February 28, 2011

रंग बिरंगी दुनिया

एक बैंक जहां ताला नहीं लगता!

यह सचमुच चौंकाने वाला समाचार है कि जब चारो ओर लूट मची हो ऐसे समय में महाराष्ट्र के शनि शिंगनापुर गांव में यूनाइटेड कमर्शियल बैंक (Uco) देश की पहली ऐसी ब्रांच है, जिसमें कभी ताला नहीं लगता। दरअसल यह बिना ताले वाला बैंक खोला ही इसीलिए गया है क्योंकि इस गांव के लोग अपने घरों के दरवाजों पर भी कभी ताले नहीं लगाते! बैंक के इस ब्रांच का नाम लॉकलेस बैंक रखा गया है। बैंक अगले कुछ महीनों में एक एटीएम लगाने वाला है। बैंक का कामकज बंद हो जाने के बाद जानवर न घुस जाए सिर्फ इसलिए दरवाजे पर एक कुंडा लगा दिया जाता है।
शनि शिंगनापुर अहमदनगर जिले का एक छोटा सा गांव है। गांव में शनिदेव का एक प्रसिद्ध मंदिर है। रोजाना करीब 5 हजार भक्त यहां पूजा के लिए आते हैं। खास बात यह है कि इस गांव में किसी भी घर में दरवाजे नहीं हैं। बताया जाता है कि सैकड़ों साल पहले जब से गांव में शनिदेव का मंदिर बना, तब से यहां कोई अपराध भी नहीं हुआ है! ग्रामीणों की शनिदेव में बड़ी आस्था है। गांव में कोई चोरी न होने के पीछे सभी शनिदेव की कृपा मानते हैं। लोगों का मानना है कि जो भी चोरी या लूट जैसी वारदात करेगा, उसे शनिदेव का कोप झेलना पड़ेगा।
30 करोड़ का शाही पलंग
एक अंग्रेज डिजाइनर ने दुनिया की सबसे महंगी पलंग का निर्माण किया है। जिसकी कीमत लगभग 30 करोड़ रुपए है। इस पलंग के निर्माता स्टुअर्ट ह्यूजेस कहते हैं कि उनकी यह हस्तनिर्मित बिस्तर सर्वोत्तम किस्म की लकड़ी से तराशी गई है। इस बहुमूल्य पलंग पर 24 कैरेट का 107 किलोग्राम सोना जड़ा है। हीरों से जडि़त इस पलंग में कई बहुमूल्य पत्थर भी लगे हैं। इसकी सजावट के लिए जो फैब्रिक इस्तेमाल हुआ है वह सर्वोत्तम किस्म का इटेलियन सिल्क है। कीमत को देखते हुए यह तो तय है कि इसमें इस्तेमाल की गई सभी वस्तुएं असली और गारंटेड है पर इस बिस्तर पर सोने वाले को भी इसमें सोने के बाद सुख की नींद आयेगी या नहीं इसकी तो बनाने वाला भी गारंटी नहीं दे सकता। फिर भी उम्मीद तो यही की जानी चाहिए कि इस शाही पलंग पर सो कर कोई भी अपने को राजा महसूस करेगा। नींद भले ही न आए।
छींककर सिर में लगी गोली निकाली
सिनेमा में बंदूक की गोली से अनेक प्रकार के करतब दिखाने का खेल तो सबने देखा होगा लेकिन अगर सचमुच में ऐसा हो तो क्या लोग दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर नहीं होंगे। सुनने में यह भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन इटली के एक व्यक्ति ने अपने सिर में लगी गोली को अपनी छींक के द्वारा नाक से निकाल दिया।
डार्को सेंगरमानो नाम के एक 28 वर्षीय व्यक्ति को नए साल की पूर्वसंध्या पर एक पूजास्थल पर टहलते हुए सर में गोली लगी। गोली उसके सर के दाहिने हिस्से में लगने के बाद आंखों के छेद से होते हुए उसके नाक की नलिका में जाकर फंस गई। हालांकि इसके बावजूद भी डार्को गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।
द डेली टेलिग्राफ की खबर के मुताबिक खून से लथपथ डार्को को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इससे पहले की डॉक्टर उसके सर में लगी गोली को बाहर निकालते उसने अपनी छींक द्वारा खुद ही गोली को बाहर निकाल दिया।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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