April 23, 2012

7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस

स्वास्थ्य ही पूंजी है

सफल जीवन के लिए स्वास्थ्य के महत्व को समझते हुए 07 अप्रैल, 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्थापना की गई थी। जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य मानकों को समाज के निचले स्तर तक पहुंचाना और विकासशील देशों सहित पिछड़े देशों में जन जागृति बढ़ाना है।

 हेल्थ इज वेल्थ अर्थात स्वास्थ्य ही पूंजी है। पर हालात आज ऐसे बन गए हैं कि जटिल और तनावग्रस्त जीवनशैली से जूझते हुए लोग ना तो अपने खान-पान पर ध्यान देते और ना ही अपने स्वास्थ्य की अहमियत समझते है। यह तो सभी जानते हैं कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। जब हम शारीरिक रूप से स्वस्थ होंगे तभी   हम सफलतापूर्वक अपने अन्य कार्य पूरा पाएंगे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि रोगाणुओं में एंटीबायोटिक्स के लिए लगातार प्रतिरोधकता बढऩे से कई दवाओं का असर कम होने का खतरा पैदा हो गया है। दूसरी ओर हम बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं पर निर्भर हैं। इन दवाओं के कारगर न होने पर स्थिति जानलेवा हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य लोगों में नियमित शारीरिक गतिविधियों जैसे व्यायाम, खेलकूद, मनोरंजन व जीवन के सभी कार्यों के प्रति जागरूकता लाना भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मनाए जाने वाले इस दिन का प्रमुख उद्देश्य जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों की ओर सबका ध्यान खींचना है।
आज अपनी सही कार्यशैली और नियंत्रण की वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन पूरी दुनिया में सम्मानपूर्वक देखा जाता है। मलेरिया, पोलिया, चेचक, हैजा, वायरल आदि कई बीमारियों को रोकने में विश्व स्वास्थ्य संगठन का विशेष योगदान रहा है। इसके अलावा एड्स, हेपेटाईटिस, और इन जैसी अनेक असाध्य रोगों के लिए शोध करवाके औषधियों के निर्माण आदि पर विचार विमर्श कर रही है।

इसे भी अजमाएं

 - रोज एक घंटे व्यायाम करना या पैदल चलना सेहत के लिए काफी अच्छा होता है, यह कई अध्ययनों में साबित हो चुका है। अब एक नए अध्ययन में पता चला है कि पैदल चलने से याददाश्त बढ़ती है। साथ ही पैदल चलने से सीखने की क्षमता में भी विकास होता है।
 - क्या आपको कसरत करने का वक्त निकालना भारी पड़ता है। लेकिन व्यस्त दिनचर्या में से तीन मिनट तो निकाल ही सकते हैं, क्योंकि सिर्फ 3 मिनट की कसरत से आपका शरीर छरहरा बन सकता है। हर रोज घंटों जिम में लगाने से बेहतर है कि हफ्ते में एक दिन प्रभावी तरीके से कसरत की जाए।
 - अंकुरित अनाज सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। अब गेहूं को ही ले लीजिए। गेहूं के आटे से बनी चपाती तो सबसे सहज और पौष्टिक खाद्य है ही अंकुरित गेहूं भी आपको ढेर सारे विटामिन्स तथा पौष्टिक तत्व दे सकते हैं।
 - अगर आपको खांसी, दमा, पीलिया, ब्लडप्रेशर या दिल से संबंधित मामूली से लेकर गंभीर बीमारी है तो इससे छुटकारा पाने का एक सरल-सा उपाय है- शंख बजाइए और इन रोगों से छुटकारा पाइए। शंखनाद से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है और स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।
 - और अगर मोटापे को दूर रखना है तो रोजाना थोड़ी मात्रा में मेवा खाइए। रोजाना एक औंस यानी करीब 28 ग्राम कच्चा बिना छिलका उतारे बादाम या अखरोट खाने से चर्बी नहीं बढ़ती। है न आसान उपाय।

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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