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Apr 1, 2026

प्रकृतिः घोंसलों पर लहराती लटकन सजावट नहीं, चकमा है

 दक्षिण-पूर्वी ब्राज़ील के जंगल में नदी का किनारा है। हल्की बयार बह रही है। इस बयार में, पेड़ की शाखों से लटकी काई-युक्त लताएँ/टहनियाँ लटकन की तरह डोल रही हैं। यदि नज़ारा आपको महज़ कुदरती सजावट लगे, तो जान लीजिए कि कुदरती शिकारियों की तरह आप भी धोखा खा गए हैं। आप यदि इस ‘सजावट’ पर ज़रा गौर फरमाएँगे, तो पाएँगे कि इन लटकनों से घोंसलों को सजाया गया है और घोंसलों में पक्षी के अंडे/चूज़े रखे हैं। निराश न हो, यह सजावट थी भी शिकारियों को चकमा देने के लिए।

बायोलॉजी लेटर्स के अध्ययन के अनुसार, ब्लू मैनाकिन (Chiroxiphia caudata) नामक चिड़िया अपने अंडों और चूज़ों की सुरक्षा के लिए घोंसलों में लंबी-लंबी लटकनें लटका देती है, ताकि टूकेन समेत अन्य शिकारियों को उनके घोंसले, घोंसले-जैसे न लगें और वे इनसे दूर ही रहें। ऐसा करने से इन शिकारियों द्वारा हमले की संभावना 10 गुना कम हो जाती है। हालाँकि बड़े शिकारी-पक्षियों के आक्रमण की संभावना तो फिर भी बनी रहती है, वे घोंसले पहचान सकते हैं। 

वैज्ञानिकों को काफी समय से यह पता था कि ब्लू मैनाकिन और अमेरिका की कई अन्य पक्षी प्रजातियाँ  घोंसलों में लटकन लटकाती हैं। उनका अनुमान था कि ऐसा शायद वे छद्मावरण देने के लिए करती होंगी। यानी ऐसा करने से घोंसले आसपास के परिवेश में घुल-मिलकर शिकारियों की नज़रों से ओझल रहते होंगे: लेकिन यह अनुमान पक्का नहीं था। एक विवाद यह था कि लटकनदार घोंसले तो ज़्यादा नुमाया हो सकते हैं और आसानी से पहचाने जा सकते हैं।

इस विवाद को सुलझाने के लिए फेडरल युनिवर्सिटी के पक्षी विज्ञानी मर्सिवल रॉबर्टो फ्रांसिस्को के दल ने ब्लू मैनाकिन द्वारा परित्यक्त घोंसलों की निगरानी करने का सोचा। जब ब्लू मैनाकिन का प्रजनन काल खत्म हो गया, तब पक्षी विज्ञानी कैसियानो मार्टिंस जंगल से 50 खाली और परित्यक्त घोंसले और उनकी काई-युक्त लटकन ले आए। प्रयोगशाला में उन्होंने प्लास्टिसिन (मॉडलिंग क्ले) से असली जैसे अंडे बनाए और हर घोंसले में ऐसे दो नकली अंडे रख दिए। फिर, अगले दो प्रजनन मौसम में इन घोंसलों को जंगल में ऐसी जगहों पर रखा, जहाँ कुदरती तौर पर काईदार लटकन बहुत कम पनपती है। शोधकर्ताओं ने कुछ घोंसलों पर लटकन लगी रहने दी, और कुछ की लटकन हटा दी। और घोंसलों की इंफ्रारेड कैमरे से निगरानी की।

लटकन होने का फर्क साफ दिखा। लटकन-विहीन 54 घोंसलों में से ग्यारह (20 प्रतिशत) घोंसलों से अंडे चोरी हुए थे, जबकि लटकन वाले 54 घोंसलों में से सिर्फ एक  अंडा चोरी हुआ था।

अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि लटकनदार घोंसले बनाने वाले पक्षी दरअसल अपने घोंसलों को न तो छुपाने की कोशिश करते हैं, न आसपास की किसी अन्य चीज़ जैसा दिखाने की। बस कोशिश यह होती है कि घोंसलों को ऐसे आकार दें कि वे घोंसले जैसे न दिखें, ताकि शिकारियों को पता न चले। हालांकि यह तरीका स्तनधारी या उन शिकारियों के विरुद्ध काम नहीं करेगा, जो शिकार खोजने के लिए गंध का सहारा लेते हैं। 

बहरहाल, एक सवाल बना हुआ है: इन घोंसलों पर काईदार जगहों पर ज़्यादा हमले क्यों होते हैं; क्योंकि यहाँ तो घोंसले अधिक ओझल होना चाहिए। शायद टूकेन पक्षी समझ गया हो कि ब्लू मैनाकिन अपने घोंसले काईदार जगह पर बनाता है। (स्रोत फीचर्स) ■


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