मासिक वेब पत्रिका उदंती.com में आप नियमित पढ़ते हैं - शिक्षा • समाज • कला- संस्कृति • पर्यावरण आदि से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर आलेख, और साथ में अनकही • यात्रा वृतांत • संस्मरण • कहानी • कविता • व्यंग्य • लघुकथा • किताबें ... आपकी मौलिक रचनाओं का हमेशा स्वागत है।
Showing posts with label हसन जमाल. Show all posts
Showing posts with label हसन जमाल. Show all posts

Jan 1, 2026

लघुकथाः खुशफहमी

 - हसन जमाल

वह आदमी बेतहाशा भागा जा रहा था, बगटुट। मानो अगर वह कहीं ठहर गया तो पिछड़ जाएगा, हार जाएगा। लोग उसे अचरज से देख रहे थे, लेकिन उसको किसी की परवाह न थी।
आखिरकार एक जगह एक शख्स ने उसे रोक दिया। हालाँकि उस शख्स को भी इसके लिए दौड़ लगानी पड़ी थी, लेकिन भागने वाले आदमी की बाँह उसके हाथ में आ गई, ‘‘क्यों भाई! तुम इस कदर तेजी से कहाँ भागे जा रहे हो? क्या तुम पर कोई विपदा आन पड़ी है?’’
उसने नाराज होकर रोकने वाले शख्स को देखा और माथे का पसीना पोंछते हुए बोला, ‘‘जानते नहीं, जमाना कितनी तेजी से भाग रहा है? मैं किसी से पिछड़ना नहीं चाहता।’’
‘‘लेकिन श्रीमान, आपके आगे तो कोई नहीं है।’’
‘‘तुम ठीक कहते हो। मैं सबसे आगे निकल आया हूँ ।’’
‘‘लेकिन आपके पीछे भी कोई नहीं है।’’
इस बार भागने वाले आदमी के चेहरे पर चिंता के भाव उभरे। पीछे मुड़कर देखा। फिर जरा निश्चिंत होकर बोला, ‘‘क्या सब के सब इतना पीछे रह गए हैं? उफ! बेचारे!’’
और वह इत्मीनान से रूमाल निकालकर पसीना पोंछने लगा।