November 10, 2011

उसपे मर मिटने का हर भाव लिए बैठा हूँ

- मनोज अबोध

उसपे मर मिटने का हर भाव लिए बैठा हूँ
उम्र भर के लिए भटकाव लिए बैठा हूँ
याद है, मुझको कहा था कभी अपनी धड़कन
आपकी सोच का दुहराव लिए बैठा हूँ
तुम मिले थे जहाँ इक बार मसीहा की तरह
फिर उसी मोड़ पे ठहराव लिए बैठा हूँ
लाख तूफान हों, जाना तो है उस पार मुझे
लाख टूटी हुई इक नाव लिए बैठा हूँ
आपके फूल से हाथों से मिला था जो कभी
आज तक दिल पे वही घाव लिए बैठा हूँ

मिलके चलना

मिलके चलना बहुत जरूरी है
अब सँभलना बहुत जरूरी है

गुत्थियाँ हो गईं जटिल कितनी
हल निकलना बहुत जरूरी है

आग बरसा रहा है सूरज अब
दिन का ढलना बहुत जरूरी है

जड़ न हो जाएँ चाहतें अपनी
हिम पिघलना बहुत जरूरी है

हम निशाने पे आ गए उसके
रुख बदलना बहुत जरूरी है

है अँधेरा तो प्यार का दीपक
मन में जलना बहुत जरूरी है

अपने आप से लड़ता मैं

अपने आप से लड़ता मैं
यानी, ख़ुद पर पहरा मैं

वो बोला - नादानी थी
फिर उसको क्या कहता मैं

जाने कैसा जज़्बा था
माँ देखी तो मचला मैं

साथ उगा था सूरज के
साँझ ढली तो लौटा मैं

वो भी कुछ अनजाना-सा
कुछ था बदला-बदला मैं

झूठ का खोल उतारा तो
निकला सीधा सच्चा मैं

क्या होगा अंजाम, न पूछ

क्या होगा अंजाम, न पूछ
सुबह से मेरी शाम, न पूछ

आगंतुक का स्वागत कर
क्यों आया है काम न पूछ

मेरे भीतर झाँक के देख
मुझसे मेरा नाम न पूछ

पहुँच से तेरी बाहर हैं
इन चीजों के दाम न पूछ

रीझ रहा है शोहरत पर
कितना हूँ बदनाम न पूछ

संपर्क- एफ-1/107 ग्राउण्ड फ्लोर,सैक्टर-11, रोहिणी, नईदिल्ली-110085, मो. 09910889554,
Email- manojabodh@gmail.com, Blog: http://manojabodh.blogspot.com

1 Comment:

dilbag virk said...

बेहतरीन गजलें

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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