August 25, 2011

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस कब तक रहेंगे 'दो शब्द'

- विनोद साव

किसी बात का महत्व तब और अधिक बढ़ जाता है जब उनके नाम से पर्व मनाए जाते हैं। आजादी के बाद बरसों से हमारे यहां दो शब्दों के हर साल 'दिवस' मनाए जाते हैं, एक का नाम है- स्वतंत्रता दिवस और दूसरे का नाम है गणतंत्र दिवस। दिवस मनाए जाने से महत्व बढ़ता चला जाता है। कई पुरुष इसलिए महापुरुष बन जाते हैं क्योंकि बार बार उनके जन्म दिवस मना दिए जाते हैं। कुछ लोगों की महानता में कोई कसर रह जाती है या दिवस माने में चूक हो जाती है तो उसकी भरपाई उनकी जन्म शताब्दी मनाकर कर दी जाती है। कुछ लोगों की महानता इस आधार पर प्रमाणित होती है कि उनकी जन्मतिथि, पुण्यतिथि या जन्म शताब्दी कितने करोड़ खर्च करके मनायी जाती है जितना ज्यादा खरचा होगा उतनी अधिक महानता मानी जावेगी। आजकल ऐसी अनेक महान आत्माएं भटक रही हैं जन्म- शताब्दी के आधार पर अपना मूल्यांकन हो पाने के इंतजार में।
कुछ तारीखें व्यक्ति को समर्पित होती हैं तो कुछ शब्द को- दो अक्टूबर और चौदह नवम्बर व्यक्ति की याद दिलाते हैं तो पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी शब्द की याद दिलाते हैं, ये दो शब्द हैं- स्वतंत्रता और गणतंत्र - एक शब्द पंद्रह अगस्त को सुना- सुनाया जाता है तो दूसरा छब्बीस जनवरी को गुंजाया जाता है। स्वतंत्रता की झड़ी बरसात में होती है तो गणतंत्र की ठिठुरन ठण्ड में होती है। एक देश को आजाद बताता है तो दूसरा यह बताता है कि देश में बार बार संशोधन करने के लिए एक संविधान भी हैं। एक में झंडा फहराने के लिए राष्ट्रपति हैं तो दूसरे के लिए प्रधानमंत्री हैं। एक में लोग 'बापू' को याद कर के भाव- विव्हल होते हैं तो दूसरे में 'बाबा साहब' का नाम पुकारते हैं। एक शब्द सन सैंतालिस में मिला और दूसरा सन इंकावन में।
अब समानता के नाम पर भी कुछ हो जाए - इन दोनों दिवसों पर स्कूलों में प्रभात फेरी निकाली जाती है, पब्लिक स्कूलों में टॉफी व चाकलेट तथा बाकी स्कूलों में दूध पावडर और दलिया बांटे जाते हैं। सरकारी कार्यालयों में ध्वजारोहण के बाद ठेकेदारों व इंजीनियरों द्वारा चाय नाश्ते का इंतजाम। दोनों ही अवसरों में अनेक नेताओं द्वारा एक ही भाषण का देना तथा अपने भाषण में स्वतंत्रता को गणतंत्र और गणतंत्र दिवस को स्वतंत्रता दिवस कह देना उनका आम शौक है। कोई- कोई महानुभाव गणतंत्र को गणतंत्रता भी कहते हैं। इन दोनों कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण रेडियो और टी.वी. पर सबेरे सात बजे से किया जाता है जिसका आँखों देखा हाल जसदेव सिंह सुनाते हैं। पहले वे राष्ट्रीय खेल हॉकी की कामेन्टरी सुनाते थे और बाद में राष्ट्रीय दिवस का हाल सुनाने लगे- जो हाल हॉकी का हुआ वही हाल देश का हो रहा है।
सोचने की बात यह है कि स्वतंत्रता और गणतंत्र कब तक रहेंगे आखिर 'दो-शब्द'। (व्यंग्य संग्रह- 'मैदान-ए-व्यंग्य' से)
संपर्क: पद्नाभपुर के पीछे, मुक्त नगर, दुर्ग मो. 09907196626
---

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष