदिर, विमान नगर ,
पुणे - 14
मोब. 09371022446

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