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Sep 5, 2026

हाइकुः किसान की कथाएँ

  - भीकम सिंह

1

दूर है कंत 

रुआँसे लौट रहे 

सारे बसंत।

2

उपेक्षित हैं 

किसान की कथाएँ 

खेत क्या गाएँ।

3

मेघों के स्वर 

बगावत के हैं तो?

क्या करें घर।

4

ढूँढते पाँव 

सुबह और शाम 

खेतों में गाँव।

5

सैंकड़ों बार 

स्मृतियों ने बाँधे हैं 

बन्दनवार 

6

चुप ही रहूँ

अँधेरों के खिलाफ 

क्या सच कहूँ ?

7

जगते दीये 

अँधियारा बैठा है 

होठों को सिये।

8

दरो-दीवारें 

आँगन के भी तारे 

माँ ही क्यूँ हारे।

9

बीड़ी फूँकता 

खेतों में बैठकर 

गाँव का डर।

10

नभ को हारे 

चाँद जस का तस 

दिखाता तारे।


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