September 10, 2020

उदंती.com, सितम्बर 2020

उदंती.com, सितम्बर 2020
वर्ष-13, अंक-1


जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के
 गौरव का अनुभव नहीं है
वह उन्नत नहीं हो सकता। 
-डॉ. राजेंद्रप्रसाद





5 Comments:

रमेशराज तेवरीकार said...

उदंती का सितम्बर-20 अंक भी अन्य अंकों की भांति समसामयिक सन्दर्भों से युक्त सारगर्भित सामग्री का अद्भुत और अनुपम खजाना सँजोये है। एक से एक बेहतरीन आलेख, संस्मरण, लघुकथाएं, कविताएं इस अंक में उपस्थित हैं। डॉ गोपालबाबू शर्मा का व्यंग्य, हिमांशु जी की कविता विशेषरुप से प्रभावशाली।
सम्पादक महोदय साधुवाद के पात्र हैं

नंदा पाण्डेय said...

हमेशा की तरह यह अंक भी पढ़ने योग्य ��

nirdesh nidhi said...

बहुत आकर्षक अंक, शानदार साज सज्जा के साथ।

विजय जोशी said...

अंक अच्छा लगा कहुं तो न्याय नहीं हो पायेगा संपादिका और लेखक दोनों के प्रति, क्योंकि हंस के समान मोती सी रचनाएं चुनकर, सहेजकर, सुन्दर आकार देकर पाठकों के सामने परोसना असंभव भले ही न हो, पर कठिन तो अवश्य ही है। प्रशंसा बहुत सतही सुख देगी, मैं तो श्रद्धावनत हूं इन पलों में संपादिका महोदया के प्रति। सादर साधुवाद

Sudershan Ratnakar said...

हर बार की तरह निखरते रूप में उत्कृष्ट रचनाओं से सुसज्जित उदंती का सित. अंक पढ़ने को मिला । किसी भी पत्रिका की श्रेष्ठता का मापदंड उसका सम्पादकीय और चयनित रचनाओं से मापा जाता है।इसका श्रेय डॉ रत्ना वर्मा जी एवं परामर्श सम्पादक रामेश्वर काम्बोज जी को जाता है। ।ज्ञानवर्धक, सटीक जानकारी देते रोचक आलेख, जीवनी अंश संस्मरण, कहानी,कविताएँ, लघुकथाएँ सम्पूर्ण सामग्री पठनीय है। कविता भट्ट जी द्वारा बनजारा मन, काव्य संग्रह की समीक्षा सारगर्भित एवं सुंदर है। सभी रचनाकारों को बधाई ।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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