April 21, 2012

रंग- बिरंगी दुनिया

इस चलते फिरते घर को चाहिए पार्किंग स्थल

दुनिया में अनोखे लोगों की कमी नहीं है। जीवन की आपा- धापी में मनुष्य को जब सीधे- सीधे कोई रास्ता नहीं दिखाई देता तो जीने के लिए वे कोई न कोई उपाय ढूंढ ही निकालते हैं। ऐसे ही एक ग्रेजुएट छात्र को अपने घर को पार्क करने के लिए पार्किंग स्थल चाहिए।
दरअसल अमेरिका में रहने के लिए अपार्टमेंट किराए पर लेना बहुत महंगा होता है इसे निजात पाने के लिए सैन फ्रांसिस्को में रहने वाले एक छात्र ने एक अनोखा रास्ता अपनाया- उसने अपनी गाड़ी से जोड़कर पीछे की ओर एक छोटा सा मकान बनाया है।  जिसमें उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जैसा कि आप चित्र में देख ही रहे हैं कि अपने इस छोटे से कार- घर में उसने जरूरत के सभी समान जुटा लिए हैं। इस कार- घर में बेडरूम, स्टडी रूम, किचन आदि सब मौजूद है, जो एक घर में होना चाहिए। उक्त छात्र की समस्या अब यह है कि उसे अपना घर तो मिल गया परंतु अपने इस अनोखे घर को पार्क करने के लिए उसे पार्किंग स्थल चाहिए। क्या ऐसी कोई जगह है जहां वह अपने इस चलते फिरते घर को पार्क कर सके। हो सकता है आने वाले कल में जगह की कमी को देखते हुए हमारे आस- पास इसी प्रकार के चलते फिरते घर नजर आएंगे।

हथेली में समा जाने वाला सबसे छोटा पिल्ला
बियोंस
बियोंस मां के साथ
दुनिया में अजब- गजब किस्सों की कमी नहीं है। हाल ही में एक बिना कान का खरगोश चर्चा में आया तो अब दुनिया के सबसे छोटे कुत्ते का जन्म पिछले 10 मार्च को उत्तरीय कैलिफोर्निया में होने की खबर ने सबमें यह उत्सुकता जगा दी कि आखिर हथेली में समा जाने वाला यह नन्हा पिल्ला कैसा होगा? आपको जानकर अचरज होगा कि यह अनोखा पिल्ला जन्म के समय एक चम्मच में फिट हो जाता था और दो सप्ताह के बाद एक बिजनेस कार्ड जितना बड़ा हो गया।
अमरीका की एक मशहूर पॉप स्टार बियोंस का नाम इस पिल्ले को दिया गया है। यह छोटा सा पिल्ला इन दिनों कैलिफोर्निया के एक एनिमल क्लब की जान बना हुआ है।  आइए अब जरा बियोंस के जन्म की कहानी भी जान लें- हुआं यूं कि उत्तरी उत्तरी कैलीफॉर्निया में एक बीमार कुतिया ने 5 बच्चों को जन्म दिया लेकिन वह उन्हें दूध नहीं पिला सकती थी और न ही देखभाल कर सकती थी। इन बच्चों में से ही एक नन्ही बियोंस भी थी। जन्म के समय बियोंस की धड़कने बंद थी जिसे बाहरी दबाव व मुंह से सांस देकर जीवित किया गया। बियोंस, एक जचशुंड पपी है। अब बियोंस स्वस्थ है लेकिन उसका कद इतना छोटा है कि माना जा रहा है विश्व के सबसे छोटे पिल्ले के रूप में उसका नाम गिनीज बुक में रिकार्ड हो सकता है। तो देखा आपने विदेशों में सितारों के अलावा जानवर भी किसी स्टार से कम चर्चित नहीं होते।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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