August 25, 2011

'मेरी कमीज पर तुम्हारी कमीज से कम दाग क्यों?'

- मंजु मिश्रा

राजनीतिक परिदृश्य में भारत की बदली हुयी तस्वीर के बारे में यदि हम वैश्वीकरण के नजरिए से बात करें तो तस्वीर ख़ुशनुमा नजर आती है, हम गर्व के साथ हिमालय की तरह सिर ऊँचा करके खड़े हैं विश्व के सामने हमारी आवाज के खास मायने हैं, हमें कोई नकार नहीं सकता। स्वतंत्रता के बाद सफलताओं और विकास का जो लम्बा सफर तय किया है हमारे देश ने उसने हमारी एक अलग और मजबूत पहचान बनायी है दुनिया के सामने और आने वाले समय में बड़े और सशक्त काहे जाने वाले कई देशों को टक्कर देते हुये "Land of opportunities" बन कर उभरने की दावेदारी भी काफी प्रबल है जिस को कोई अनदेखा नहीं कर सकता।
लेकिन अगर घर की बात करें, कहने का मतलब यह कि देश के अंदरूनी हालातों की बात करें तो वे तो बद से बदतर ही होते जा रहे हैं। राजनीति भ्रष्टाचार का दूसरा नाम बनकर रह गयी है। सब में जमकर होड़ लगी है 'मेरी कमीज पर तुम्हारी कमीज से कम दाग क्यों?' या 'हम बर्बरता में किसी से कम नहीं', या फिर 'भाई-भतीजा वाद'... हजारों करोड़ के घोटाले की बात तो आजकल ऐसे होती हैं मानो पान खा कर थूकने की बात हो रही हो। शासक वर्ग या तो अक्षम है या फिर कुनीतियों का शिकार है। पक्ष हो या विपक्ष सब अपनी अपनी झोली भरने में लगे हैं।
जिन संस्कारों और नैतिक मूल्यों के के लिए भारतीय संस्कृति जानी जाती रही है उनका आज कहीं पता नहीं है। मेरे विचार में ऐसा भी नहीं है कि हम पूरी तरह से विमुख हो गए हैं अपनी संस्कृति से लेकिन शायद समुचित समन्वय की कमी है। हमारी प्राथमिकताएँ थोड़ी स्वार्थपरक हो गयी हैं। उनको नए सिरे से गढऩा होगा। ऐसे में "Back to basics" की राह शायद हालातों को बदलने में सहायक हो। बच्चे के पैदा होने से लेकर उसके सक्षम नागरिक बनने तक के सफर को यदि भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों और सुसंस्कारों का खाद पानी मिले तो ही शायद एक ईमानदार, कर्मठ, दूसरों के बारे में सोचने वाली एवं पक्षपात की नीतियों से दूर एक ऐसी पौध का, एक ऐसी पीढ़ी का सृजन होगा जो हमारे सपनों के भारत का निर्माण कर सकेगी। जहाँ सब सबके लिए होंगे, सब सबका होगा, प्यार होगा, मान होगा और भाईचारा होगा। लेकिन उसके लिए हम सबको ख़ुद को संयमित करना होगा, और अपने लिए एक आचार संहिता तय करनी होगी। भ्रष्टाचार और स्वार्थ की दीमक को जड़ से दूर किये बिना कुछ नहीं होने वाला।
- कैलिफोर्निया, manjumishra@gmail.com

4 Comments:

सहज साहित्य said...

मंजु मिश्रा जी ने अपने आलेख 'मेरी कमीज पर तुम्हारी कमीज़ से कम दाग़ क्यों' में कड़वी सच्चाई बयान की है। आज के युग में दागदार आदमी ही सिर उठाकर, नथुने फुलाकर बात कर रहा है । यही सबसे बड़ी विडम्बना है ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सही विश्लेषण ... अपने स्वार्थ को कैसे छोड़ें लोग ?

Rachana said...

aapka ek naya rup dikha aapke lekhan me aaj manushya bas svarth me hi lipt hai .............
aur garv se chalraha hai dusron ki chinta karne wala murkh samjha jata hai
rachana

Rashmi Kulshrestha said...

मंजु जी का आलेख'मेरी कमीज..के द्वारा समाज के
नैतिक मूल्यों,के ह्रास का बखूबी विश्लेषण किया गया है।मनुष्य अपने स्वार्थ सिद्धि के लिये ...अपना पेट हाउ,मै न जानू काउ",में लगा हुआ है।

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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