November 10, 2011

इस अंक में

उदंती.com                   नवम्बर 2011




कला एक प्रकार का एक नशा है,
जिससे जीवन की 

कठोरताओं से
विश्राम मिलता है।
- फ्रायड 


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अनकही: नमन ... जो हमसे बिछड़ गए - डॉ. रत्ना वर्मा
श्रीलाल शुक्ल
जीवन वृत्त
राग दरबारी: एक गाँव की कथा -रवीन्द्रनाथ त्यागी
श्रीलाल शुक्ल की कहानी, उन्हीं की जुबानी
व्यंग्य: जीवन का एक सुखी दिन
कहानी: इस उम्र में - श्रीलाल शुक्ल
यादें: पहला पड़ाव और छत्तीसगढ़ -विनोद साव
भूपेन हजारिका
श्रद्धांजलि: दिल हूम हूम करे ... - सुप्रिया रॉय
कविता: सुर के पंछी, मेरी सांसों में संगीत है..., गीत- संगीत का जादूगर
जगजीत सिंह
मेरी आंखों ने चुना है तुझको...
स्मरण: अमर हो गई 'जग जीत' ने वाली आवाज़ - आलोक श्रीवास्तव

प्रेरक कथा: तीन छन्नियाँ
मनोज अबोध की ग़ज़लें
यात्रा वृतांत: टूटे पांव की पहाड़ी परीक्षा और ...- डॉ. परदेशीराम वर्मा
पिछले दिनों
पर्यावरण: दुनिया का कूड़ाघर बनता भारत - नरेन्द्र देवांगन
डॉ. शील कौशिक की लघुकथाएं
वाह भई वाह
नये युग में नया छत्तीसगढ़ - स्वराज्य कुमार
आपके पत्र
रंग बिरंगी दुनिया

1 Comment:

mahesh said...

Vishayon ka ati sundar chayan- visheshtah Shreelal ji, Bhupen Ji, evam Jagjit Ji ka.
Samast aalekh stareey evam pathneey hain.
Badhai.

Mahesh Chandra Dewedy
1/137, Vivekkhand \, Gomtinagar
Lucknow

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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