April 23, 2012

इस अंक में

मासिक पत्रिका  वर्ष2, अंक 8, अप्रैल 2012विश्व एक महान पुस्तक है जिसमें वे लोग केवल एक ही पृष्ठ पढ़ पाते हैं जो कभी घर से बाहर नहीं निकलते।            — आइन्सटीन
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अनकही: भ्रष्टाचार बनाम सदाचार - डॉ. रत्ना वर्मा
बातचीत: जिंदगी को संवारते हाथ - सुजाता साहा    
वन्य जीवन: छत्तीसगढ़ में हाथियों को मिलेगी पनाह - संदीप पौराणिक
विश्व पुस्तक दिवस: किताबों को अपनी बेटी की... - सूरज प्रकाश
पिछले दिनों
आइए अपनी विरासत को बचाएं
विश्व विरासत दिवस: अतीत को वर्तमान से ... - राहुल सिंह
विश्व पुस्तक दिवस: क्या पाठकों से दूर हैं किताबें?  - पंकज चतुर्वेर्दी
ब्लॉग बुलेटिन से: सोचती हूँ सिर्फ कविता - रश्मि प्रभा
व्यंग्य: लुच्चो की दुनिया  - आलोक पुराणिक
हाइकु: लो आई भोर - ज्योत्स्ना शर्मा
कालजयी कहानियाँ: छोटा जादूगर  - जयशंकर प्रसाद
आपके पत्र/ मेल बॉक्स / एक पाती 'कहि देबे संदेश' विशेषांक पर
किताबें: फूल की पांखुड़ी पर ...- मयंक अवस्थी
मिसाल: बड़े- बड़े मात खा जाएं
लघुकथाएं: 1. भूख 2. मिट्टी तेल और मेरिट - रवि श्रीवास्तव
कविता: लड़कियां, रेल में बैठी स्त्री - डॉ. मीनाक्षी स्वामी          
रंग बिरंगी दुनिया 
स्वास्थ्य ही पूंजी है


आवरण चित्र तथा भीतर के पृष्ठों पर प्रकाशित धरोहर से संबंधित सभी चित्रों के छायकार है- राजेश वर्मा। बचपन से फोटोग्राफी के शौकीन राजेश ने मार्डन स्कूल- नई दिल्ली और राजकुमार कॉलेज- रायपुर से स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। कक्षा पांचवी में ही उन्होंने फोटोग्राफी को अतिरिक्त विषय के रूप में चुनकर फोटोग्राफी के आरंभिक गुर प्राप्त किए। नागपुर से एम.बीए करने के बाद उन्होंने रायपुर में स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ किया।  समय निकालकर वे आज भी अपने फोटोग्राफी के उस शौक को पूरा करते हैं।
उनका मोबाइल नंबर है- 3903344556, तथा ईमेल आईडी है rajraipur2003@gmail.com

1 Comment:

Devi Nangrani said...

मासिक पत्रिका उदन्ती को पढ़ने का आनंद लेते हुए एक निष्ठावान सम्पादन की ऊर्जा को भी नामा करने को जी चाहता है। अचे से अचे ज्ञानवरदक आलेख, कहानियाँ , व कविताओं का भरपूर कलश है उदन्ती
शुभकामनाओं के साथ

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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