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Jan 28, 2017

कोयल बन बोली

सेदेका
 -डॉ. सरस्वती माथुर
कोयल बन बोली
1.
तुम्हारी यादें
साँझ देहरी पर
कोयल बन बोली
मेरे गीतों में
बसी कुछ आवाज़ें
मन द्वारे पे डोली ।
2.
रंग खेलूँगी
फागुन तो आने दो
पूरी साँझ रँगूँगी
भीगने दूँगी
मन की चुनरिया
ओ मेरे रंगरेज ।
3
ओस -सा मन
व्याकुल हो गिरता
बौराई हवाओं में
वर्षा -बूँदों -सा
भोर के रंग देख
सतरंगी हो जाता।
4
मन मंदिर
प्रेम की घंटी बजी
यादें दिये -सी जलीं
उदास मन
चाँद को देखकर
चकोर बन रोया।
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माहिया
तारे नभ में आए
1.
मन मेरा बावरिया
चाँद निकल आया
आजा अब साँवरिया ।
2.
तारे नभ में आ
मन के द्वारे पर
बीते पल के सा
3.
है मन मेरा भारी
साजन की यादें
लगती मुझको आरी
4
मन तो क धागा है
परदेसी बलमा
कोठे पर कागा है ।
5
कोयल काली बोली
मौसम बीत गये
पर प्रीत नहीं डोली ।