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Sep 5, 2026

लघुकथाः सबक

  - छवि निगम

ऋचा के कमरे से बाहर आते ही नीरव दाँत पीसते हुए बुदबुदाया, "ये अंदर मैथ्स की ट्यूशन ले रही थीं या इन हाईस्कूल के स्टूडेंट्स का दिमाग खराब कर रही थीं, हैं!"

ऋचा की आवाज शांत थी, "क्लास खत्म करके पाँच मिनट तो मैं बच्चों से रोज बात करती ही हूँ; लेकिन आज अचानक आकर आपने ऐसा क्या सुन लिया?"

नीरव और झल्ला गया, "अरे उनको ये सब खबरें-वबरें बाँचना... और क्या! और ये सब वाहियात उलटी-सीधी सुर्खियाँ.. ये सब डिटेल उन्हें बताने की जरूरत ही क्या है? जरा ये तो सोचो तुम हमारे राहुल और पीयूष को भी तो साथ पढ़ाती हो। क्या असर पड़ेगा उन पर?"

ऋचा ने उसकी आँखों में आँखें डालते हुए कहा, "असर ये पड़ेगा कि मेरे सारे विद्यार्थियों की तरह वे भी संवेदनशील बनेंगे। कल ये सब खौफनाक सुर्खियाँ ही गायब हो जाएँ, इसके लिए मैं आज को सुधार रही हूँ। मैं उन्हें लड़कियों की इज्जत करना, उनकी तकलीफ महसूस करना सिखा रही हूँ, बस।"

नीरव के पंजे का दबाव उसकी बाँहों पर बढ़ता चला जा रहा था- “बंद करो ये सब बकवास..." आगे कुछ कहते हुए अचानक वह खड़ा का खड़ा रह गया। उसका हाथ नीचे गिर गया। सामने बैग टाँगे हुए उसका बेटा राहुल खड़ा उसे एकटक देख रहा था और नीरव पहली बार उससे नजरें नहीं मिला पा रहा था। ■

Feb 1, 2026

लघुकथाः ख़ुदा ख़ैर करे

  - छवि निगम  

“इस बार कत्तई छोड़ दूँगी। ना ना। तुममे कोई रोकियो न बिल्कुल। पानी सर के ऊपर हो राअ बतो” अंदर आँगन से चाची की सुबकियों में डूबती-उतराती दिल दहलाती आवाज़ आयी, तो बाहर खटिया पर अधलेटे चाचा चौंककर उठ बैठे- ‘ये क्या कह रही थीं.. क्या करने जा रही थीं उनकी शरीकेहयात? किसे छोड़ देंगी.. क्या उन्हें?’

उनकी साठ साला डेढ़ पसली काया में फँसा सौ ग्राम का दिल धाड़-धाड़ करने लगा। फ़ोन पर पकड़ ढीली होकर छूटी, तो स्क्रीन पर इठलाती हूरें औंधे मुँह खटिया पर गिर पड़ीं। उन्हें नज़रंदाज़ करते लड़खड़ाते हुए चाचा अंदर को चल दिए। पर आँगन में चच्ची की सखियों का जमावड़ा देख वो सकुचाकर  ज़रा आड़ में खड़े हो गये, और अपनी मिजमिजाती आँखें और कान उधर ही टिका दिए।

वहीं, जहाँ चाची की मानमनौव्वल जोरों-शोरों पर थी, ”जाये दो भौजी, लो पान संग गुस्सा चबाय के थूक डालो।”

दूसरी बोली, “ए जिज्जी, तोहर हिरदय तो वइसे भी विसाल बा, जाए दो ना।” किसी और ने सुर में सुर मिलाया, “और क्या। इत्ती भी बड़ी बात नहीं, जो नाराज़ हो रही।”

चाचा को चैन की साँस आने वाली ही थी कि दोबारा अटक गई। समझाने वाली इन बातों ने चाची के गुस्से में बर्फ़ नहीं, घी का काम किया था। वो दहाड़ पड़ीं, “काहे, बड़ी बात ना है ये ? सारे रिस्ते-नाते अक्केले हमीं निबाहते चले जाएँ? न रात को रात समझें, न दिन को दिन। जरूरत पड़ने पर एक पैर से खड़े रहें हम, और जब हमारी बारी आये तो ऊ हमाये पर घमंड झाड़ें..हैं ?”

चाचा के भीतर हौला उठने लगा, जिसे चाची की ललकार छिन्न भिन्न करती चली गई,  “सांती ना, औकात दिखाए का बखत है अब.. जानी तुम लोग ?”

बाहर गिरते-गिरते बचे चाचा। एक पल में पूरी ज़िंदगी जैसे आँखों के आगे घूम गई। सारी खताओं, मनमर्जियों, उनकी भूलों ने पल भर में उन्हें दिन में तारे दिखा दिए। उनकी धुकधुकी बढ़ गई, हाथ- पैर काँपने लगे। उधर फ़ोन को हवा में लहराती चाची विस्फोट कर रही थीं,  “काहे हमीदन, तुम्हारे करेले के हलुए को लाइक किये थे न हम, और शीला तुम्हारे चैनल को हमही सस्क्रैब अउर शेयर किये थे न जिसमें तुम रुमाल से कुर्ता बनाने की तरकीब बतायी थी ? और रजिया, तुमाए कित्ते फालोअर बढ़ाये हम.. और अनीता, स्टेला तुम..तुम…" कहते उनका गला रुँध गया, “का सिला दीं तुम सब? घण्टा भर हो गया हमें अपनी फोटू डाले…पर तुम लोग झाँके तक नहीं। दुसमन कहीं की। अब छोड़ ही देंगे ये सोसल- वोसल सब..कहे देते हैं।”

सब सखियाँ भूल-सुधार में जुटीं, और चाचा मुस्कुराते हुए वापस अपने खटिया रूपी सिंहासन पर चढ़े, और एक बार फ़िर फ़ोन में डूब गए। तभी चाची की सस्पेंसफुल आवाज़ आई, “अर्रे ई का..जे तुम्हारे चच्चा…इस लालमुँही पर लाल दिल कइसे चेंप दिए, हैं ?”

Sep 1, 2025

दस छोटी कविताएँ

     - छवि निगम 

1

नहीं चाहिए

नाल

न लगाम

न ही तुम।


2

जीवन क्या

खोजते रहना 

सही कॉन्टैक्ट नम्बर ऊपर वाले का

बस ।

3

रिश्ते आभासी मौजूदगी बॉयोमैट्रिक

आजकल तो

सिम गया

याददाश्त गई।

4

सागर और धरती घुटते हैं

ऊपर से शांत दिखें चाहे

भूकम्प को तरसते हैं

सुनामी को तकते हैं ।

5

फेस मास्क बरकरार हैं

दूरियाँ दरम्यान हैं

अपने इस दौर की

अजनबियत ही पहचान है ।

 6

कैनवास नहीं 

हर कोई यहाँ पर

ब्लैकहोल भी हैं

अपने रंग बचाना तुम ।

7

जुड़े

तो कहानी,

टूटे

तो कविता ।

8

रात का मुलम्मा

उतार फेंकता है

दिन

बड़ा संगदिल हुआ करता है

9

अगर डरो,

तो मौन से डरो

कि भीतर के शोर का

यही चरम है

10

विश्वासघात 

और ज़िन्दगी,

आपस में

व्युतक्रमानुपाती