April 21, 2012

पिछले दिनों

80 साल की महिला ने उतारा जहाज

हैरतअंगेज बात है कि एक 80 साल की महिला जिसे जहाज उड़ाने का ज्यादा अनुभव नहीं था जहाज को इमरजैंसी लैंडिंग करने में सफलता प्राप्त कर ली।
किस्सा कुछ यूं है कि अमरीका के विसकोंसिन में हेलेन कौलिंस और उनके पति जॉन कौलिंस ने फ्लोरिडा से उड़ान भरी थी। अपनी छोटी सी सेसना जहाज को उसके पति उड़ा रहे थे। लेकिन बीच यात्रा में ही जॉन को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। हेलेन ने तुरंत पुलिस को फोन किया और अपने बेटे से रेडियो पर संपर्क किया। हेलेन कौलिंस के बेटे जेम्स कौलिंस जो खुद एक प्रशिक्षित पायलट हैं उन्होंने रेडियों पर अपनी मां को जहाज उतारने के निर्देश दिए। इस तरह मां ने बेटे के बताए निर्देशों का पालन करते हुए जहाज को सुरक्षित उतार लिया। वह ऐसा इसलिए भी कर पाई क्योंकि हेलेन ने 30 साल पहले हवाई जहाज की उड़ान शुरु करने और उसे लैंड करने की मामूली सी ट्रेनिंग ली थी।
हेलेन के बेटे जेम्स ने अपनी मां के इस अद्भुत कारनामें  के बारे में जानकारी दी कि जमीन पर उतरने के बाद जहाज लगभग 1000 फीट की दूरी तक फिसला और फिर थम गया। पर मेरी मां तब भी शांत थी। हैरानी की बात ये है कि उन्होंने सिर्फ एक इंजन से जहाज को उतारा जो मुझे नहीं पता कितने प्रशिक्षित पायलट ऐसा कर पाएंगे। एक तरफ जहां जेम्स कौलिंस मां के सकुशल वापस आने से खुश थे वहीं वे कहते हैं मुझे पता था कि मैनें अपने पिता को खो दिया है लेकिन मैं अपनी मां को नहीं खोना चाहता था।

 पहला महिला पाइप बैंड

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ने दुनिया का पहला अद्र्धसैनिक पाइप बैंड गठित किया है, जिसके सभी सदस्य महिलाएं हैं। सीआरपीएफ ने अपनी पहली महिला बटालियन 25 साल पहले बनाई थी, लेकिन पहला महिला पाइप बैंड दल अब साकार हो पाया है। गुजरात के गांधीनगर में तैनात 135 महिला बटालियन की तीन सदस्य हरिकृष्णा टी.एस., सुनीता बाई एवं सुमित्रा देवी भी इस दल में शामिल हैं।

 कन्यादान के लिए माता- पिता ने की शादी

बेटी के हाथ पीले करने की खातिर किसी पिता को अगर पहले अपने हाथ पीले करने पड़े तो यह सुनने में ही अजीब लगेगा लेकिन यूपी के हरदोई में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। इस गांव के रहने वाले दलित बिरादरी के रामअवतार ने करीब बीस साल पहले अपने बड़े भाई की साली को गरीबी के कारण बिना विवाह के अपने साथ रख लिया था। दोनों की दस संतानें भी हुईं जिनमें से सात जीवित हैं। लेकिन अब उन्हें सामाजिक रूप से दिक्कत आ रही है। वे अपनी बेटी का कन्यादान नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनकी शादी नहीं हुई।
दरअसल रामअवतार जब अपनी बेटी का विवाह करने के लिए रिश्ता देखने गए तो लोगों ने उनसे उनके विवाह को लेकर सवाल उठाया कि उन्होंने विवाह नहीं किया है इसलिए वह अपनी बेटी का कन्यादान नहीं कर सकेगा। इस समस्या को जब उसने अपने परिवार में बताया तो उसके सगे संबंधियों ने मिलकर उसे विवाह करने की सलाह दे डाली। बारात में रामअवतार का लड़का बाहर होने के कारण शामिल नहीं हुआ जबकि उसकी बेटियां पिता की बारात में शामिल हुईं। उसके बाद सगे संबंधियों की मौजूदगी में शादी की सारी रस्में अदा की गईं और माता- पिता दुल्हा- दुल्हन बनें।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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