पुस्तकः डिटेक्टिव मिरांडा , लेखक - समरेंद्र नाथ रॉय, मूल्य- 299/ ₹, प्रकाशक : रा. प्रकाशन ओ मुद्रण 93, महात्मा गांधी मार्ग, कोलकाता 700007
इस दौर में उत्सुकता से सरोबार खोजी लेखन असंभव नहीं पर कठिन अवश्य है। अंग्रेजी में तो शरलॉक होम्स, मारियो पुज़ो, जेम्स हेडली चेज़ से लेकर जेफ्री आर्चर यानी आज तक फिक्शन कला जीवंत है। हिंदी में भी एक समय इब्ने सफ़ी के कर्नल विनोद की जासूसी की कहानियां आज तक सबके जेहन में हैं, गो अब उस लेखन की रफ्तार थम चुकी है।
ऐसे में तकनीकी माहौल में रचे बसे लेखक समरेंद्र नाथ रॉय, पूर्व निदेशक, भेल द्वारा अनूठी शैली में रचित खोजी मानसिकतायुक्त संग्रह "डिटेक्टिव मिरांडा" पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ। पुस्तक में समाहित हैं प्राचीन, विगत, पौराणिक दर्शन से वर्तमान व आधुनिकता की कहानियां. ऐसी अनेक रुचिकर में से कुछ कहानियों की एक बानगी
आरंभ नायक डिटेक्टिव मिरांडा, सहायक सोफिया, सिपाही लोबो चरित्र के माध्यम से पुर्तगाली दौर (1510 - 1961) से आज तक का गोआ जिसमें भूत, प्रेत, भ्रम, ड्रग तस्करी टेकनीक व खोज की कहानियां समेटी गईं हैं।
इनमें लेखक द्वारा तर्क बनाम अंधविश्वास से परे जाकर भूतों या परा आत्मा या आत्मा के संदर्भ में तो गीता की बखूबी व्याख्या की गई है : न हन्यते हन्यमाने शरीरे एवं अव्यक्तादीनि भूतानि। जीवन एक प्रतीक्षालय है जहां अपने सारे झोले छोड़कर आत्मा एक दिन लौट जाती है, पर समाप्त नहीं होती : मृत्योर्मा अमृतं गमय
और इस संदर्भ में अब्राहम लिंकन, विंस्टन चर्चिल, नेपोलियन बोनापार्ट, चार्ल्स डिकन द्वारा तक इसकी उपस्थिति के एहसास को अवचेतन मन में स्वीकारने की बात बताई गई है।
एक अन्य अध्याय में निहित है गुजरात में द्वारिका प्रवास के दौरान इतिहास, विश्वास, समुद्र तट वायुमंडल में कृष्ण के प्रभामंडल के आभास को समेटते हुए आज की दुग्ध क्रांति का विवरण। जर्सी गाय के सौजन्य से सर्वप्रथम उत्पादकता वृद्धि व गुणता जिसके तहत आज प्रदेश इस गौरव गाथा का नायक है।
महानगरों की रात्रि का अनुभव कराता है चेप्टर मिडनाइट मसाला जहां एक रेडियो जॉकी की ज़ुबानी नर्स, ऑटो चालक, चोर व संवेदनशील इंसान की कथा व व्यथा दोनों को समेटा गया है रुचिकर हास्य व्यंग्य शैली में।
हां एक और रुचिकर चेप्टर है मक्खन पर, जिसकी कथा द्वापर के बाल माखन चोर से वर्तमान तक आती है, जिसमें उसका उपयोग स्वाद व सेहत से इतर काम निकलने के लिए लोगों के अहं की संतुष्टि व स्वार्थ प्रयोजन समाहित है।
समापन खंड आदि से अनंत सनातन के उद्भव को समर्पित है। जहां अन्य धर्मों के आरंभ की काल गणना सहज उपलब्ध है, वहीं सनातन की काल से परे उत्पत्ति को समाहित किया गया है। राम "सभ्यता की सर्वोच्च आकांक्षा" तो कृष्ण "जटिलता के साथ जीने की कला" का दर्शन व्याप्त है। कल्पना बनाम तथ्य।
कल्पनाशीलता सहित प्राचीन इतिहास एवं पौराणिक दर्शन को तथ्यपरक कल्पनाशीलता के साथ अंजुरी में भरकर समर्पित किया गया है। एक कल्पना युक्त रोचक शैली पुस्तक, जिसे रा. प्रकाशन, कोलकाता द्वारा प्रकाशित किया गया है। मुद्रण उत्तम एवं त्रुटिरहित।

A wonderful contribution by the author connecting past with present and insight into future. कल, आज और कल. past, present and future all at one place. 3 in 1. An eye opener for future scenario in the offing. Great facts and imagination both. Kind regards
ReplyDeleteरॉय साहब ने अपनी बहुमखी प्रतिभा का सेवा निवृत्ति के बाद रचनात्मक दिशा में उपयोग कर लोगों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण रखा है l जोशी जी भी इस दिशा में अपनी प्रतिभा को चरम पर ले जा रहे हैंl आपने यहाँ विषय को अच्छी तरह समझकर एक प्रभावी समलोचना प्रस्तुत की हैl हार्दिक अभिनन्दनl
ReplyDeleteदेवेंद्र जोशी
ReplyDeleteDr SK Agrawal Gwalior
ReplyDeleteभेल director S N Roy द्वारा लिखी पुस्तक की समालोचना जोशी जी ने कुछ is प्रकार की है कि लेखक की रचना को पढ़ने का मन होना स्वाभाविक लगता है
दोनों ही विभूतियों को साधुवाद
Thanks to Vijay for the review of my latest detective Miranda book.It gives wider exposure!
ReplyDeleteS N Roy
बहुत ही सुंदर तरीके से एक अलग ही अंदाज में पुस्तक की समीक्षा की है जोशी सर ने। रॉय सर भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इतनी अच्छी पुस्तक लिखी।
ReplyDeleteDeeply impressed by Roy Sir's multifaceted personality and his active contributions through his insightful writings. Equally admirable is the excellent analysis presented by Joshi Sir.
ReplyDeleteA heartfelt salute to both these great personalities for their remarkable knowledge, dedication, and inspiration.
*श्री राय साहब बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आपकी सृजनात्मक अभिव्यक्ति सचमुच सराहनीय और वंदनीय है।*
ReplyDelete*आपके रेखाचित्र और 'डिटेक्टिव मिरांडा' हमें प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा की याद दिलाते हैं।*
*श्री विजय जोशी सर की गहन और सटीक समीक्षा 'डिटेक्टिव मिरांडा' को बार-बार पढ़ने की प्रेरणा देती है।*
*आप दोनों को हार्दिक अभिनंदन एवं धन्यवाद।*
आ. राय सर को बहुत बहुत शुभकामनाएँ एवं धन्यवाद ऐसी बुक लिखने के लिए वाक़ई आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हे। साथ ही जोशी को भी बहुत बहुत बधाई राय सा. की पुस्तक का ऐसा विवरण किया हे कि पुस्तक के प्रति जिज्ञासा ओर जाग्रत हो जाए। आप दोनो ही हिंदी जगत के अग्रणी हे। साधुवाद।
ReplyDeleteश्री समरेन्द्र नाथ रॉय साहब रचित "डिटेक्टिव मिरांडा" जैसी अनूठी कृति के लिए हार्दिक अभिनंदन। प्राचीनता से आधुनिकता तक पौराणिक सूक्ष्मदृष्टि और खोजी मनोवृत्ति का समन्वय देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई — आपके अनुसंधान-प्रधान, कल्पनाशील और विद्यमान यथार्थ से जुड़ी लेखनशैली ने पाठकों का दृष्टिकोण विस्तृत किया है। साथ ही श्री विजय जोशी जी द्वारा दिए गए सशक्त और प्रेरक टिप्पणियों के लिए भी धन्यवाद; आपकी सराहना लेखक और पाठक दोनों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी। इस सुंदर योगदान से हिन्दी साहित्य में Research oriented fiction की समृद्ध परंपरा को नया उत्साह मिलेगा। दोनों महानुभावों का हार्दिक अभिवादन।
ReplyDeleteराय सर की इतनी व्यापक संरचना इतिहास की पुरातन घटनाओं से लेकर आधुनिक युग तक उनको एक धागे में पिरोया गया है। इस उम्र में में भी ऐसी किताब लिखना सच में अत्यंत कठिन काम है जिसको राय सर ने बखूबी कर दिखाया है। उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है और जोशी सर ने भी पूरी किताब का सार बहुत बढ़िया तरीके से प्रस्तुत किया है जो पूरी किताब की व्याख्या बहुत कम शब्दों में कर दी है।
ReplyDeleteपुस्तक को पढ़ने की उत्सुकता जगाती बहुत सुंदर सारगर्भित समीक्षा।बधाई। सुदर्शन रत्नाकर
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