October 15, 2008

रंग बिरंगी दुनिया



पंख होते तो उड़ आती रे.....
यह गाना भले ही हिन्दी फिल्म का है जिसमे एक प्रेमिका पक्षी की तरह उड़ कर अपने प्रेमी के पास पंहुच जाने की कल्पना करती है, पर पंछी की तरह उडऩे की चाहत तो दुनिया का हर इंसान करता है। लेकिन इस कल्पना को हकीकत में बदल कर दिखाया है स्विट्जरलैंड के 'कलाबाज' ईव रोजी ने। उन्होंने यह अनोखा कारनामा किया है जेट-संचालित कृत्रिम पंखों के सहारे। वे फ्रांस से उड़ान भरकर इंग्लिश चैनल पार करते हुए इंग्लैंड पहुंचे। ईव ने जेट-संचालित कृत्रिम पंख स्वंय ही डिजाइन किए हैं। इससे पहले मई में भी ईव रोजी ने एल्प्स पहाड़ों के ऊपर से उड़ान भरी थी, परंतु एक देश से दूसरे देश पखों के सहारे पहुंचने वाले वे संभवत: दुनिया के पहले इंसान बन गए हैं।अपनी दस मिनिट की उड़ान के बाद ईव पैराशूट के सहारे इंग्लैंड के डेवोर में उतरे थे। फ्रांस के कैलेस इलाके से ईव ने एक विमान से 8,800 फुट से भी ज्यादा ऊंचाई से हवा में गोता लगाया, उन्होंने अपने पंखों में लगे जेट इंजन शुरु किए और फिर सफलतापूर्वक 35 किलोमीटर की दूरी तय कर की। उड़ान भरने के बाद ईव ने कहा यह सफर शानदार था। इस रोमांचक क्षण को देखने जुटी भीड़ ने जब ईव रोजी को पैराशूट खोलकर अनोखे पंख सहित जमीन पर आते देखा तो उनकी आंखें आश्चर्य से खुली रह गईं। आखिर उन्होंने किस्से कहानियों की बातों को सच होते हुए जो देखा था। ईव पेशे से पॉयलट रहे हैं और अब 'फ्यूजन मैन' के नाम से मशहूर हो चुके हैं।
कार्बन मिश्रण से बने ईव रोजी के इंधन भरे पंखों का वजन करीब 55 किलोग्राम होता है। इनमें मिट्टी के तेल से उर्जा संचार करने वाले चार टरबाईन लगे हैं। हालांकि पखों को मोडऩे के लिए इसमें कोई यंत्र नहीं है और ईव स्वंय अपने शरीर के सहारे दिशा पर नियंत्रण रखते हैं। ईव अपनी उड़ान के दौरान एक विशेष प्रकार का सूट पहनते हैं (फॉर्मूला वन कार के चालकों के समान), जो उन्हें मशीन की गर्मी से बचाता है। अब वह दिन दूर नहीं जब इंसान अपने पंख लगा कर दुनिया की सैर करने निकलेगा।

दादा की उम्र का दूल्हा , पोती की उम्र की दुल्हन

पोता- पोती खिलाने की उमर में यदि कोई व्यक्ति 16 साल की लडक़ी से शादी करना चाहेगा तो उसका तो यही हाल होना था। बिहार में एक 70 वर्षीय सुंदर भगत नामक बुजुर्ग द्वारा अपनी पोती की उम्र की लडक़ी के साथ ब्याह रचाने का ख्वाब उस समय खाक में मिल गया जब दुल्हन दूल्हे को देखते ही मंडप से भाग खड़ी हुई। यह घटना या कहिए दुर्घटना पटना के दीघा थानाक्षेत्र में मखदुमपुर गांव के शिवाजीनगर मोहल्ले में घटी है। विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त हुए सुंदर के यहां सोमवार को विवाह का मंडप सजा था। मंडप में 70 वर्षीय दूल्हा सज-धज कर अपनी होने वाली दुल्हन की प्रतीक्षा कर रहा था। दुल्हन मंडप तक पहुंची तो लेकिन अपने भावी जीवनसाथी का चेहरा देखते ही मंडप छोड़ भाग खड़ी हुई। बस फिर क्या था दुल्हन को भागते देख गांव में अफरातफरी का महौल हो गया।। सभी लोग ये जानना चाहते थे कि आखिर क्या हुआ? जाहिर है दुल्हन को अंधेरे में रखकर ही एक दादा की उम्र वाले व्यक्ति से उसकी शादी की जा रही थी। ये तो अच्छा हुआ लडक़ी ने दूल्हे का चेहरा देख लिया और भाग खड़ी हुई। यदि शादी हो जाती और घूंघट उठाते समय दूल्हे को देखती तो न जाने क्या हो जाता। 20 वर्ष पहले सुंदर की पत्नी की मौत हो गई थी। उसके पुत्र और पोते दूर रहते हैं। सो सुंदर ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए एक जवान लडक़ी से शादी करने का सपना देखा था जो चूर चूर हो गया। उम्मीद है इस हादसे के बाद दादा की उम्र में ऐसा ख्वाब संजोने वाले सचेत हो जाएंगे।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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