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Aug 1, 2026

किताबेंः डिटेक्टिव मिरांडा यात्रा पुरातन से नूतन

  - विजय जोशी, पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल

पुस्तकः डिटेक्टिव मिरांडा , लेखक - समरेंद्र नाथ रॉय, मूल्य- 299/ ₹,  प्रकाशक :  रा. प्रकाशन ओ मुद्रण  93, महात्मा गांधी मार्ग,  कोलकाता 700007

 इस दौर में उत्सुकता से सरोबार खोजी लेखन असंभव नहीं पर कठिन अवश्य है। अंग्रेजी में तो शरलॉक होम्स, मारियो पुज़ो, जेम्स हेडली चेज़ से लेकर जेफ्री आर्चर यानी आज तक फिक्शन कला जीवंत है। हिंदी में भी एक समय इब्ने सफ़ी के कर्नल विनोद की जासूसी की कहानियां आज तक सबके जेहन में हैं, गो अब उस लेखन की रफ्तार थम चुकी है।
 ऐसे में तकनीकी माहौल में रचे बसे लेखक समरेंद्र नाथ रॉय, पूर्व निदेशक, भेल द्वारा अनूठी शैली में रचित खोजी मानसिकतायुक्त संग्रह "डिटेक्टिव मिरांडा" पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ। पुस्तक में समाहित हैं प्राचीन, विगत, पौराणिक दर्शन से वर्तमान व आधुनिकता की कहानियां. ऐसी अनेक रुचिकर में से कुछ कहानियों की एक बानगी 
 आरंभ नायक डिटेक्टिव मिरांडा, सहायक सोफिया, सिपाही लोबो चरित्र के माध्यम से पुर्तगाली दौर (1510 - 1961) से आज तक का गोआ जिसमें भूत, प्रेत, भ्रम, ड्रग तस्करी टेकनीक व खोज की कहानियां समेटी गईं हैं।
 इनमें लेखक द्वारा तर्क बनाम अंधविश्वास से परे जाकर  भूतों या परा आत्मा या आत्मा के संदर्भ में तो गीता की बखूबी व्याख्या की गई है : न हन्यते हन्यमाने शरीरे एवं अव्यक्तादीनि भूतानि। जीवन एक प्रतीक्षालय है जहां अपने सारे झोले छोड़कर आत्मा एक दिन लौट जाती है, पर समाप्त नहीं होती : मृत्योर्मा अमृतं गमय
 और इस संदर्भ में अब्राहम लिंकन, विंस्टन चर्चिल, नेपोलियन बोनापार्ट, चार्ल्स डिकन द्वारा तक इसकी उपस्थिति के एहसास को अवचेतन मन में स्वीकारने की बात बताई गई है। 
 एक अन्य अध्याय में निहित है गुजरात में द्वारिका प्रवास के दौरान इतिहास, विश्वास, समुद्र तट वायुमंडल में कृष्ण के प्रभामंडल के आभास को समेटते हुए आज की दुग्ध क्रांति का विवरण। जर्सी गाय के सौजन्य से सर्वप्रथम उत्पादकता वृद्धि व गुणता जिसके तहत आज प्रदेश इस गौरव गाथा का नायक है।
 महानगरों की रात्रि का अनुभव कराता है चेप्टर मिडनाइट मसाला जहां एक रेडियो जॉकी की ज़ुबानी नर्स, ऑटो चालक, चोर व संवेदनशील इंसान की कथा व व्यथा दोनों को समेटा गया है रुचिकर हास्य व्यंग्य शैली में। 
हां एक और रुचिकर चेप्टर है मक्खन पर, जिसकी कथा द्वापर के बाल माखन चोर से वर्तमान तक आती है, जिसमें उसका उपयोग स्वाद व सेहत से इतर काम निकलने के लिए लोगों के अहं की संतुष्टि व स्वार्थ प्रयोजन समाहित है। 
  समापन खंड आदि से अनंत सनातन के उद्भव को समर्पित है। जहां अन्य धर्मों के आरंभ की काल गणना सहज उपलब्ध है, वहीं सनातन की काल से परे उत्पत्ति को समाहित किया गया है। राम "सभ्यता की सर्वोच्च आकांक्षा" तो कृष्ण "जटिलता के साथ जीने की कला" का दर्शन व्याप्त है। कल्पना बनाम तथ्य।
 कल्पनाशीलता सहित प्राचीन इतिहास एवं पौराणिक दर्शन को तथ्यपरक कल्पनाशीलता के साथ अंजुरी में भरकर समर्पित किया गया है। एक कल्पना युक्त रोचक शैली पुस्तक, जिसे रा. प्रकाशन, कोलकाता द्वारा प्रकाशित किया गया है। मुद्रण उत्तम एवं त्रुटिरहित। 

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