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Jul 12, 2018

बरखा- बूँदें

बरखा- बूँदें
 - विभा रश्मि
1
जलद लेके
गया डाक बाबू
भीगी चिठिया।
2
राग  रसीले 
गाती गान सुरीले
ठंडी बौछारें।
3
इंद्रधनुषी
सतरंगे तारों को
माँगे मानुषी।
4
सूखी धरा पे
टपटप टपकीं
बूँदें मस्तानी।
5
जीवन जल
पी रही धरा प्यासी
सहस्र ओक।
6
पखेरू भरे
परवाज़ आसमाँ
मेघों से डरे।
7
मेघ गर्जना
तडि़त चमकार
नव सर्जना।
8
नौका ले चल
नदिया  छल -छल
तूफाँ के पल।
9
मेघों ने बाँधी
मन से प्रीत डोर
बूँदों के आँसू।
10
ज़ख्म  हैं खाए।
दिल को दर्द भाए
मिला पावस।
  11   
बरखा बूँदें
गुदगुदातीं मन
ग़ज़ब फ़न।
12
लय ताल से
रिमझिम बरसे
धरा हरसे
13
पंख झाड़ता
बाल्कनी में परिन्दा
बैठा अल्गनी।
14
नन्ही ने देखी 
बरसात पहली
बूँदों से खेली।
 15
बरखा- मेघ
उमड़ -घुमड़
हरित सजा।
 16
 नीड़ों में बैठे
 चूज़े रूठे- ठुनके
 भीगे माँ संग।
 17
रेत ने पी ली
ओक भर बारिश
था कौतूहल
18
सिमटा ताल
पावस देखकर
नाचा दे ताली
 19
दादुर गाते
बरखा गुणगान
बेसुरी तान
20
छेड़ो मल्हार 
गरज रहे जलद
वर्षा आमद
21
रंगीं छतरी
करती खुशरंग
परिभाषित
22
भीगे मजूर
छाता था छेदोंवाला
दिल से आला 
सम्पर्क: गुडगाँव, 9414296536, E-mail- vibharashmi31@gmail.com

Jul 25, 2017

मेघा अम्बर छाये...

 मेघा अम्बर छाये...
विभा रश्मि
1
बारिश को फ़ुरसत है
बदरा ले आई
गरमी भी रुख़सत है ।
2
बिजुरी चमचम चमके
दिल गोरी का भी
घबरा धकधक धड़के ।
3
मेघा अम्बर छाए
गड़गड़ बोले हैं
बरखा ले के आए ।
4
पंछी झूम उठे हैं
सब  शोर मचाते
दिल को भी  लूटें हैं ।
5
तन्हाई में गाता
बंजारा कोई
दिल का राग सुनाता ।
6
गाँवों में नहरें हैं
जल भर छलकातीं
बालक भी तैरें हैं ।
7
विरही सजनी द्वारे
पलकें है खोले
बलमा तू न सता रे।
8
झिंगुर मस्त हो नाचे
वन की झाड़ी में
पोथी रितु की बाँचे ।
9
शीतल हैं बौछारें
बरखा जल लाया
चमकीले लशकारे ।
10
बूँदों के मोती हैं
बिखरे रस्तों पर
धरती संजोती हैं ।
11
माँ की गोदी  खेला
शिशु प्यारा नटखट
अलबेला वो छैला ।
12
लो झडिय़ाँ बारिश की
बाँटे  नेहिल हैं
बातें ना ख़ारिश की ।
13
अम्बर ने  बरसाए
बूँदों के हीरे
झोली भर-भर पाए ।
14
बलमा अब तो आ रे
नैना राह तकें
बदरा ले आ कारे ।