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Sep 4, 2026

तीन कविताएँ

  - रेखा शाह आरबी 

1- शांति की प्रतीक्षा 

बाहरी शोर और 

भीतरी शोर 

दोनों 

प्रभावित करते है ,

दोनों देह पर 

निशान छोड़ते हैं,

 इस धींगामुश्ती 

 से अच्छा है ,


दोनों से कुछ दूरी पर बैठकर 

उनके नाट्य देखें,

 अपनी शांति हेतु 

उनकी शांति की

प्रतीक्षा करें।


हर आवाज पर 

दौड़ कर उनकी ओर ,

भागने का कोई 

मतलब नहीं है।


2- लांछन

किसी की 

पीड़ा में शामिल होने का 

सबसे अच्छा तरीका 

यह है कि ....,

उनके बारे में 

बिना कोई मत बनाए ,

हम उनकी बात को 

 गंभीरता से सुन ले।


निकलने दे उसके 

भीतर के लावे को,

बहने दे उसके दुख को,

टोके बिना 

मजबूत होने का

ताना, लांछन दिए बिना।


3- रूका वक्त 

हम चलते हैं 

चलते जाते हैं ,

पीछे दृश्य छूटते हैं,

 हम उनके सुखद अनुभूतियों को 

यादों में अनुभूत करते हैं।


 लेकिन एक समय के बाद 

हमें लौट आना चाहिए ।


पीछे छूटी तमाम 

चीजों के लिए।


जिन पत्तों को 

गिरते हुए देखना सुखद लगा था ,

उनके लिए।


क्या पता 

वह पत्ते हवा में ही 

अभी भी टँगे हो ,

हवा ठिठकी हो ..

वक्त रुका हो..

नदी स्थिर हो ..

रास्ते अचकचाए हों,

हमें सभी को 

चलायमान करने के लिए 

लौटना चाहिए।


परिचय - रेखा शाह उत्तर प्रदेश के बलिया  जिला से है। दो पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं, और कुछ विचाराधीन है। युद्धवीर पुरस्कार  और लघु कथा दर्पण पुरस्कार और अन्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है। राष्ट्रीय समाचार पत्रों के लिए निरन्तर लेखन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।  ई मेल - rekhasahrb@gmail.com

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