September 10, 2020

रंगमंच

महान चित्रकार विन्सेंट वॉन गांग
विन्सेंट ए फ्लैश बैक

-  विनोद साव 

चित्रकार और हमारे फेसबुक फ्रेंड गिलबर्ट जोसेफ और उनके कलाकार बेटे पंकज, 4 मार्च 2020 को अपनी कार लेकर आ गए और बड़े आग्रहपूर्वक मुझे रायपुर मुक्ताकाशी में ले गए; जहाँ अंतरराष्ट्रीय चित्रकार वॉन गॉग पर निर्देशित एक नाटक खेला गया, जो एक दमदार रिसर्च प्ले था।
     19 वीं सदी के मशहूर डच आर्टिस्ट विन्सेंट वॉन गॉग के जीवन पर आधारित नाटक है ‘विन्सेंट ए फ्लैश बैक यह रायपुर में प्रदर्शित इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालयखैरागढ़ के कलाकारों की बड़ी उम्दा प्रस्तुति थी। यह उनकी पाँचवीं प्रस्तुति थी। इसके पहले मुम्बई में सल प्रस्तुति हो चुकी है और अगली प्रस्तुति बीकानेर में किए जाने की घोषणा मंच पर की गई।
वॉन गांग की एक 
मशहूर पेंटिंग 'गेहूं का खेत'
     अमूमन नाटकों की सबसे बड़ी समस्या उनकी माइक व्यवस्था होती है, जिसके कारण नाटकों के संवाद दर्शकों तक नहीं पहुँच पाते हैं। पर यहाँ निर्देशक ने इस बात का ध्यान रखा और ध्वनि प्रसारण की ऐसी व्यवस्था रखी कि दर्शकों/श्रोताओं ने इसे सुना और इसकी प्रस्तुति को सराहा व सफल बनाया। नाटक में ध्वनि के साथ-साथ प्रकाश एवं संगीत सज्जा भी कथा के अनुकूल थी इसलिए भी इस दुखांत नाटक का सीधा असर दर्शकों पर हुआ, जो उनके मन-मस्तिष्क को झकझोर गया।
नाटक का सूत्रधार
 पंडवानी गायक
     पिछले दिनों रायपुर फिल्म फेस्टिवल में कुछ लघु-फिल्में दिखलाई गई थीं। उनके लिंक रायपुर की एक प्रशंसिका ने भेजे थे। इनमें लेखिका अमृता प्रीतम और उनके चित्रकार पति इमरोज पर बनी एक लघु-फिल्म थी। इसमें पति-पत्नी के अंतर-सम्बन्धों के बीच पति, पत्नी और वह यानी साहिर की अंतरंग कथा को आधार बनाया गया था। इसमें कलाकार की कला और रोमान के मध्य उपजे द्वन्द्व का प्रयोगात्मक चित्रण हुआ था।
      इसे देखने के थोड़े दिनों बाद किसी चित्रकार के जीवन पर बनी यह दूसरी कथा देखने को मिली- नाटक विन्सेंट ए फ्लैश बैकमें। मैंने निर्देशक से पूछा था कि विन्सेंट के जीवन पर एक उपन्यास भी लिखा गया था इरविंग स्टोन द्वारा लस्ट फॉर लाइफ’ (जीवन लिप्सा).. क्या आपके नाटक का कथानक उससे प्रभावित है?’ उन्होंने सहमति व्यक्त की और बताया कि यह उपन्यास मुझे खैरागढ़ विश्वविद्यालय के ग्रंथालय में प्राप्त हो गया था। इस उपन्यास पर फिल्म भी बन चुकी है।
       नाटक के आरंभ में अपने मकान मालिक की बेटी जेनी पर आसक्त होने के दृश्य हैं। विन्सेंट जेनी द्वारा नकारे जाने पर क्रोध और
नाटक में लाइट एंड साउंड का कमाल
उत्तेजना में उसका गला पकड़कर चिल्लाता है जेनी! मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और तुमसे शादी करना चाहता हूँतब अपना गला छुड़ाते हुए जेनी भी गुस्से से कह उठती है कि तुम मुझे प्यार करते हो, तुम्हारा दोष है। मैं हर प्यार करने वाले आदमी से शादी तो नहीं कर सकती।नहीं अपनाने पर चोट खाया प्रेमी विन्सेंट एक दिन दुनिया का महान चित्रकार बनता है। उसके जीवन में आईं एक अन्य विवाहित महिला के साथ भी नाटक में विन्सेंट के जन्मदिन पर मद्यपान करने के कुछ दृश्य हैं। इन दृश्यों के जरिए विन्सेंट के जीवन के अनेकों पृष्ठ खुलते चले जाते हैं।
एक दृश्य में अपने
 चित्रकार मित्रों से परामर्श
     विन्सेंट की कला और उसके दर्द को उसके छोटे भाई थियो ने समझा और उसने दिलासा दी और उसकी पेंटिंग्स के ग्राहक बनाकर उसे आर्थिक मजबूती दिलाई। विन्सेंट की मुलाकात अपने देश हालैण्ड के वरिष्ठ चित्रकार अंतव माउव से हुई, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ाया। माउव ने उसे कहा कि विन्सेंट.. कला वाहवाही पाने के सतही प्रयोगों से नहीं बल्कि गंभीर रचनाकर्म से ऊँचाई को हासिल करती है। तुम्हारे भीतर अपनी कला को ऊँचाई देने की पूरी क्षमता है। तुम अब ड्राइंग और स्केच से बाहर निकलकर ऑइल पेंटिंग्स और पोर्ट्रेट पर काम करो।
विन्सेंट वॉन गांग मुख्य अभिनेता
 विन्सेंट के कलाकर्म के प्रति समर्पण और अपने समय से आगे निकल जाने के कारण पॉल गॉगा जैसे कुछ कला-समीक्षकों से उनके जमकर मतभेद हुए, तब क्रोध में आकर विन्सेंट ने उन्हें अपने घर से बाहर का रास्ता दिखाया। संभव है मूल्यांकन के अभाव में या यह किसी सृजनशिल्पी के अपने समय से आगे निकल जाने की व्यथा होगी, जब नाटक के अंत में विन्सेंट ने अपने सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस तरह उन्होंने सैंतीस बरस की कम उम्र में अपने जीवन का अंत तो कर लिया; पर अपने कला कर्म के केवल एक दशक की अल्पावधि में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली थी। सूरजमुखी, तारों भरी रात, गेहूँ के खेत पर कौव्वेआइरिस, आलूहारी जैसी उनकी कई पेंटिंग्स हैं, जिन्हें हम यदा कदा देख तो पाते हैं ,पर इस बात से अजान होते हैं कि ऐसे दुर्लभ पेंटिंग्स के विलक्षण कलाकार विन्सेंट वॉन गॉग थे। इनमें सूरजमुखी ज्यादा जाना हुआ चित्र रहा।            विन्सेंट कला के शहर पेरिस में रहे। उन्हें पेरिस की धूप पसंद थी। इस धूप के पीलेपन का उनके चित्रों पर गहरा असर रहा। उनकी पेटिंग्स सूरजमुखीऔर गेहूँ के खेतमें यह पीला रंग पूरे चटकपन के साथ चमकता है। 
मुक्ताकाशी मंच रायपुर में नाटक के 
प्रदर्शन के बाद परिचय देते कलाका
     विन्सेंट वॉन गॉग के मुख्य किरदार की भूमिका में डॉ. चैतन्य अठलावे अपने अभिनय से जान डाल देते हैं। उनमें अभिनय क्षमता इतनी कूटकर भरी है कि वे फिल्मों के भी एक अच्छे चरित्र अभिनेता सिद्ध हो सकते हैं। अपनी नुकीली नाक के कारण वे दिखते भी वॉन गॉग की तरह हैं। नाटक में अनेकों स्थान पर झूमती हुई आकृतियों के माध्यम से चित्रकार के द्वंद्व और उसकी मानसिक उथलपुथल को दर्शाया गया है। नाटक के युवा निर्देशक डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय हैं। यह उनके नाट्य-निर्देशन की विशेषता कही जा सकती है कि नाटक का सूत्रधार छत्तीसगढ़ी में पंडवानी गाते हुए एक महान चित्रकार की दुखांत जीवन कथा को कहता है। रागी के साथ इसके संवाद बड़े चुटीले बन पड़े हैं। मूल उपन्यास से लिए कुछ संवाद मार्मिक हैं। नाटक के सभी पात्र प्रभाव छोड़ते हैं।
सम्पर्क: मुक्तनगरदुर्ग छत्तीसगढ़-491001मो.9009884014, Email- vinod.sao1955@gmail.com

4 Comments:

विनोद साव said...

धन्यवाद रत्ना जी आपने रचना को अच्छा डिस्प्ले किया है. यह संपादन में मेहनत का नतीजा है.

Sudershan Ratnakar said...

रोचक जानकारी देता अच्छा आलेख ।

Sudershan Ratnakar said...

रोचक जानकारी देता अच्छा आलेख ।

Sudershan Ratnakar said...

रोचक जानकारी देता अच्छा आलेख ।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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