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Jul 1, 2026

पर्यावरणः अपशिष्ट मत सोचो। अवसर सोचो!

 - अपर्णा विश्वनाथ

किंचित सही; लेकिन समय निकालिए और समझिए कि अपशिष्ट पदार्थों का पुनर्चक्रण (Recycling) को समझना आज के समय में हर एक के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि घरेलू अपशिष्ट के जिम्मेदार हम सभी हैं। इसलिए हमारा यह कर्तव्य है कि घरेलू अपशिष्टों के सही निपटान में अपना सहयोग दें।

अपशिष्ट पुनर्चक्रण मुख्य रूप से उपयोग किए जा चुके कचरे—जैसे पॉलिथीन, प्लास्टिक की बोतलें, एल्युमीनियम व स्टील के डिब्बे, कागज़-गत्ता, काँच, इलेक्ट्रॉनिक कचरा और पुरानी बैटरियों—को संसाधित (process) करके नए उपयोगी उत्पाद बनाने की प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया पर्यावरण को बचाने के लिए की जाती है।

पर्यावरण में हमारे चारों ओर का वातावरण, पेड़-पौधे, छोटे-बड़े जीव-जंतु सभी शामिल है। हमारे द्वारा फैलाए अपशिष्ट पदार्थ इनके लिए कितने नुकसानदेह और प्राणघातक भी है कभी सोचा है आपने ?

किचन और घर की सफाई में यह नजरअंदाज करते हैं कि क्या हमने अपने घर के कचरे को सही जगह फेंका है? ऑफिस जाते हाथ में कचरे की पॉलिथीन चुपचाप कहीं भी रख देते हैं। बस अपने घर से दूर। गृहणियाँ रात का बचा बासी खाना पॉलिथीन में भर कर बाहर फेंक आती हैं। पीछे उसका क्या हुआ, कहाँ गया कचरा कोई मतलब नहीं।

अपने आस-पास नजरें फेरें तो सड़क किनारे, मैदानों, पार्कों के आसपास भोजन की तलाश में पॉलिथीन चबाते गाएँ और अन्य जीव दिख जाएँगे। यह मासूम जीव पॉलिथीन या अन्य पैकटों में बंद खाना जब बाहर निकालने में असमर्थ होते हैं और कोई विकल्प नहीं दिखता तो विवशतावश पूरी पॉलिथीन ही खा जाते हैं। पॉलीथीन

हम क्या अनर्थ कर रहे हैं? यह घटना हैरतअंगेज से ज्यादा हम लोगों के लिए शर्मनाक है। क्योंकि इसकी जिम्मेदारी समाज में रह रहे हरेक व्यक्ति की है जो कर्तव्य विमुख है। समाज में रहकर अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाता है।

घटना जनवरी माह 2026 छत्तीसगढ़ की है। तबीयत बिगड़ने से एक गौ माता और बछड़े को भिलाई से रायपुर के राज्य स्तरीय पशु चिकित्सालय लाया गया। स्थिति ऑपरेशन तक आई। दो वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर संतोष आदिल (MVsc surgery ), डॉ नम्रता सिंह तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों की मदद से गाय और बछड़े का ऑपरेशन किया गया। घंटो मशक्कत के बाद गाय के पेट से पच्चीस किलो और बछड़े के पेट से ग्यारह किलो पॉलिथीन बाहर निकाला गया। सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह क्या परिस्थिति कर दी हम मानवों ने। ऐसा अमानवीय,

गैर-जिम्मेदाराना रवैया इन मूक प्राणियों के प्रति कहाँ तक उचित है?

उन मूक प्राणियों के  बचने की उम्मीद क्या ही हम कर सकते हैं! हम जैसे मतलबपरस्त लोग प्रार्थना करने के हकदार भी नहीं हैं।

अगर यह घटना आपको नहीं झकझोरती तो शायद यह बात जरूर परेशान करेगी कि आपके घर जिस गाय का दूध आ रहा है वह गाय सड़कों, मैदानों में इधर उधर फैले पॉलिथीन नहीं खाई होगी ! क्या आपके घर आया दूध शुद्ध है ? पॉलिथीन युक्त है पॉलिथीन मुक्त है"।

इस घटना को यहाँ लिखने का मकसद डराना नहीं; बल्कि चेतावनी है समय रहते सँभलने की। खुद के स्वास्थ्य और अपने आस-पास रह रहे जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधे की सुरक्षा की। क्योंकि उनमें भी प्राण है ।

थोड़ी भी संवेदना बाकी है आपमें तो सोचिएगा जरूर ! कूड़ा-करकट खासकर पॉलिथीन अपने घरों से अलग-अलग समेटकर पुनर्चक्रण के लिए दें।

हम मार्च 18 को विश्व पुनर्चक्रण दिवस मनाते हैं। हर बार नई थीम के साथ।  2026 का विषय है : "अपशिष्ट मत सोचो। अवसर सोचो! ” यह विषय आपको अपशिष्ट के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने के लिए प्रेरित करता है। अपशिष्ट को बेकार वस्तु समझने के बजाय, इसे कुछ नया बनाने के अवसर के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। कहते हैं ना एक पंथ दो काज। संवेदना और जिम्मेदारी एक सुंदर, स्वस्थ और टिकाऊ सामाजिक वातावरण के आधारस्तंभ हैं।

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