November 10, 2011

उपहार में एक टन संतरे


बच्चे के जन्म पर उपहार देने की परंपरा तो सदियों पुरानी है। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के 'साइट्रस ग्रोवर्स एसोसिएशन' ने इस परंपरा को एक अनूठे अंदाज में निभाया। इस एसोसिएशन ने दुनिया के सात अरबवें के रूप में जन्मे प्योत्र निकोलायेव की मां को उपहार स्वरूप एक टन संतरे का टोकन भेंट किया।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) और रूस के राज्य सांख्यिकी संघीय सेवा ने 31 अक्टूबर, 2011 को पैदा हुए इस बच्चे को सांकेतिक रूप से दुनिया के सात अरबवें इंसान के रूप में सम्मानित करने का फैसला लिया, हालांकि इस बारे में ठीक- ठीक तय करना असंभव है। क्योंकि इस मामले में सभी देश की अपनी अलग अलग राय है।
एसोसिएशन के प्रतिनिधि इरिना मर्केल कलिनिनग्राद के उस अस्पताल में पहुंचे, जहां बच्चे का जन्म हुआ और उन्होंने उसकी मां 36 वर्षीया येलेना निकोलायेवा को प्रमाण- पत्र, फूल तथा संतरे के लिए टोकन भेंट किया। निकोलायेवा दंपत्ति कलिनिनग्राद में एसोसिएशन के किसी भी स्टोर से संतरे ले सकते हैं। प्योत्र अपने माता- पिता की तीसरी संतान है।

ममता की मसीहा

पडरौना नगर के समीप स्थित परसौनी कला की 60 वर्षीय श्रीमती शीरीन यशोदा मइया इसीलिए कहलाती हैं क्योंकि वे 23 बच्चों की मां हैं। चार अपने और 19 उनके जिनके माता- पिता लोक- लाज के भय से उन्हें सड़कों पर फेंक गए या अस्पतालों में छोड़ गए। पिछने महीने ही चार दिन की एक नन्ही मासूम का आगमन 19वें बच्चे के रूप में उनकी बगिया में हुआ है।
करीब डेढ़ दशक पहले श्रीमती शीरीन ने यतीम मासूमों की सेवा के लिए शिक्षिका की नौकरी को ठुकरा दिया। ममता की यह मूरत अपने भरे- पूरे परिवार के साथ बीते 11 वर्षो से यतीम मासूमों की नि:स्वार्थ सेवा कर रही हैं। उनके आंगन में इस समय महिमा, एंजल, छाया, कोमल, अनुप्रिया, शारून, विनीता, आशा, जूही, अनीता, मेनका, विशाल, विश्वास, संतोष, वैभव व गैवरियल जैसे 18 बच्चों की किलकारी गूंज रही है। शीरीन के पति रमन सिंह उनके इस काम में उनका भरपूर सहयोग करते हैं। उनकी अपनी चार संतानों में एक पुत्री है, जिसका विवाह हो चुका है तथा दो बेटे बाहर रहते हैं।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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