- गिरीश पंकज
पिछले साल भी उनके दर्शन हुए थे। इस बार फिर हो गए। मुझे देखते ही वह यादों में खो गए। मुस्कुराते हुए बोले, "हम पिछली बार मिले थे भोले और हमने कहा था, ये करेंगे, वो करेंगे। दुनिया से हम नहीं डरेंगे, तो इस बार भी हम दुनिया से नहीं डरेंगे और जबरदस्त काम करेंगे।"
हम खुश हुए कि नाकारा लोगों की जमात के कुख्यात सदस्य लालबुझक्कड़ जी इस वर्ष कुछ-न-कुछ तो गुल ज़रूर खिलाएँगे।
हमने पूछ लिया, "क्या करेंगे, इसका खुलासा तो करो!"
वह बोले, "हम प्यार में पड़ गए हैं इस वर्ष। तो बस यही करेंगे।"
मैंने चौंकते हुए कहा, "अरे, यह अचानक लवेरिया कैसे हो गया?। पिछले दिनों तुमको मलेरिया हुआ था। उससे उबरे तो लवेरिया हो गया?"
वह बोले, "मलेरिया के कारण ही लवेरिया हुआ है। बीमार पड़े थे और फेसबुक पर नज़रें गड़ाए हुए थे। तभी एक बुजुर्ग टाइप की जवान महिला ने मेरे इनबॉक्स में आकर कह दिया –‘आई लव यू’, तो हमने भी कह दिया- ‘आई लव यू’…और बस, प्रेम की गाड़ी चल पड़ी।"
मैंने पूछा, "वह रहती कहाँ है ", तो लालबुझक्कड़ जी ने कहा, " झुमरी तलैया में रहती है। उससे मिलने भी अब जाना है। मुझको बुला रही है।"
मैंने हँसते हुए कहा, " बंधु! यह फेसबुक वाली लव स्टोरी अकसर बड़ी फर्जी निकल जाती है, इसीलिए होशियार रहो…सावधान रहो…सतर्क रहो, वरना बेड़ा गर्क हो जाएगा। लाखों रुपये का चूना लगेगा और जीवन नरक हो जाएगा। आजकल बहुत से शातिर पुरुष स्त्री बनकर सोशल मीडिया के जरिए ठगी का कारोबार करते रहते हैं। कहीं यह भी कोई ठग न हो। सावधान रहना।"
मेरी बात सुनकर लालबुझक्कड़ भड़क गए और कहने लगे, "लगता है, आप मेरी लव स्टोरी से जल रहे हैं। आप तो सूखे बरगद हैं; लेकिन हम तो अभी तक हरे-भरे पेड़ हैं। इसमें मोहब्बत के फल लगेंगे-ही-लगेंगे। उसके चक्कर में जब-जब बोलती है, कुछ पैसे भेजते जाता हूँ।"
मैंने कहा, "लेकिन पिछले साल तुम्हारा किसी रामकली से चक्कर चल रहा था, मगर इस बार झुमरीतलैया की कथकली के साथ चक्कर चला रहे हो। यह कौन-सा गुल खिला रहे हो? असलियत तो पता कर लो कि वो लड़की है या लड़का। फर्जी आईडी बनाकर लोग साइबर क्राइम भी कर रहे हैं। बचके रहना रे बाबा, बचके रहना!"
लालबुझकक्ड कुछ सोचने लगे और बोले, "आपने तो मुझे कन्फुजिया दिया। मुझे संकट में डाल दिया। मैं सोच रहा था कि इस साल एक नया रिश्ता परवान चढ़ेगा। मौजाँ-ही- मौजाँ- होग:, लेकिन अब तो लगता है, इस परवान से सावधान रहना होगा।"
मैंने कहा, "कभी झुमरीतलैया वाली से फोन पर बात हुई क्या?"
लालबुझक्कड़ बोले, "बात तो नहीं हुई, बस संदेशों का आदान-प्रदान होता रहता है।"
मैंने हँसकर कहा, "एक बार फोन से बात करके तो देखो। आवाज लड़की की निकल रही है या लड़के की। तब स्पष्ट हो जाएगा।"
लालबुझक्कड़ ने मुंडी हिलाई और चैट बॉक्स से ही फोन कर दिया। घंटी जाती रही। किसी ने फोन नहीं उठाया। लालबुझकक्ड को शक होने लगा कि मामला फर्जी है। जिसे अति उत्साह में अपनी प्रेयसी समझ रहे थे, वह तो कोई बड़ा वाला ठग है।
लालबुझक्कड़ ने मैसेज किया कि रूपसी, अपनी तस्वीर तो भेजो। लेकिन रूपसी (या रूपसा…?) ने अपनी तस्वीर नहीं भेजी। अब तो लाल बुझक्कड़ को कंफर्म हो गया इन बॉक्स में टपकने वाला कोई फर्जी आदमी है। जो अब तक उसे जम कर चूना लगाता रहा।
उसकी असलियत जानकर लालबुझक्कड़ तनाव में आ गए और कहने लगे, "मेरी लव स्टोरी का तो द ऐंड हो गया है। अब यह साल कैसे बीतेगा? मेरी राशि में तो नए साल में सुंदर-सुंदर घटनाओं का योग लिखा था।"मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा – ‘‘बच्चू, पिछले साल भी तुमने कुछ खास नहीं किया; लेकिन इस साल तो कुछ ऐसा करके दिखाओ कि तुम्हारे घर वाले तुम पर गर्व करें। लवेरिया का चक्कर छोड़ो, वरना चूना लगता रहेगा। इसलिए बेहतर है कि बेरोजगार संघ के पदाधिकारी बने रहने के बजाय छोटा-मोटा कोई काम कर लो। हमारे प्रधानमंत्री की सीख मान लो और पकौड़ा बेचने का काम ही करने लग जाओ। साथ में चाय-ठेला लगा लो। जब से चाय वाला प्रधानमंत्री बना है, चाय वाले अपने आप को किसी प्रधानमंत्री से कम नहीं समझते।"
लालबुझक्कड ने कहा, "यह आपने बिल्कुल सही फरमाया। अब हम किसी से चोंच लड़ाने के पहले उससे मोबाइल में गोठिया लेंगे। उसका चेहरा भी देख लेंगे। कहीं कोई बुढ़िया, जवान होने का नाटक करके हमको गेम तो नहीं दे रही।"
"मतलब यह कि तुम सुधरोगे नहीं।" हम भी हँसकर बोले, "अब तू नहीं और सही और नहीं और सही का फार्मूला अपना रहे हो? लगे रहो मुन्ना भाई! तुम होगे कामयाब एक दिन! लेकिन कुछ काम तो करो!"
लाल बुझक्कड़ ने कान खुजाते हुए कहा, "कुछ सोच तो रहा हूँ कि कुछ करूँ; लेकिन क्या करूँ, कैसे करूँ, यह समझ नहीं आ रहा है।"
इतना बोलकर वह खुद ही जोर-से हँसे। हम समझ गए कि ये महोदय इस साल में कुछऊ ना करेंगे। हमने लाल बुझक्कड़ को नमस्ते किया और अपनी राह चल पड़े।



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