February 28, 2011

प्यार का दर्द


कहते है कि प्यार में दर्द भी होता है प्यार के इस दर्द को हम कम भी नहीं करना चाहते क्योंकि प्यार एक खूबसूरत एहसास है, लेकिन यदि आप काम में व्यस्त है और आपके सर में दर्द शुरु हो गया है जो प्यार का नहीं आपके काम के टेंशन का दर्द है तो अपने प्रिय साथी का चित्र देखकर इस दर्द से राहत पा सकते हैं।
एक ताजा शोध के परिणाम दर्शाते हैं कि अपने किसी रोमांटिक साथी की तस्वीर देखने भर से दर्द का एहसास कम हो सकता है। स्टेनफर्ड विश्वविद्यालय चिकित्सा अध्ययन शाला के जेरेड यंगर और साथियों द्वारा किए गए इस शोध में यह भी पता चला है कि ऐसे रोमांटिक अनुभव के दौरान मस्तिष्क का पारितोषिक तंत्र सक्रिय हो जाता है। मस्तिष्क पारितोषिक तंत्र उस परिपथ को कहते हैं जिसके जरिए हम किसी अनुभव को अपने कार्य के एक खुशनुमा पारितोषिक के रूप में देख पाते हैं। यह देखा गया है कि कई दर्द निवारक रसायन मस्तिष्क के इस तंत्र को सक्रिय करते हैं। इस शोध से जुड़े लोगों का मत है कि यह तरीका कई मामलों में लंबे समय के दर्द के प्रबंधन में कारगर साबित हो सकता है। अध्ययन में मूलत: कुछ युवा लोगों को वालंटीयर्स के तौर पर शामिल किया गया था। उन्हें ताप के कारण होने वाले दर्द की अनुभूति दी गई और फिर उन्हें तीन समूहों में बांट दिया गया। एक समूह के व्यक्तियों को अपने किसी रोमांटिक साथी की तस्वीरें देखने को कहा गया। दूसरे समूह को किसी परिचित व आकर्षक व्यक्ति की तस्वीरों के साथ रखा गया जबकि तीसरे समूह को कोई ऐसा काम करने को दिया गया जो उनका ध्यान बंटाता हो। तीनों समूहों का एमआरआई भी जारी रहा।
अपने रोमांटिक साथी की तस्वीर देखने वाले लोगों और ध्यान बंटाने वाले कार्य में लगे लोगों में दर्द का एहसास समान रूप से कम हुआ मगर सिर्फ रोमांटिक साथी की तस्वीरें निहारने वाले व्यक्तियों में ही मस्तिष्क की पारितोषिक प्रणाली सक्रिय हुई। यह बात एमआरआई के आंकड़ों से पता चली जबकि दर्द के एहसास में कमी की बात खुद वालंटियर्स के बयानों पर आधारित थी। इन परिणामों से पता चलता है कि मस्तिष्क के पारितोषिक तंत्र को गैर- औषधीय तरीकों से सक्रिय करने पर भी दर्द से मुक्ति मिल सकती है। हालांकि इस अध्ययन में शामिल लोगों की संख्या बहुत कम थी मगर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। इस अध्ययन के बारे में एक बात और गौरतलब है कि सारे के सारे वालंटियर्स युवा स्नातक छात्र थे। उनमें प्रेम वगैरह की भावनाएं काफी तीव्र होती हैं। दिक्कत यह है कि जीर्ण दर्द के मामले ज्यादातर उम्रदराज लोगों में होते हैं। उनके संदर्भ में किसकी तस्वीर दिखाने से काम चलेगा, यह स्पष्ट नहीं है। बहरहाल, अध्ययन से इतना तो स्पष्ट है कि दर्द से मुक्त के लिए गैर- औषधीय तरीके भी हैं। (स्रोत फीचर्स)
वाह भई वाह
कॉलेज
संता सिंह ने एक कॉलेज खोला... पर सारे स्टुडेंट कनफ्यूज्ड थे कि किस कोर्स में एडमिशन लें...? क्योंकि ... कॉलेज का नाम था- संता सिंह्स मेडिकल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर कॉमर्स एंड आर्ट्स।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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