कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के जीव वैज्ञानिक युकी ओका इस बात का अध्ययन करते हैं कि दिमाग शरीर में विभिन्न चीज़ों का संतुलन (होमियोस्टेसिस) कैसे बनाए रखता है, खासकर तरल पदार्थों का संतुलन कैसे बनाता है और इसके लिए पानी व खनिज लवणों का तालमेल कैसे बनाता है।
दरअसल, हमारे शरीर में एक व्यवस्था है, जो हमारी बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति का ख्याल रखती
है। प्यास को बुझाना इनमें से एक व्यवस्था है। इस व्यवस्था की एक खासियत है कि इसके साथ ही पारितोषिक तंत्र जुड़ा होता है, ताकि तरल संतुलन बना रहे। दिमाग में मौजूद प्यास तंत्रिका हमारे शरीर को एक स्पष्ट संकेत प्रेषित करती है - सूखा गला, और हलक के पिछले हिस्से में खराश जैसी संवेदना। इस संवेदना का मकसद यह है कि आप पानी पिएँ और खून में लवणों की सांद्रता सही स्तर पर पहुँच जाए।
पानी का पहला घूँट हलक में उतरते ही एक संतुष्टि का एहसास होता है; क्योंकि ऐसा होते ही दिमाग में डोपामाइन का सैलाब आता है। डोपामाइन एक तंत्रिका-संप्रेषण रसायन है, जो अच्छा महसूस कराने का काम करता है। यह संतुष्टि का एहसास पानी गटकते ही महसूस होता है, हालाँकि पानी पीने के 15-30 मिनट बाद ही खून पतला होने लगता है, उसकी सांद्रता सही स्तर पर पहुँचने लगती है।
युकी ओका कहते हैं कि इसका मतलब है कि पानी पीने से मिलने वाली तत्काल संतुष्टि और खून की सांद्रता का सही स्तर पर पहुँचना दो अलग-अलग एहसास हैं।
ओका के समूह ने प्यास बुझाने से सम्बंधित दो तरह की तंत्रिकाएँ पहचानी हैं। एक होती हैं जो पानी गटकते ही सक्रिय हो जाती हैं और डोपामाइन मुक्त करती है। दूसरी तंत्रिकाएँ आंतों में पानी की सांद्रता में हो रहे परिवर्तनों का ध्यान रखती हैं।
ओका ने पाया कि प्यास के पूरी तरह बुझने के लिए ज़रूरी है कि ये दोनों किस्म की तंत्रिकाएँ सक्रिय हों। दोनों के सक्रिय होने पर ही पानी पीने का पारितोषिक संकेत मिलता है और पर्याप्त पानी पीने के बाद ही सांद्रता ठीक होने का संकेत मिलता है।
इन दो व्यवस्थाओं के सहयोगी कार्य को जांचने के लिए ओका के दल ने एक प्रयोग किया। उन्होंने पानी को सीधा आंत में पहुंचा दिया। ऐसा करने पर गटकने से मिलने वाला पारितोषिक संकेत नहीं मिला क्योंकि डोपामाइन मुक्त हुआ ही नहीं। यानी घूँट-दर-घूँट पानी मिलने पर दिमाग एक जश्न मनाता है और प्यास तो बुझती ही है। (स्रोत फीचर्स) ■

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