March 23, 2012

आपके पत्र/ मेल बॉक्स


भविष्य के साथ खिलवाड़

उदंती के जनवरी अंक में अनकही के अंतर्गत व्यक्त आपके प्राथमिक शिक्षा के विषय में विचारों से मैं सहमत हूं। शिक्षा का इतिहास बताता है कि सबसे उपेक्षित प्राथमिक शिक्षा है। आयोग और रिर्पोट्स सिफारिशों के बंडल हैं। सबको उच्च शिक्षा की चिंता है यह देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आपका लेख 'शिक्षा की ध्वस्त बुनियाद' आंख खोलने वाला है।
- डॉ. जय जयराम आनंद, भोपाल (मप्र)

सुरुचिपूर्ण संयोजन

हमेशा की तरह उदंती का जनवरी अंक भी सुरुचिपूर्ण संयोजन और साज- सज्जा का खूबसूरत नमूना है। बधाई स्वीकार करें। मुख पृष्ठ बहुत ही आकर्षक है। नेताजी का संदेश और पुस्तक प्रेमी सूरज प्रकाश जी का पुस्तक दान भी बहुत प्रेरणादायक सामग्री है। पंडित लोचन प्रसाद पाण्डे के साहित्यिक कृतित्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए धन्यवाद। उदंती के उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
- प्रताप सिंह राठौर, अहमदाबाद, psrathaur@yahoo।com

अभिनव प्रयोग


सूरज प्रराश जी द्वारा पुस्तकें बांटने का यह प्रयोग साहित्य जगत में अभिनव प्रयोग माना जायेगा। सही अर्थों में पुस्तकों का प्रचार करने वाले साहित्य प्रेमियों के लिए अनुकरणीय है। यह स्तुत्य प्रयोग है। ऐसे कार्य के लिये सूरज सा दिल भी तो चाहिए।
- अरविन्द कुमार ठाकुर, पटना

सार्थक और ख्रूबसूरत पत्रिका


'उदंती' के रूप में एक सार्थक और खूबसूरत पत्रिका निकालने के लिए बहुत -बहुत बधाई...। रचनाओं का चयन अच्छा है...। मेरी शुभकामनाएँ...। काम्बोज जी की लघुकथाएँ... बहुत भावपूर्ण हैं जो मन को छू जाती हैं। एक ओर गरीबी की विवशता तो दूसरी में माँ-बाप का दर्द...। बधाई...। सुधा जी के हाइकु ने अबकी बरस की सर्दी सजीव कर दी...बहुत सुन्दर...।
- प्रियंका गुप्ता,priyanka.gupta.knpr@gmail.com

बस्तर बैण्ड


बस्तर बैण्ड की व्यापक जानकारी देने के लिए संजीव तिवारी जी बधाई के पात्र हैं। वाद्ययन्त्रों एवं गीत -संगीत की जानकारी के साथ कलाकारों की जानकारी देकर लेख को और अधिक विश्वसनीय बना दिया है। अपनी सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी से हम अनजान होते जा रहे हैं। उदन्ती जैसी पत्रिकाएँ इस तरह की खोजपूर्ण जानकारी देकर सामाजिक उपकार ही कर रही हैं।
-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' दिल्ली, rdkamboj@gmail.com

उल्लेखनीय प्रयास


किसी भी पत्रिका के प्रकाशित लेखों और विचारों के प्रस्तुतिकरण में जो आवश्यक होता है, वह इस अंक में मौजूद है। किसी एक लेख के बारे में उसकी गुणवत्ता पर लिखा जाएगा तो बाकी के साथ न्याय नहीं हो सकेगा। आपके पास श्रेष्ठ लेखकों एवं लेखिकाओं की टीम है। मैं उदंती के अंकों को पढ़ता हूं और उनका विश्लेषण करता हूं। मैंने इस पत्रिका के कई लेखों के तथ्यों एवं उनके प्रस्तुतिकरण को देखा। अच्छा नहीं, बहुत अच्छा लगा। समाज को इस तरह की पत्रिकाओं की बहुत आवश्यकता है और मैं समझता हूं कि ऐसा लेखन हर विषय वस्तु के साथ पढऩे वाले को कहीं न कहीं सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। उत्कृष्ट पत्रिकाओं को चलाना कोई आसान काम नहीं है। आपका यह प्रयास उल्लेखनीय है, ईश्वर आपकी सदैव सहायता करे।
- दिनेश शर्मा, संपादक- स्वतंत्र आवाज डॉट कॉम, info@swatantraawaz।com

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

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