September 10, 2020

गीत

१. तुम भी तो छोड़ आ गाँव पंछी!
- नारायण सिंह निर्दोष

सीने  में  लिए  गहरे  घाव पंछी
तुम भी तो  छोड़ आये गाँव पंछी!

पंछी! तू  शहर  में आया क्यूँ बता 
गाँव में नहीं मिले क्या अन्न-देवता

होने  लगी  रोज  काँव-काँव पंछी!
तुम भी  तो  छोड़ आए गाँव पंछी!

पेड़ों ने   लाद लिये   बर्रों के छत्ते
सीख ग राजनीति डाल और पत्ते

अब कहाँ है पीपल की छाँव पंछी!
तुम भी तो  छोड़ आए  गाँव पंछी!

जिस तरफ देखिये गुलेल ही गुलेल
कुदरत ने  डाल दी  नाक में नकेल

फूल गये सारे….. हाथ-पाँव पंछी!
तुम भी तो  छोड़   गांव पंछी!


२. याद में आपकी

याद में आपकी 
हम कितने मशगूल हैं।

यादें नहीं देतीं
हमें पलक झपकने 
नीम-बाज अँखियन में
डोल ग सपने

सपने,
सपनों में रेत के पठार
पठार में
ये जो छपे पाँव आपके
रेत के फूल हैं।

याद में आपकी
हम कितने मशगूल हैं।

दे गया इक पल को
जीवन का उत्कर्ष,
हाथ से हाथ का
वो अनायास स्पर्श 

स्पर्श,
स्पर्श में झनकते सितार
सितार में
चेहरे के भाव आपके
प्रेम के स्कूल हैं।

सोहबतें आपकी मिलीं
तो बौरा गए
इतने  हसीन मौसम 
कहाँ से आ गए

आ गए 
तो मन में उठने लगीं चाहतें 
ये चाहतें 
दे रही हौसलों को तूल हैं। 

लेखक के बारे में-  जन्म- 16.10.1958, ग्राम- कुकथला, जनपद- आगरा, (उ. प्र.), बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी ( सिविल), संप्रति: दिल्ली जल बोर्ड में अधिशासी अभियंता (सिविल) के पद से सेवानिवृत्त ( 2019), संस्थापक/अध्यक्ष :  साहित्यक संस्था, शारदा साहित्य एवं ललित कला मंच, आगरा ( 1979), संपादन : काव्य संग्रह- तरुणिका (1980), धूप एक बरामदे की (1982) । लेखन : कविता, गीत,  ग़ज़ल।, प्रकाशित काव्य-संग्रह- सुनो नदी! (2020)
सम्पर्क :  बी-15/सी-21, लेह अपार्टमेंट्स, वसुन्धरा एन्क्लेव, दिल्ली-110096

ई-मेल : nsnirdosh@gmail.com, फोन : 9650289030, 9810131230

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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