October 15, 2008

आपके पत्र

सराहनीय
उदंती के सितंबर अंक में प्रकाशित बालकवि बैरागी की कविता प्रेरणादायक तथा मधुरतम वाक्य विन्यास से परिपूर्ण है। साथ ही कल्याणी क्लब जैसे सराहनीय कार्य को पत्रिका में स्थान देकर आपने निश्चित ही एक उम्दा कार्य किया है। -दीपक, कुवैत से


आकर्षक और वैविध्यपूर्ण

अंक काफी आकर्षक और वैविध्यपूर्ण लगा। लेखक परिचय में कुछ जंक करेक्टर दिख रहे हैं। इसे ठीक करना आसान कार्य नहीं है, पर प्रयास करने में कोई बुराई नहीं है। हिंदी में समय पर एक उत्कृष्ट ऑनलाइन पत्रिका निकालने के लिए आपको हार्दिक बधाई।
-डॉ. रमाकांत गुप्ता, उप महाप्रबंधक, राजभाषा, भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई से


कमल कीचड़ में ही खिलता है

अगस्त अंक में प्रकाशित सूरज प्रकाश के संस्मरण सांस सांस में बसा देहरादून को पढक़र अभिभूत हो गई, सचमुच कमल कीचड़ में ही खिलता है और ईश्वर का प्रिय, मनुष्य द्वारा श्रद्धेय होता है। एक बात जो सचमुच बहुत ही आश्चर्यचकित कर गई वह है, सेना में फैले भ्रष्टाचार की कथा, बिल्कुल भी अंदाजा नही था मुझे कि यहां भी यह हाल है, बड़ा दु:ख हुआ जानकर।
-रंजना सिंह, जमशेदपूर, झारखंड से

उदंती की उड़ान

उदंती शब्द का अर्थ पहले मेरे लिए उड़ान से था। सही मतलब बताने के लिए धन्यवाद। शुभकामना यही है कि आपकी ये कोशिश ऊंची उड़ान भरे।
- वर्षा निगम, दिल्ली से

हिमाचाल से पत्रिका देख रहा हूं

छत्तीसगढ़ में मेरी विशेष रुचि है, लाहौल स्पीती हिमाचाल से पत्रिका ध्यान से देख रहा हूं। घोटुल के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिली। इस संस्था का अध्ययन अभी और अधिक गहराई से होना चाहिए।
-अजय, लाहौल स्पिीती, हिमाचल से


छत्तीसगढ़ सेऑन लाईन इतनी उम्दा पत्रिका

मैं विश्वास नहीं कर पा रहा हूं कि छत्तीसगढ़ से इतनी उम्दा पत्रिका ऑन लाईन उपलब्ध है। आपका यह प्रयास वास्तव में सराहनीय है। मैं फोटोग्राफर हूं और मेरे पास बस्तर के चित्रों का बहुत अच्छा संग्रह है। एक बार पुन: इतनी अच्छी पत्रिका के लिए मेरी शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए।
-भंवर

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लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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