October 15, 2008

वक्त की कीमत

वक्त की कीमत
लोग वक्त से अपना संबंध तरह- तरह से स्थापित करते हैं। रेफरी समय पूरा होने की आवाज लगाते हैं। कैदी सजा का वक्त पूरा करते हैं। इतिहासकार समय के अभिलेख रखते हैं। आवारागर्द वक्त बरबाद करते हैं। आकड़ेबाज वक्त का हिसाब रखते हैं।

लेकिन लोग वक्त से चाहे किसी भी तरह संबद्ध क्यों न हो यह तथ्य बरकरार रहता है कि हम सब को वक्त समान परिमाण में दिया जाता हैं। दिन में 24 घंटे होते हैं, हफ्ते में 168 घंटे ही । उनका सदुपयोग भी कीजिए।

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home