March 23, 2012

तुम्हारे बिना

- डॉ जेन्नी शबनम

1.
रंग-अबीर
मन हुआ अधीर
होली खेलो रे!
2.
फगुआ पर्व
घर पाहुन आये
मन चंचल!
3.
भंग तरंग
इन्द्र-धनुषी रंग
सब तरफ!
4.
फगुआ मन
अंग-अंग में रंग
होली आई रे!
5.
होली त्यौहार
भेद-भाव मिटाए
मन मिलाए!
6.
अंग- अंग में
फगुनाहट छाए
मनवा नाचे!
7.
घर है सूना
परदेसी सजना
होली रुलाए!
8.
कैसे मनाए
है मन तड़पाए
पी बिन होली!
9.
तुम्हारे बिना
कैसे मनाऊँ होली
न जाओ पिया!
10.
बैरन होली
क्यों पिया बिन आए
तीर चुभाए!

संपर्क- द्वारा राजेश कुमार श्रीवास्तव, द्वितीय तल ५/7 , सर्वप्रिय विहार
नई दिल्ली- ११००१६ फोन-०११-२६५२०३०३



3 Comments:

प्रियंका गुप्ता said...

रंगों के त्योहार होली को इन हाइकुओं के माध्यम से मानो आँखों के सामने फिर से सजीव कर दिया है जेन्नी जी ने...। मेरी बधाई...।

ऋता शेखर 'मधु' said...

राग, अनुराग विरह सब कुछ वर्णन कर रहे हैं ये हाइकु...जेन्नी जी,बहुत२ बधाई|

सहज साहित्य said...

डॉ जेन्नी शबनम जी के होली के हाइकु में प्रेम और विप्रलम्भ का सन्तुलित चित्रण मन को छू जाता है । छोटे से कलेवर में गहरे भाव भरना कठिन काम है , जिसको जेन्नी जी ने सहजता से निभाया है ।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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