February 28, 2011

लहसुन हजारों साल से आजमाए नुस्खे पर विज्ञान ने भी लगाई मुहर

रक्तचाप को नियंत्रण में रखेगा

लहसुन से होने वाले लाभ और इसके चिकित्सीय गुण सदियों पुराने हैं। शोध और अध्ययन बताते हैं कि आज से 5000 वर्ष पहले भी भारत में लहसुन का इस्तेमाल उपचार के लिए किया जाता था। आस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों के एक दल ने तो परंपरागत भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की इस मान्यता की पुष्टि भी कर दी है कि उच्च रक्तचाप पर काबू पाने में लहसुन का इस्तेमाल कारगर हो सकता है। एडिलेड विश्वविद्यालय के डा. कैरेन रीड की टीम ने तीन महीने तक उच्च रक्तचाप से पीडि़त 50 मरीजों का अध्ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला है। डा. रीड ने कहा कि लहसुन का सत्व उच्च रक्तचाप पर काबू पाने वाली दवाइयों के साथ लेने पर अधिक असर दिखाता है। लहसुन का इस्तेमाल उच्च रक्तचाप के रोगी के लिए एकमात्र दवा के तौर पर नहीं किया जा सकता है लेकिन अगर दवाओं के साथ इसे लिया जाए तो बेहद शानदार नतीजे देखने को मिलेंगे।
हालांकि उच्च रक्तचाप रोकने में लहसुन के उपयोगी होने के बारे में आयुर्वेद हजारों साल से कहता आ रहा है। लेकिन डा. रीड का दावा है कि उन्होंने पुराने लहसुन के सत्व को रक्तचाप नियंत्रित करने में कारगर पाया है और यही उनके अध्ययन को अनूठा बनाता है। डा. रीड के अनुसार लहसुन को कच्चा- ताजा अथवा पाउडर के रूप में इस्तेमाल करने पर उसका असर एक जैसा नहीं होता है। अगर आप खाना बनाते समय ताजे लहसुन का इस्तेमाल करते हैं तो उसमें रक्तचाप नियंत्रित करने वाले अवयव नष्ट हो जाते हैं। जबकि पुराने लहसुन का सत्व यह काम बखूबी करता है।
कोलेस्ट्रॉल पर भी काबू
नीदरलैंड्स में भी हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार लहसुन की दो कलियों के नियमित सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाने पर हृदय संबंधी रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि बारिश के दिनों और जाड़े के मौसम में लहसुन का नियमित सेवन करने पर सर्दी- जुकाम से भी राहत मिलती है।
...और जोड़ों का दर्द
भोजन में लहसुन, प्याज और हरे प्याज के पर्याप्त सेवन से गठिया का खतरा भी कम हो सकता है। लंदन के किंग्स कॉलेज और युनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के अनुसंधानकर्ताओं ने खुराक और जोड़ों के दर्दनाक रोग के बीच सम्बंधों का पता लगाया है। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि लहसुन परिवार की सब्जियों का अधिक सेवन करने वाली महिलाओं में कमर में ऑस्टियोआर्थराइटिस की आशंका कम होती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस वयस्कों में गठिया का बेहद आम रूप है। ब्रिटेन में इस बीमारी से लगभग 80 लाख लोग पीडि़त हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी की ज्यादा आशंका होती है।
यह बीमारी मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्गो में कूल्हे, घुटने और रीढ़ को प्रभावित कर दर्द और अपंगता पैदा करती है। मौजूदा समय में दर्द निवारक और जोड़ों की शल्य चिकित्सा के अलावा इस बीमारी का और कोई प्रभावी इलाज नहीं है। शरीर के वजन और ऑस्टियोआर्थराइटिस के बीच सम्बंध जगजाहिर है, लेकिन यह पहला अध्ययन है जो यह बताता है कि खुराक से ऑस्टियोआर्थराइटिस का विकास और रोकथाम कितना और किस तरह प्रभावित हो सकता है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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