November 10, 2011

रंग- बिरंगी दुनिया

लंबी जीभ ने दिलाई ख्याति

अमेरिका की 21 साल की एक युवती की जीभ 9.7 सेंटीमीटर लम्बी है। गिनीज बुक ने इसे दुनिया की सबसे लम्बी जीभ के रूप में दर्ज किया है। अमेरिका में ह्यूटन की शनेल टैपर 13 साल की उम्र में ही चर्चा में तब आ गई थीं जब उन्होंने यूट्यूब वीडियो पर अपनी लंबी जीभ दिखाई थी।
गिनीज बुक ने सितंबर में उन्हें लास एंजेलिस आने का आमंत्रण दिया, जहां उसके सदस्यों ने टैपर की जीभ की नाप ली। टैपर ने दो अन्य महिलाओं को पीछे छोड़कर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया।
टैपर ने कहा कि अपनी जीभ को लेकर मैं हमेशा बेवकूफ और नासमझ रही। मुझे लोगों के सामने जीभ निकालना अच्छा लगता है। मैंने स्कूल के दिनों में ही ऐसा करना शुरू कर दिया था। लंबी जीभ के कारण मुझे कभी कोई समस्या नहीं हुई। टैपर के लिए यह मजेदार है।

मशहूर दंपती 20 वें बच्चे की तैयारी में

अमेरिका में एक दंपती इसलिए मशहूर हैं क्योंकि वे लगातार बच्चे पैदा करते चले जा रहे हैं। सिलेब्रिटी बन चुके इस दंपती जिम बॉब और मिशेल दूगर ने अब अपने 20वें बच्चे की तैयारी कर ली है। आगामी अप्रैल में 20वें बच्चे के माता पिता बनेंगे। 45 साल की दूगर ने कहा, 'हम इस नए तोहफे को लेकर बेहद उत्साहित हैं और बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता था कि ईश्वर हमें एक और देगा।'
बच्चे पैदा करने के इस सिलसिले ने जिम बॉब और मिशेल दूगर को रिएलिटी टीवी स्टार बना दिया है। एक पूरा शो सिर्फ इन दोनों पर बनाया गया है। जब यह शो शुरू हुआ तो शो का नाम था 17 किड्स एंड काउंटिंग। बढ़ते बढ़ते वह 19 किड्स एंड काउंटिंग तक पहुंच चुका है। अप्रैल के बाद इस शो का नाम जाहिर है फिर बदल दिया जाएगा। बॉब और दुगर के 19 बच्चों की उम्र 23 साल से लेकर 23 महीने तक है। उनके 10 लड़के हैं और 9 लड़कियां।
एक और बच्चे की आने की खबर से बेहद खुश बॉब कहते हैं, 'हम विषम संख्या पर नहीं रुकना चाहते थे।' यह दंपती परिवार नियोजन का कोई तरीका इस्तेमाल नहीं करता। अरकन्सॉ राज्य के लिटल रॉक शहर में रहने वाले इस ईसाई जोड़े ने अपने हर बच्चे का नाम जे अक्षर से रखा है। वे लोग इसे अपने विश्वास का प्रतीक मानते हैं। इस परिवार की अपनी एक वेबसाइट है जिस पर उनके माता पिता की लिखी किताबें और डीवीडी बिकती हैं। वहां माता पिता को बच्चों को पालने की सलाह भी दी जाती हैं।

नोटों का बिछौना
बहुत अमीर लोगों के बारे में पुराने लोग बताते हैं कि अमुख व्यक्ति इतना अमीर इंसान था कि नोटों के बिछौने पर सोता था। आज के समय में यह सुनने में भले ही अजीब लगे वह भी किसी गरीब इंसान के बारे में, लेकिन चीन में पुलिस ने एक ऐसे तथाकथित गरीब को गिरफ्तार किया है जो अपने बिछौने में करीब पचास करोड़ रुपये की नकदी छिपाकर सोता था।
इतनी बड़ी रकम उसने नशीली दवाओं के कारोबार से जुटाई थी। लोगों को संदेह न हो, इसके लिए यह गरीब होने का दिखावा भी करता था। पहले एक फार्मेसी में काम करने वाले इस व्यक्ति ने नशीली दवाएं बेचनी शुरू की। जब अधिक कमाई से धन को रखने की समस्या खड़ी हुइ तो इसने अपने बैंक खाते में इस रकम को जमा किया, लेकिन खतरा बढ़ता गया। लिहाजा, इसने इस रकम को सोने और शेयर बाजार में निवेश करना शुरू किया। धीरे- धीरे नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से इतनी अधिक कमाई होने लगी कि इसे कहीं और रखने पर उसे विवश होना पड़ा। इस लिहाज में उसका अपना बिस्तर सबसे सुरक्षित स्थान लगा। अब कमाई की सारी नकद राशि वह अपने बिछौने में डालकर चैन की नींद लेने लगा। हालांकि यह सुकून उसे बहुत देर तक नसीब नहीं हुआ। पहले से उसके पीछे लगी पुलिस ने आखिरकार उसे धर दबोचा।
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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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