August 25, 2011

अमीरों की सरकार, अमीरों द्वारा अमीरों के लिए

- राम अवतार साचान

हमारा लोकतंत्र तो लोक चेतना और सामाजिक आजादी का शंखनाद था लेकिन ऐसा हुआ नहीं यहां पर केवल अंग्रेजों को हटाने मात्र से आजादी मान ली गई और सामाजिक व्यवस्था अलग रखकर केवल आर्थिक विकास को ही मूल लक्ष्य मान लिया गया। जिससे हुआ कुछ ऐसा कि समाज की सभी विसंगतियां जीवित रही।
हमें आजादी मिली सन् 1947 में और हमने आजाद हिन्दुस्तान में सांस ली। हमारा संविधान बना और लागू किया गया 26 जनवरी 1950 को। यहीं हमारे लोकतंत्र दिवस की स्थापना हुई वैसे इतिहासकारों के अनुसार हम 30 जनवरी 1930 में भी गणतंत्र की अनौपचारिक घोषणा कर चुके थे।
हमारा लोकतंत्र तो लोक चेतना और सामाजिक आजादी का शंखनाद था लेकिन ऐसा हुआ नहीं यहां पर केवल अंग्रेजों को हटाने मात्र से आजादी मान ली गई और सामाजिक व्यवस्था अलग रखकर केवल आर्थिक विकास को ही मूल लक्ष्य मान लिया गया। जिससे हुआ कुछ ऐसा कि समाज की सभी विसंगतियां जीवित रहीं, जिसकी वजह वही आज वोट बैंक, क्षेत्रवाद, जातिवाद, धर्मवाद, भाषावाद और न जाने किस किस तरह के समीकरणों को जन्म दिया। इसी वजह से कई नए राज्य बने जिसमें कई तरह की विसंगतियां थी।
क्योंकि जिस समय लोकतंत्र बना और आजादी मिली उस समय के तमाम राष्ट्रीय नेता या तो मारे गए या उन्होंने सत्ता की भागीदारी से साफ मना कर दिया। क्योंकि वे सामाजिक विसंगतियों को नष्ट करने की क्षमता रखते थे और जो जनतंत्र उनके साथ था वह नहीं रहा।
देश के अंदर सन् 1952 में पहला चुनाव हुआ तब जनता में बड़ा ही उत्साह था कि हमारी सरकार होगी हम स्वयं उसके कर्णधार होंगे। जिसे हम लोकतंत्र कहते हैं 'जनता की सरकार, जनता द्वारा जनता के लिएÓ यह उस समय के लोकतंत्र का नारा था। लेकिन समय के साथ ही साथ इसमें भी जल्दी गिरावट आई और उसके मायने ही बदल गए। आज एक सांसद के चुनाव में लगभग दस करोड़ खर्च होते हैं। यही नहीं गांव के पंचायत चुनाव में भी धन, बल और सत्ता का खुलकर दुरुपयोग किया जा रहा है। अत: मुझे कहने में कोई संकोच नहीं होगा कि आज के लोकतंत्र की व्यवस्था- 'अमीरों की सरकार, अमीरों द्वारा अमीरों के लिए' है।
इसमें जनता कहां बैठती है- आज का नेता अपने को संबल कदापि नहीं समझता वह शासक की भूमिका में रहता है और जनता प्रजा की स्थिति में। वह सारे अपराध (अपहरण, भ्रष्टाचार वित्तीय घोटाला इत्यादि) कार्य खुलकर करता है। जो पहले के शासक किया करते थे। ऐसे में कहां गया हमारा तुम्हारा प्यारा लोकतंत्र।

संपर्क: 93/9 बलरामपुर हाउस, मम्फोर्डगंज,
इलाहाबाद- 211002, मो. 9628216646

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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