June 12, 2009

आपके पत्र / मेल बॉक्स

आत्मीय प्रस्तुति
उदंती का नया अंक पढ़कर ख़ुशी हुई । हमेशा की तरह यह अंक भी अच्छी साज-सज्जा, बेहतर रचनाओं और आत्मीय प्रस्तुति के कारण दिल को छू गया । बधाई ।
- देवमणि पांडेय, मालाबार हिल, मुम्बई
ब्लाग की असामयिक मौत
संजय तिवारी के लेख में इस बात का कोई जिक्र ही नहीं है कि ब्लाग की यह असामयिक मौत कैसे हो रही है। हां मैं इस बात से सहमत हूं कि बहुत सारे ब्लाग केवल नाम के लिए चल रहे हैं। उनमें कुछ गिने चुने लोग ही टिप्पणी करते हैं। मैं लिखूं तो तुम टिप्पणी करो और तुम लिखो तो मैं टिप्पणी करूं। संयोग से मैंने भी एक ब्लाग बनाया है। पर बहुत उत्साह का माहौल दिखता नहीं है। अगर हम सचमुच ब्लाग को जिंदा देखना चाहते हैं तो कुछ विचारवान लोगों को आगे आना पड़ेगा और इसमें भागीदारी करनी पड़ेगी। केवल दूर से बैठकर देखने या कहने से काम नहीं चलेगा। उदंती के इस अंक में वंदना से परिचय कराने के लिए आपको सौ-सौ सलाम। इतने अद्भुत चित्र मैंने पहली बार देखे हैं। खासकर चोटी में लिपटी बच्ची को देखकर मैं बेहद रोमांचित हूं। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कला पर सामग्री देखकर खुशी हुई। वंदना के चित्रों ने पत्रिका में चार चांद लगा दिए हैं। वंदना को भी बधाई।
- राजेश उत्साही, बैंगलोर
सराहनीय प्रयास
    यू हीं नेट को छानते हुए आपके उदंती.कॉम पर नजर पड़ी। पत्रिका का प्रयास और विचार सराहनीय है। शुभकामनाएं।
- अशोक कुमार, असिस्टेंट एडिटर, bhadas4media.com
नयनाभिराम कलेवर
उदंती के दो अंक देखें। सच कहूं, छत्तीसगढ़ की यह एक उपलब्धि है। इतनी सुंदर, सुरुचिपूर्ण, सुसज्जित पत्रिका मैंने अब तक नहीं देखी। खुद एक पत्रिका का प्रकाशन करता हूं लेकिन इस पत्रिका के नयनाभिराम कलेवर बाकी पत्रिकाओं को फीकी कर देती हैं। उदंती में छत्तीसगढ़ की महक है। साहित्य-संस्कृति एवं समकालीन विषयों का संस्पर्श करने वाली यह बहुरंगी पत्रिका निरंतर प्रकाशित होती रहे यही मेरी शुभकामना है।
- गिरीश पंकज, संपादक, सद्भावना दर्पण, रायपुर
पठनीय
उदंती का मार्च अंक मिला। प्रकाशन, गुणवत्ता की प्रशंसा पहले ही कर चुका हूं। रचनाएं इस बार भी पठनीय हैं। इस अंक में प्रकाशित  कविताएं पत्रिका के महत्व को बढ़ाती हैं।
- त्रिभुवन पाण्डेय, सोरिदनगर, धमतरी
संस्कृतियों का परिचय
उदंती अच्छी निकल रही है। इसमें बीच बीच में आप विभिन्न संस्कृतियों से परिचय कराने वाले लेख प्रकाशित करती हैं जो बहुत अच्छे व जानकारी प्रधान होते हैं।  ऐसे लेख हमेशा प्रकशित करने की कोशिश करें।    
                 - शेली खत्री, जबलपुर
आजाद भारत की भयावह हकीकत
उदंती का मार्च अंक आनलाइन पढऩे को मिला। नक्सलग्रस्त इलाके का यात्रावृतांत- मैंने देखा एक समृद्ध संस्कृति को विलुप्त होते... काफी अच्छा लगा। पढ़कर ताज्जुब हुआ कि वहां के हालात इतने जटिल हैं। बिना किसी लागलपेट के यह वृतांत लिखा गया है। दाद देनी होगी अंजीव जी के हिम्मत की जिन्होंने हमें आजाद भारत के इस भयावह हकीकत से अवगत कराया। उदंती के प्रकाशन के लिए संपादकीय टीम को कोटिश: बधाई। 
- श्वेता शर्मा, कवयित्री, यू.एस.ए.

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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