October 15, 2008

उदंती.com, अक्टूबर 2008

उदंती.com     अक्टूबर -  2008


अँधेरे जमाने में
क्या गाना बजाना भी होगा,
हाँ
गाना बजाना भी होगा,
अँधेरे जमाने के बारे में ।
            - ब्रेख्त




अनकही / तमसो माँ ज्योतिर्गमय                       -डॉ. रत्ना वर्मा

मुद्दा / बम ब्लास्ट : आतंकवादी हमले में घायल देश - विनोद कुमार मिश्रा

आस्था / व्रत उपवास : अपने आप से किया गया एक संकल्प - रंजना सिंह

टीवी / चैनल वार ...न्यूज चैनल को चाहिए सिर्फ सनसनी - विकल्प ब्यौहार

छत्तीसगढ़ / कबीर पंथ : झीनी- झीनी बीनी चदरिया - संजीत त्रिपाठी

लघुकथाएँः अंधेरा- उजाला  -फज़ल इमाम मल्लिक  कम्पन - राम पटवा

जरा सोचिए/ वक्त की कीमत

कविताः  अब दीप नहीं जलाते - सूरज प्रकाश

सफरनामा / बस्तर : कारीगरों के बीच 20 साल - जमील रिज़वी

पर्यटन/ पहाड़ों का दिल : प्रकृति के साज पर धडक़ता शिमला - गुरमीत बेदी

लोक पर्व/ कला : हाथा दीवाली का लोक चित्र - संकलित

परिवार/ बुजूर्ग : जीवित पीतरों से बढ़ती दूरियां - डॉ. राकेश शुक्ल

सीख/ तीन बंदर : बुरा मत सुनो, बुरा मत.... - संकलित

पुरातन/ संग्रहालय : रायपुर संग्रहालय में बापू के तीन बंदर - जे. आर. भगत

पुस्तकें/ ई- लाईब्रेरी : किताबों की बदलती दुनिया - नीरज मनजीत

आपके पत्र/ मेल बॉक्स :

क्या खूब कही/ हो जाईए खुश!

इस अंक के लेखक

रंग बीरंगी दुनिया

3 Comments:

anjeev pandey said...

उदंती का सितंबर अंक पढ़ा। अनकही- तमसो मां ज्योतिर्गमय से पत्रिका की मूल विचारधारा से अवगत हुआ। सबसे बड़ी बात इस पत्रिका के संबंध में यह है कि एक साहित्यिक पत्रिका को इतना व्यापक स्वरूप रायपुर जैसे शहर से प्राप्त हुआ। अभी भी कई साहित्यिक पत्रिकाएं अस्तित्व इंटरनेट पर उपलब्ध हैं लेकिन उनमें ज्यादातर विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भागीदारी की हैं। यह हिन्दी भाषा और साहित्य की निःस्वार्थ सेवा जिसके लिए हिन्दी साहित्य जगत सदैव ऋणी रहेगा। संपादक और समस्त टीम को शुभकामनाएं ।

anjeev pandey said...

उदंती का सितंबर अंक पढ़ा। अनकही- तमसो मां ज्योतिर्गमय से पत्रिका की मूल विचारधारा से अवगत हुआ। सबसे बड़ी बात इस पत्रिका के संबंध में यह है कि एक साहित्यिक पत्रिका को इतना व्यापक स्वरूप रायपुर जैसे शहर से प्राप्त हुआ। अभी भी कई साहित्यिक पत्रिकाएं अस्तित्व इंटरनेट पर उपलब्ध हैं लेकिन उनमें ज्यादातर विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भागीदारी की हैं। यह हिन्दी भाषा और साहित्य की निःस्वार्थ सेवा जिसके लिए हिन्दी साहित्य जगत सदैव ऋणी रहेगा। संपादक और समस्त टीम को शुभकामनाएं ।

anjeev pandey said...
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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

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