June 13, 2009

उदंती.com, मई- जून 2009

वर्ष 1, संयुक्तांक 10-11, मई-जून 2009
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जीवित भाषा, बहती नदी है जिसकी धारा नित्य एक ही मार्ग से प्रवाहित नहीं होती।
- बाबूराव विष्णु पराड़कर
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अनकही/पारिवारिक संबंधों में जहर

पुरातन/ मंदिर
चंदखुरी: कौशल्या का मायका था छत्तीसगढ़- उदंती फीचर्स
प्रकृति/जीवाणु
चींटियां : एक साल में 400 किलो ...
छोटा पर्दा/ मनोविज्ञान
बचपन : इन्हें टीवी देखने से... - स्त्रोत
क्या खूब कही
वे इंसानों का खून .., शरीर की गर्मी से ...
कम्प्यूटर / भाषा
यूनीकोड से भारतीय भाषा - नितीन जानकीदास देसाई
संगीत/यादें
इकबाल बानो - नाजिम नकवी
कविता- मुकुन्द कौशल के नवगीत
कला/ चित्रकार
फूलों और तितलियों के संग... - उदंती फीचर्स
कैरियर/ प्रतिभा पलायन
बेआबरू होकर कूचे से निकलना - डॉ. सिद्धार्थ खरे
कहानी/ उद्धार - रविन्द्रनाथ ठाकुर
इन दिनों / जूते की जंग - अविनाश वाचस्पति
ललित निबंध/ फूल को देखने का सुख- अखतर अली
21वी सदी के व्यंग्यकार
सीनियर राइटर्स - कैलाश मंडलेकर
किताबें/ श्रम की गरिमा का सम्मान
धूप में गुलाबी होती कहानियां
इस अंक के लेखक/ वाह भई वाह
आपके पत्र/ इन बाक्स
रंग बिरंगी दुनिया
तिनके नहीं मिलेंगे तब..., उम्र को भूल जाइए
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ऐसा क्यों
ऐसा क्यों है कि घर पर लोग 'स्वयं कर के देखो' में जुटे रहते हैं और कार्य- स्थल पर कोई और कर लेगा की फेर में।
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1 Comment:

Murari Pareek said...

naam bhi to alag hain ek "ghar" aur dusra "karya sthal"

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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