Sunday, November 2, 2008

इस अंक में

अनकही / तमसो मां ज्योतिर्गमय

मुद्दा / बम ब्लास्ट : आतंकवादी हमले में घायल देश - विनोद कुमार मिश्रा

आस्था / व्रत उपवास : अपने आप से किया गया एक संकल्प - रंजना सिंह

टीवी / चैनल वार ...न्यूज चैनल को चाहिए सिर्फ सनसनी - विकल्प ब्यौहार

छत्तीसगढ़ / कबीर पंथ : झीनी- झीनी बीनी चदरिया - संजीत त्रिपाठी

लघुकथाएं  - अंधेरा- उजाला  -फज़ल इमाम मल्लिक  कम्पन - राम पटवा

जरा सोचिए/ वक्त की कीमत

कविता  अब दीप नहीं जलाते - सूरज प्रकाश

सफरनामा / बस्तर : कारीगरों के बीच 20 साल - जमील रिकावी

पर्यटन/ पहाड़ों का दिल : प्रकृति के साज पर धडक़ता शिमला - गुरमीत बेदी

लोक पर्व/ कला : हाथा दीवाली का लोक चित्र - संकलित

परिवार/ बुजूर्ग : जीवित पीतरों से बढ़ती दूरियां - डॉ. राकेश शुक्ल

सीख/ तीन बंदर : बुरा मत सुनो, बुरा मत.... - संकलित

पुरातन/ संग्रहालय : रायपुर संग्रहालय में बापू के तीन बंदर - जे. आर. भगत

पुस्तकें/ ई- लाईब्रेरी : किताबों की बदलती दुनिया - नीरज मनजीत

आपके पत्र/ मेल बॉक्स : क्या खूब कही/ हो जाईए खुश!

इस अंक के लेखक

रंग बीरंगी दुनिया

3 Comments:

anjeev pandey said...

उदंती का सितंबर अंक पढ़ा। अनकही- तमसो मां ज्योतिर्गमय से पत्रिका की मूल विचारधारा से अवगत हुआ। सबसे बड़ी बात इस पत्रिका के संबंध में यह है कि एक साहित्यिक पत्रिका को इतना व्यापक स्वरूप रायपुर जैसे शहर से प्राप्त हुआ। अभी भी कई साहित्यिक पत्रिकाएं अस्तित्व इंटरनेट पर उपलब्ध हैं लेकिन उनमें ज्यादातर विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भागीदारी की हैं। यह हिन्दी भाषा और साहित्य की निःस्वार्थ सेवा जिसके लिए हिन्दी साहित्य जगत सदैव ऋणी रहेगा। संपादक और समस्त टीम को शुभकामनाएं ।

anjeev pandey said...

उदंती का सितंबर अंक पढ़ा। अनकही- तमसो मां ज्योतिर्गमय से पत्रिका की मूल विचारधारा से अवगत हुआ। सबसे बड़ी बात इस पत्रिका के संबंध में यह है कि एक साहित्यिक पत्रिका को इतना व्यापक स्वरूप रायपुर जैसे शहर से प्राप्त हुआ। अभी भी कई साहित्यिक पत्रिकाएं अस्तित्व इंटरनेट पर उपलब्ध हैं लेकिन उनमें ज्यादातर विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भागीदारी की हैं। यह हिन्दी भाषा और साहित्य की निःस्वार्थ सेवा जिसके लिए हिन्दी साहित्य जगत सदैव ऋणी रहेगा। संपादक और समस्त टीम को शुभकामनाएं ।

anjeev pandey said...
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संपादकीय पता- उदंती.com, माटीज गैलरी, जीवन बीमा मार्ग, रायपुर (छ. ग.) 492 004 , फोन नं. 0771- 4064230 , email : udanti.com@gmail.com. सदस्यता शुल्क- वार्षिक- 500 रुपए (डाक खर्च 60 रुपए) शुल्क चैक /ड्राफ्ट के माध्यम से उदंती.com के नाम से भेजें। रायपुर से बाहर के चैक में 30 रुपए अतिरिक्त जोड़े। शुल्क भेजने का पता- उदंती.com, माटीज गैलरी, जीवन बीमा मार्ग, रायपुर (छ. ग.) 492 004. सर्वाधिकार सुरक्षित- प्रकाशित सामग्री के उपयोग के लिए लेखक, प्रकाशक की अनुमति आवश्यक है। प्रकाशित रचनाओं के विचारों से उदंती.com का सहमत होना आवश्यक नहीं है। उदंती.com से संबधित किसी भी विवाद का न्याय क्षेत्र रायपुर रहेगा। स्वामी/प्रकाशक/मुद्रक/संपादक डॉ. रत्ना वर्मा द्वारा, उदंती प्रकाशन, पंडरी, रायपुर छत्तीसगढ़ से मुद्रित एवं प्रकाशित। मूल्य: 50रूपए. व्यापारिक प्रतिनिधि- रश्मि वर्मा कार्यालय प्रतिनिधि- सुजाता साहा ************************************************************************** इनके जीवन को भी रोशन करें माटी समाज सेवी संस्था पिछले आठ वर्षों से समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम कर रही है। पिछले दिनों संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का कार्य कर रही है। पिछले दो वर्ष से संस्था ने बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास आरंभ किया है। बस्तर कोंडागांव में साथी समाज सेवी संस्था द्वारा संचालित स्कूल साथी राऊंड टेबल गुरुकुल में ऐसे बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता- पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ- साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है, जिसमें बच्चो के यूनिफार्म के साथ कॉपी, किताबें भी शामिल हंै। माटी समाज सेवी संस्था ने इस स्कूल के 10 बच्चों को गोद लेकर पिछले दो वर्ष से उनकी शिक्षा हेतु धन एकत्रित करने का जिम्मा उठाया है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग तीन हजार रुपए खर्च होते हैं। शिक्षा के प्रति चिंतित जागरुक नागरिकों ने गत वर्ष से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से किसी ने एक बच्चे को गोद लिया है तो किसी ने दो बच्चो की शिक्षा का जिम्मा उठाया है। इसी महती कार्य में सहयोग देने वालों में- श्रीमती निरेन्द्री वर्मा, पलारी रायपुर, सुमन शिवकुमार परगनिहा- रायपुर, अरुणा नरेन्द्र तिवारी- रायपुर, प्रियंका गगन सयाल- लंदन, डॉ. प्रतिमा अशोक चंद्राकर-रायपुर, कुमुदिनी तरुण खिचरिया- दुर्ग, तथा प्रताप सिंह राठौर-अहमदाबाद शामिल हैं। इस अभिनव प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके सहयोग से एक बच्चा जिसके लिए शिक्षा कोसो दूर है, शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार बनेगा। तो क्यों न इनके जीवन में भी रोशनी फैलाने, सब मिलकर दीप से दीप जलाएं। संपर्क के लिए पता- माटी समाज सेवी संस्था पंडरी, रायपुर (छ. ग.) 492 004, फोन नं. 0771- 2428172 Email- drvermar@gmail.com

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