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Aug 1, 2026

चिंतनः ख्वाबों का खयाल

  - डॉ. महेश परिमल

लोग सदैव अपनों का खयाल रखने की बात करते हैं। पर किसी से यह नहीं सुना कि अपने सपनों का खयाल रखें। अपनों के बहुत से अपने होंगे, उनका खयाल रखने वाला कोई न कोई तो होगा ही। पर सपने तो अपने ही होते हैं, यदि हम उनका खयाल रखेंगे, तो वही सपने हमारा साथ देंगे।  सपने हकीकत का बीज होते हैं। इसलिए इंसान को सदैव अपने सपनों का खयाल रखना चाहिए। यही सपने ही तो अपने होते हैं, इनका खयाल हम नहीं रखेंगे, तो कौन रखेगा?

सपने वह नहीं होते, जो हमें सोने के बाद दिखाई देते हैं। सपने तो वे होते हैं, जो हमें सोने ही नहीं देते। जो सपने हमें सोने नहीं देते, वास्तव में वे ही होते हैं, हमारे अपने सपने। अच्छी नींद देने वाले सपने धोखा होते हैं, नींद उड़ा देने वाले सपने ही इंसान को जिंदा रखते हैं। आखिर क्या होते हैं सपने? वे हमें सोने क्यों नहीं देते? क्या वे सदैव हमारे साथ होते हैं या मुसीबत में हमें अकेला छोड़ देते हैं? आओ, कुछ ऐसे ही सपनों के बारे में बातें करें...

सपने वे नहीं होते, जो आंखों में बसते हैं, सपने वे होते हैं, जो मनो-मस्तिष्क को झंकृत कर देते हैं। आंखों में बसने वाले सपने अक्सर भुला भी दिए जाते हैं; लेकिन मस्तिष्क में टिके रहने वाले सपने सदैव याद रहते हैं। कुछ लोग दिवास्वप्न देखते हैं। ऐसे लोगों को लोग पागल, सरफिरा, अघोरी या फिर बावरा कहते हैं। जो हमारे सामने इस तरह से पेश आते हैं, तो यह समझ लो कि वे कहीं न कहीं अपने सपनों से आहत हैं। उनके सपने पूरे नहीं हुए। वे अपने सपने के साथ नहीं जी पाए, इसलिए सपनों ने उनसे नाता तोड़ लिया। उनकी इस स्थिति के लिए सपने ही हैं।

 इंसान सपनों के साथ जीता और मरता है। मरने पर इंसान अपनी सांसें तो किसी को नहीं दे सकता, लेकिन सपने अवश्य दे जाता है। वह सोचता है कि जिस सपने को मैं पूरा नहीं कर पाया, उसे मेरा यह अपना पूरा कर दिखाएगा। वह अपने वारिस को एक अधूरा सपना दे जाता है। अगर वारिस  सच्चा हो, तो वह उस सपने को पूरा करने की कोशिश करता है। झूठे वारिसों के सपने भी झूठे ही होते हैं। किसी अस्पताल, धर्मशाला या किसी भव्य इमारत के पूर्ण होने पर लोग कहते हैं कि उनका सपना साकार हुआ। वास्तव में सपना साकार नहीं होता, सपना पूरा होता है। साकार होना और पूरा होना अलग-अलग बात है। साकार अपनी आंखों के सामने होता है। पूरा हमारी अनुपस्थिति में भी हो सकता है।

हमें अपने शरीर की तरह अपने सपने को भी विशेष रूप से ध्यान में रखना होता है। हमें इन सपनों का खयाल रखना चाहिए। जिस तरह से हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए अच्छे खान-पान और विचार की आवश्यकता होती है, ठीक उसी तरह सपने को स्वस्थ रखने के लिए लगातार अच्छे विचार, परिश्रम और लगन की आवश्यकता होती है। स्वस्थ सपने इंसान को सदैव नेकी की ओर ले जाते हैं। अच्छे विचार, अच्छी आदतें, अच्छे लोगों के बीच रहने वाले लोगों के सपने भी उनके अपनों की तरह ही होते हैं। सपनों का खयाल रखना केवल उन्हें याद रखने भर की बात नहीं है, बल्कि उन्हें समझने, सँजोने और धीरे-धीरे जीवन में उतारने की प्रक्रिया भी है। सपने चाहे रात में देखे गए हों या दिन में, दोनों स्थितियों में हमारे भीतर की इच्छाओं, डर, उम्मीदों और संभावनाओं का आईना होते हैं। 

सपनों का खयाल रखने की पहली शर्त है कि उसे लिखने की आदत डालें।

सुबह उठते ही जो सपना याद हो, उसे डायरी में लिख लें। समय के साथ आपको अपने मन के पैटर्न समझ आने लगेंगे। यदि वे जीवन के सपने हैं, तो उन्हें स्पष्ट शब्दों में लिखना उन्हें वास्तविकता के करीब लाता है। याद रखें कभी भी किसी भी सपने को हल्के में न लें। कई बार लोग कहते हैं—“सपने तो सपने हैं।” लेकिन हर बड़ी उपलब्धि कभी न कभी किसी का सपना ही थी। इसलिए हमें अपने सपनों का सम्मान करना चाहिए।

कभी-कभी कोई सपना इंसान को बार-बार सताता है। इससे आप यह समझने की कोशिश करेंकि यह सपना हमें बार-बार क्यों आता है या कोई लक्ष्य आपको इतना आकर्षित क्यों करता है? अक्सर सपनों के पीछे हमारी गहरी भावनाएँ छिपी होती हैं। केवल सपना देखना पर्याप्त नहीं। यदि आपका सपना लेखक बनने का है, तो रोज थोड़ा लिखना शुरू करें। यदि किसी नई जगह जाने का सपना है, तो उसके बारे में जानकारी जुटाएँ। छोटे-छोटे कदम सपनों को टूटने नहीं देते।

तनाव, अनियमित दिनचर्या और थकान सपनों की दुनिया को बुरी तरह से  प्रभावित करती है। अच्छी नींद, संतुलित जीवन और शांत मन सपनों को जीवंत बनाए रखते हैं। यह मानकर चलें कि हर सपना पूरा होगा ही, यह गारंटी कोई नहीं दे सकता। कई सपने पूरा होने में वक्त लगाते हैं। कुछ केवल सबक सिखाकर आगे चल देते हैं। इसलिए सपने देखें, बार-बार देखें। कभी भी किसी भी सपने को मरने न दें। याद रखें, जब तक हमारे भीतर एक भी सपना जीवित है, हम मर नहीं सकते। सपना मरा, तो हमारा अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। इसीलिए कहा गया है कि अपनों से ज्यादा हमें अपने सपनों का खयाल रखना चाहिए। अपने हैं तो सपने हैं, यह कहना गलत होगा, बल्कि सही यही होगा कि सपने हैं तो अपने हैं।

सम्पर्कः T3-204 सागर लेक व्यू, वृंदावन नगर, अयोध्या बायपास, भोपाल- 462022, मो. 09977276257

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