February 28, 2011

आने दो वसंत

- राजीव कुमार
आज
क्यों हर तरफ सूखा है,
भीतर-बाहर
सब कुछ रुखा-रुखा है
बादल भी हो रहे हैं सफेद
इन्सान की कौन कहे
पेड़ों ने भी नहीं ओढ़ी है,
हरे पत्तों की चटक शाल
उतरा हुआ है
खेतों का भी रंग,

इस बार
आने दो वसंत
छाने दो हरियाली
चारो ओर,
भर जाने दो
नदियों में पानी,
कल-कल, कल-कल
बहने दो झरनों को
झर-झर, झर-झर
झरने दो।

खिल जाने दो खेतों में
सरसों के पीले-पीले फूल,
चुन लेने दो तितलियों को
मनचाहे फूल,
भवरों को झूम लेने दो
पीकर मकरंद।

बिछ जाने दो
हरियाली की चादर
चारो ओर
बह लेने दो
एक बार फिर
मंद- मंद
सिहरन भरा समीर।
घुल जाने
दो हवाओं में भंग,
छा जाने दो
चतुर्दिक उमंग।

शेमल के फूलों से
चुरा कर लाल रंग
बना लो गुलाल,
खेलो होली
एक- दूजे के संग।

रंग दो
मन का कोना- कोना,
अंग- अंग,
दो रिश्तों को
नया जीवन,
वसंत को आने का अवसर
बार- बार, बार- बार।
पता: वरिष्ठ अनुवादक,
रसायन और उर्वरक मंत्रालय,
रसायन और पेट्रो- रसायन विभाग
भारत सरकार, नई दिल्ली
http://ghonsla.blogspot.com
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कोयल की मधुर कूक
- कैलाशचंद्र शर्मा
सरसों के खिले फूल,
ओढ़े पीला दुकूल,
हरियाली नाच रही, आया वसंत है
प्रियतम हैं आन मिले,
मन के सब द्वार खुले,
तन- मन में नाच रहा जैसे अनंग है।
हिरणी सा मन चंचल,
गिरता सिर से आंचल,
बार बार तके द्वार, आया न कन्त है।
पढ़ती बार- बार पाती,
क्यों न उन्हें याद आती,
क्यों मेरी राहें ही, सूनी अनंत है
सरसों का पीलापन,
चहरे पर आया छन,
हो गये कपोल पीत, कैसा वसंत है।
कोयल की मधुर कूक,
उर में बढ़ जाती हूक,
पतझड़ है चहुं ओर,
कहाँ पर वसंत है ?

पता: HU- 44, Vishakha Enclave,
itampura (Uttari), Delhi- 110088

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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