- रेखा शाह आरबी
1- शांति की प्रतीक्षाबाहरी शोर और
भीतरी शोर
दोनों
प्रभावित करते है ,
दोनों देह पर
निशान छोड़ते हैं,
इस धींगामुश्ती
से अच्छा है ,
दोनों से कुछ दूरी पर बैठकर
उनके नाट्य देखें,
अपनी शांति हेतु
उनकी शांति की
प्रतीक्षा करें।
हर आवाज पर
दौड़ कर उनकी ओर ,
भागने का कोई
मतलब नहीं है।
2- लांछन
किसी कीपीड़ा में शामिल होने का
सबसे अच्छा तरीका
यह है कि ....,
उनके बारे में
बिना कोई मत बनाए ,
हम उनकी बात को
गंभीरता से सुन ले।
निकलने दे उसके
भीतर के लावे को,
बहने दे उसके दुख को,
टोके बिना
मजबूत होने का
ताना, लांछन दिए बिना।
3- रूका वक्त
हम चलते हैंचलते जाते हैं ,
पीछे दृश्य छूटते हैं,
हम उनके सुखद अनुभूतियों को
यादों में अनुभूत करते हैं।
लेकिन एक समय के बाद
हमें लौट आना चाहिए ।
पीछे छूटी तमाम
चीजों के लिए।
जिन पत्तों को
गिरते हुए देखना सुखद लगा था ,
उनके लिए।
क्या पता
वह पत्ते हवा में ही
अभी भी टँगे हो ,
हवा ठिठकी हो ..
वक्त रुका हो..
नदी स्थिर हो ..
रास्ते अचकचाए हों,
हमें सभी को
चलायमान करने के लिए
लौटना चाहिए।




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