वेनिस में एक कब्र की खुदाई करने पर एक ऐसा कंकाल मिला है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह एक वैम्पायर का है। वैम्पायर युरोप में बहुत प्रसिद्घ रहे हैं और उनके बारे में माना जाता था कि वे इंसानों का खून पीते थे। मध्य युग में जब युरोप में प्लेग फैला था तो हजारों लोग मारे गए थे। कई जगहों पर इन्हें सामूहिक रूप से दफनाया गया था। इटली के फ्लोरेंस विश्वविद्यालय के मैटियो बोरिनी वेनिस में लैजरेटो नुओवो द्वीप पर ऐसी ही सामूहिक कब्र खोद रहे थे। यहां से उन्हें एक महिला का कंकाल मिला जिसके मुंह में एक ईंट फंसी हुई है। यह ईंट फंसा कंकाल एक दंतकथा का प्रमाण पेश करता है। जिस समय इस महिला की मृत्यु हुई थी, उस समय कई लोग मानते थे कि प्लेग वैम्पायरों द्वारा फैलाई जाने वाली बीमारी है। ये वैम्पायर लोगों का खून पीने की बजाय मरने के बाद अपने कफन को चबाते हैं और बीमारी को फैलाते हैं। प्रचलित मान्यता के चलते कब्र तैयार करने वाले ऐसे संदिग्ध वैम्पायरों के मुंह में एक ईंट फंसा देते थे ताकि वे कफन न चबा सकें।
वैम्पायरों के बारे में इस मान्यता का आधार शायद यह था कि कभी-कभी शव के मुंह से खून टपकता है जिसकी वजह से कफन अंदर की ओर धंस जाता है और फट जाता है। इस संबंध में बोरिनी ने अपना शोध पत्र अमेरिकन एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंस की एक बैठक में प्रस्तुत करते हुए बताया कि संभवत: यह पहला 'वैम्पायर' है जिसकी अपराध वैज्ञानिक जांच हुई है। यह कंकाल वेनिस में 1576 में फैले प्लेग के मृतकों की एक कब्र में से निकाला गया है। बोरिनी का दावा है कि यह खोज उस समय प्रचलित मान्यता का एक पुरातात्विक प्रमाण है। अलबत्ता, कुछ अन्य वैज्ञानिकों का मत है कि यह खोज रोमांचक जरूर है मगर इसे प्रथम वैम्पायर कहना थोड़ी ज्यादती है।
शरीर की गर्मी से बनेगी बिजली
बहुत कम बिजली पर चलने वाले उपकरण भविष्य में हमारे शरीर की गर्मी से चल सकेंगे। जर्मनी
में एरलांगन के एक संस्थान के शोधकों ने रेत के दाने जितना बड़ा एक ऐसा सूक्ष्म यंत्र बनाया है, जो गर्मी को बिजली में बदलने वाले मात्र डाक टिकट जितने बड़े एक थर्मो-जनरेटर की मदद से बहुत कम वोल्टेज की बिजली पैदा करता है।
कानों की मशीन चलेगी शरीर की गर्मी से!!!
इस बिजली से, उदाहरण के लिए, ऊंचा सुनने वाले अपने कान में लगे श्रवणयंत्र को चला सकते हैं। इस मिनी जनरेटर के लिए बाहरी हवा और शरीर की गर्मी के बीच मात्र दो डिग्री अंतर होना भी पर्याप्त है। चलिए इंसान के शरीर की गर्माहट कुछ तो काम आएगी। संभवत: एक दिन ऐसा भी आएगा कि उसके शरीर की गर्मी से वह अपनी रोजमर्रा के कार्यों को भी कर सकेगा जैसे खाना पकाना, कार या मोटर साइकिल चलाना।
Saturday, June 13, 2009
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व्यापारिक प्रतिनिधि- रश्मि वर्मा
कार्यालय प्रतिनिधि- सुजाता साहा
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इनके जीवन को भी रोशन करें
माटी समाज सेवी संस्था पिछले आठ वर्षों से समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम कर रही है। पिछले दिनों संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का कार्य कर रही है।
पिछले दो वर्ष से संस्था ने बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास आरंभ किया है।
बस्तर कोंडागांव में साथी समाज सेवी संस्था द्वारा संचालित स्कूल साथी राऊंड टेबल गुरुकुल में ऐसे बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता- पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ- साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है, जिसमें बच्चो के यूनिफार्म के साथ कॉपी, किताबें भी शामिल हंै।
माटी समाज सेवी संस्था ने इस स्कूल के 10 बच्चों को गोद लेकर पिछले दो वर्ष से उनकी शिक्षा हेतु धन एकत्रित करने का जिम्मा उठाया है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग तीन हजार रुपए खर्च होते हैं। शिक्षा के प्रति चिंतित जागरुक नागरिकों ने गत वर्ष से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से किसी ने एक बच्चे को गोद लिया है तो किसी ने दो बच्चो की शिक्षा का जिम्मा उठाया है। इसी महती कार्य में सहयोग देने वालों में- श्रीमती निरेन्द्री वर्मा, पलारी रायपुर, सुमन शिवकुमार परगनिहा- रायपुर, अरुणा नरेन्द्र तिवारी- रायपुर, प्रियंका गगन सयाल- लंदन, डॉ. प्रतिमा अशोक चंद्राकर-रायपुर, कुमुदिनी तरुण खिचरिया- दुर्ग, तथा प्रताप सिंह राठौर-अहमदाबाद शामिल हैं।
इस अभिनव प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके सहयोग से एक बच्चा जिसके लिए शिक्षा कोसो दूर है, शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार बनेगा। तो क्यों न इनके जीवन में भी रोशनी फैलाने, सब मिलकर दीप से दीप जलाएं।
संपर्क के लिए पता-
माटी समाज सेवी संस्था
पंडरी, रायपुर (छ. ग.) 492 004,
फोन नं. 0771- 2428172
Email- drvermar@gmail.com
माटी समाज सेवी संस्था पिछले आठ वर्षों से समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम कर रही है। पिछले दिनों संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का कार्य कर रही है।
पिछले दो वर्ष से संस्था ने बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास आरंभ किया है।
बस्तर कोंडागांव में साथी समाज सेवी संस्था द्वारा संचालित स्कूल साथी राऊंड टेबल गुरुकुल में ऐसे बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता- पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ- साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है, जिसमें बच्चो के यूनिफार्म के साथ कॉपी, किताबें भी शामिल हंै।
माटी समाज सेवी संस्था ने इस स्कूल के 10 बच्चों को गोद लेकर पिछले दो वर्ष से उनकी शिक्षा हेतु धन एकत्रित करने का जिम्मा उठाया है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग तीन हजार रुपए खर्च होते हैं। शिक्षा के प्रति चिंतित जागरुक नागरिकों ने गत वर्ष से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से किसी ने एक बच्चे को गोद लिया है तो किसी ने दो बच्चो की शिक्षा का जिम्मा उठाया है। इसी महती कार्य में सहयोग देने वालों में- श्रीमती निरेन्द्री वर्मा, पलारी रायपुर, सुमन शिवकुमार परगनिहा- रायपुर, अरुणा नरेन्द्र तिवारी- रायपुर, प्रियंका गगन सयाल- लंदन, डॉ. प्रतिमा अशोक चंद्राकर-रायपुर, कुमुदिनी तरुण खिचरिया- दुर्ग, तथा प्रताप सिंह राठौर-अहमदाबाद शामिल हैं।
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