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Jun 1, 2026

लघुकथाः पहली बार

- रामकुमार आत्रेय

चिड़िया ने देखा कि बाज अपने पंख फैलाए, गोली–की–सी तेजी से उसी की ओर उड़ा चला आ रहा है। दो–चार क्षणों में ही वह उसे अपने पंजों में दबोचकर अपना भोजन बना डालेगा। अचानक उसके मन में आया कि उसे बाज का भोजन बनना ही है, तो फिर क्यों न वह उसका मुकाबला करती हुई भोजन बने। उसके खुद को बचाने के लिए विपरीत दिशा में उड़ने की अपेक्षा सीधे बाज की ओर उड़ना शुरू किया, मानों वह सीधे उसी से जा टकराएगी। उसने अपनी चोंच आगे को निकाली हुई थी। बाज ने ज्यों ही चिड़िया को गोली–की–सी तेजी से अपनी ओर झपटते देखा, तो पहली बार, क्षण भर के लिए उसे अपने दिल में एक कँपकँपी–सी महसूस हुई।

अप्रत्याशित खतरे की आशंका से वशीभूत बाज ने न चाहते हुए भी अपना रास्ता बदल लिया और दूर कहीं उड़ गया। चिड़िया ने जब बाज को किसी कायर की तरह भागते हुए देखा, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने मन ही मन निश्चय किया कि बाज से बच निकलने का यह अनोखा तरीका बाकी सभी चिड़ियों को भी बतलाएगी; इसीलिए वह दूर उड़ती चिड़ियों के झुंड की ओर उड़ चली।

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